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Basti News: खरमास का मौसम पर भी पड़ेगा प्रतिकूल असर, बारिश के भी आसार
Sat, 16 Dec 2023 12:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 16 Dec 2023 12:20 AM IST
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15 जनवरी 2024 को समाप्त हो रहा खरमास
खरमास में घट जाती है ऊर्जा के स्रोत सूर्य का तेज
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। 16 दिसंबर से शादी सहित अन्य मांगलिक आयोजनों का दौर थमने जा रहा है। ग्रहों के राजा सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने के कारण खरमास लग रहा है, जो 15 जनवरी 2024 तक रहेगा। इतना ही नहीं, ज्योतिषियों के अनुसार खरमास लगने का मौसम पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इस दौरान ठंड में काफी बढ़ोतरी होगी और हल्की बारिश भी हो सकती है। शीतलहर का प्रकोप बढ़ेगा।
ज्योतिषविद् सतीश मणि त्रिपाठी के मुताबिक, सूर्य अपने गुरु धनु की राशि में प्रवेश करने के साथ ही अपना सारा तेज समेट लेते हैं। कहा जा सकता है कि गुरु के आंगन में उनका प्रभाव संसार के लिए क्षीण हो जाता है। इसी लिए 15 दिसंबर से 15 जनवरी के बीच धूप कम निकलती है।
ज्योतिषियों के अनुसार सूर्य सभी ग्रहों, राशियों, नक्षत्रों, संवत्सरों, योगों, करणों और मुहूर्तों के अधिपति हैं। प्राणियों के शरीर की आत्मा एवं जगतात्मा हैं। जीव की उत्पत्ति में इनका प्रमुख योगदान रहता है। इस यात्रा के मध्य सूर्य की सेवा में उनके रथ के साथ अंशु और भग नाम के दो आदित्य, कश्यप और क्रतु नाम के दो ऋषि, महापद्म और कर्कोटक नाम के दो नाग, चित्रांगद तथा अरणायु नामक दो गन्धर्व सहा तथा सहस्या नाम की दो अप्सराएं, तार्क्ष्य एवं अरिष्टनेमि नामक दो यक्ष, आप तथा वात नामक दो राक्षस चलते हैं।
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प्रात: सूर्य की उपासना का उत्तम फल
उत्तम स्वास्थ्य, शिक्षा, संतान और यश की प्राप्ति, सामाजिक प्रतिष्ठा, प्रतियोगिता में सफलता व्यापार में कामयाबी और राज्यपद की लालसा रखने वाले, बेरोजगार नवयुवकों अथवा अधिकारिओं से प्रताड़ित लोगों को प्रातः लाल सूर्य की आराधना करनी चाहिए। बार-बार चोट लगती हो, शरीर में कैल्शियम की कमी हो, दुर्घटना के शिकार अधिक होते हों, अपनी हत्या का भय हो, यदि वे दोपहर ''अभिजीत'' मुहूर्त में सूर्य की आराधना करें तो उन्हें जीवन पर्यंत इसका भय नहीं रहेगा। शामकालीन सूर्य की आराधना करने से प्राणी को जीवनपर्यंत अन्न-जल एवं भौतिक वस्तुओं का पूर्णसुख मिलता है। इनकी आराधना करने अथवा जल से अर्घ्य देने से सभी दोष नष्ट हो जाते हैं।
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बाजार में फिर कम होगी हलचल
चौमासा समाप्त होने के बाद वैवाहिक गतिविधियों में तेजी आई थी। इससे बाजार में अच्छी-खासी गहमागहमी थी। सभी तरह के उपहारों, उपकरणों से लेकर घरेलू उपयोग के सामान, वाहन, आभूषण आदि का बाजार फलने-फूलने लगा था। मगर, खरमास लगने के साथ ही ऐसी गतिविधियां बंद हो जाएंगी तो बाजार पर इसका सीधा असर पड़ेगा। इलेक्ट्राॅनिक्स सामान के कारोबारी अभिषेक गुप्ता, रेडीमेड कपड़ों के कारोबारी अमित सिंह, ज्वेलरी कारोबारी गौरव आदि का कहना है कि खरमास में बाजार बैठ जाता है।
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खरमास में क्या नहीं करना चाहिए
- शुभ और मांगलिक कार्यों को करने की मनाही होती है, इसलिए किसी भी शुभ कार्य का आयोजन न करें।
- बेटी या बहू की विदाई नहीं करनी चाहिए।
- विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे संस्कारों का आयोजन नहीं करना चाहिए।
- नया वाहन, घर, प्लाट, रत्न-आभूषण और वस्त्र आदि नहीं खरीदना चाहिए।
- गाजर, मूली, तेल, चावल, तिल, बथुआ, मूंग, सोंठ और आंवला का सेवन नहीं करना चाहिए।
- लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा आदि का भी सेवन नहीं करना चाहिए।
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खरमास में घट जाती है ऊर्जा के स्रोत सूर्य का तेज
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। 16 दिसंबर से शादी सहित अन्य मांगलिक आयोजनों का दौर थमने जा रहा है। ग्रहों के राजा सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने के कारण खरमास लग रहा है, जो 15 जनवरी 2024 तक रहेगा। इतना ही नहीं, ज्योतिषियों के अनुसार खरमास लगने का मौसम पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इस दौरान ठंड में काफी बढ़ोतरी होगी और हल्की बारिश भी हो सकती है। शीतलहर का प्रकोप बढ़ेगा।
ज्योतिषविद् सतीश मणि त्रिपाठी के मुताबिक, सूर्य अपने गुरु धनु की राशि में प्रवेश करने के साथ ही अपना सारा तेज समेट लेते हैं। कहा जा सकता है कि गुरु के आंगन में उनका प्रभाव संसार के लिए क्षीण हो जाता है। इसी लिए 15 दिसंबर से 15 जनवरी के बीच धूप कम निकलती है।
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ज्योतिषियों के अनुसार सूर्य सभी ग्रहों, राशियों, नक्षत्रों, संवत्सरों, योगों, करणों और मुहूर्तों के अधिपति हैं। प्राणियों के शरीर की आत्मा एवं जगतात्मा हैं। जीव की उत्पत्ति में इनका प्रमुख योगदान रहता है। इस यात्रा के मध्य सूर्य की सेवा में उनके रथ के साथ अंशु और भग नाम के दो आदित्य, कश्यप और क्रतु नाम के दो ऋषि, महापद्म और कर्कोटक नाम के दो नाग, चित्रांगद तथा अरणायु नामक दो गन्धर्व सहा तथा सहस्या नाम की दो अप्सराएं, तार्क्ष्य एवं अरिष्टनेमि नामक दो यक्ष, आप तथा वात नामक दो राक्षस चलते हैं।
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प्रात: सूर्य की उपासना का उत्तम फल
उत्तम स्वास्थ्य, शिक्षा, संतान और यश की प्राप्ति, सामाजिक प्रतिष्ठा, प्रतियोगिता में सफलता व्यापार में कामयाबी और राज्यपद की लालसा रखने वाले, बेरोजगार नवयुवकों अथवा अधिकारिओं से प्रताड़ित लोगों को प्रातः लाल सूर्य की आराधना करनी चाहिए। बार-बार चोट लगती हो, शरीर में कैल्शियम की कमी हो, दुर्घटना के शिकार अधिक होते हों, अपनी हत्या का भय हो, यदि वे दोपहर ''अभिजीत'' मुहूर्त में सूर्य की आराधना करें तो उन्हें जीवन पर्यंत इसका भय नहीं रहेगा। शामकालीन सूर्य की आराधना करने से प्राणी को जीवनपर्यंत अन्न-जल एवं भौतिक वस्तुओं का पूर्णसुख मिलता है। इनकी आराधना करने अथवा जल से अर्घ्य देने से सभी दोष नष्ट हो जाते हैं।
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बाजार में फिर कम होगी हलचल
चौमासा समाप्त होने के बाद वैवाहिक गतिविधियों में तेजी आई थी। इससे बाजार में अच्छी-खासी गहमागहमी थी। सभी तरह के उपहारों, उपकरणों से लेकर घरेलू उपयोग के सामान, वाहन, आभूषण आदि का बाजार फलने-फूलने लगा था। मगर, खरमास लगने के साथ ही ऐसी गतिविधियां बंद हो जाएंगी तो बाजार पर इसका सीधा असर पड़ेगा। इलेक्ट्राॅनिक्स सामान के कारोबारी अभिषेक गुप्ता, रेडीमेड कपड़ों के कारोबारी अमित सिंह, ज्वेलरी कारोबारी गौरव आदि का कहना है कि खरमास में बाजार बैठ जाता है।
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खरमास में क्या नहीं करना चाहिए
- शुभ और मांगलिक कार्यों को करने की मनाही होती है, इसलिए किसी भी शुभ कार्य का आयोजन न करें।
- बेटी या बहू की विदाई नहीं करनी चाहिए।
- विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे संस्कारों का आयोजन नहीं करना चाहिए।
- नया वाहन, घर, प्लाट, रत्न-आभूषण और वस्त्र आदि नहीं खरीदना चाहिए।
- गाजर, मूली, तेल, चावल, तिल, बथुआ, मूंग, सोंठ और आंवला का सेवन नहीं करना चाहिए।
- लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा आदि का भी सेवन नहीं करना चाहिए।