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यूपी के इस जिले में पांडवों ने की थी शिवलिंग की स्थापना, जानिए क्यों गांव का नाम पड़ गया 'रसोइया'

Mon, 01 Feb 2021 02:34 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, बस्ती।
अमर उजाला नेटवर्क, बस्ती। Published by: vivek shukla Updated Mon, 01 Feb 2021 02:34 PM IST
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Junginath Temple special story in basti maharajganj UP
झुंगीनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।

ऐतिहासिक पांडवों की विरासत नगरी झुंगीनाथ (पंडुलघाट) पूरे बस्ती जिले में आस्था का केंद्र है। अज्ञातवास के समय पांडवों ने यहां पर काफी समय बिताया था। पांडवों ने पूजा करने के लिए झुंगीनाथ में शिवलिंग की स्थापना की थी। तभी से यहां आस्था का केंद्र बना हुआ है। वहीं, पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने से अब इस स्थान को नई पहचान मिलेगी, जो रोजगार के भी नए रास्ते खोलेगा।

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कप्तानगंज से दुबौलिया मार्ग पर सात किलोमीटर दूरी पर मनोरमा नदी के किनारे झुंगीनाथ पांडव नगर का मंदिर है। इस शिव मंदिर की बड़ा ही ऐतिहासिक महत्व है। क्षेत्रीय लोगों के साथ-साथ जिले भर के श्रद्धालु यहां दर्शन करने के लिए आते हैं। इस मंदिर का भारतीय पौराणिक स्थलों में महत्वपूर्ण स्थान हैं।
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अज्ञातवास के समय पांडवों ने यहां पर काफी समय बिताया था, जिसकी झलक आस-पास के गांवों में आज भी देखने को मिल जाती है। मंदिर के पुजारी जयप्रकाश दास बताते हैं कि मंदिर के पूरब पांडवों का भोजन बनता था, जो रसोइया गांव के रूप में आज भी विद्यमान हैं। मनोरमा नदी में भीमकुंड के नाम से एक जगह है।
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अज्ञातवास के समय एक बार पांचों पांडवों को प्यास लगी। प्यास बुझाने के लिए भीम ने अपने गदा के बल पर पानी निकाला था। यहां पर सिद्धव नामक असुर का पांडवों ने संहार किया था। आज भी इस जगह को सिद्धव नाला के रूप में जाना जाता हैं।

इसी रास्ते से पांडव गए थे, जो पदमापुर से होते हुए छपिया घाट तक जाता है। यहां पर सबकी मनोकामना पूरी होती हैं। साल भर यहां पूजा पाठ के साथ साथ बड़े-बड़े अनुष्ठान होते रहते हैं। चैत्र पूर्णिमा, महाशिवरात्रि और सावन माह के तेरस पर यहां पर हजारों कांवड़ियों की ओर से जलाभिषेक किया जाता है।

क्षेत्र के गोविंदपारा गांव के रहने वाले दिल्ली शिव सेना प्रमुख व झुंगीनाथ मंदिर के अध्यक्ष ध्रुव चंद्र पाठक की ओर से वर्ष 2006 से लेकर हर वर्ष 19 जनवरी से लेकर 26 जनवरी तक यहां राम महायज्ञ कराया जाता है। पूर्णाहुति पर विशाल भंडारा भी होता है। इस दौरान हिमाचल के कांगड़ा जिले से ज्वाला माता की अखंड ज्योति लाकर मंदिर में जलाई जाती है।

कप्तानगंज विधायक सीए चंद्र प्रकाश शुक्ला ने कहा कि झुंगीनाथ धाम को पर्यटक बनने से पूरे क्षेत्र का विकास होगा। पर्यटक स्थल के बनने के लगातार प्रयास किया गया। अब जाकर सफलता मिली।

मंदिर के पुजारी जय प्रकाश दास ने कहा कि मंदिर को पर्यटक के रूप में विकसित होने से चौमुखी विकास होगा। यहां लोगों का आवागमन बढ़ेगा। इससे यहां दुकानें खुलेंगी और लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

मानपुर निवासी नरेंद्रनाथ त्रिपाठी ने बताया कि क्षेत्र के पर्यटक स्थल बनने से पांडवों की विरासत नगरी फिर से आबाद हो जाएगी। स्थानीय लोगों के साथ जिले व प्रदेश के लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत से रू-ब-रू होंगे।

झुंगीनाथ मंदिर के अध्यक्ष ध्रुव चंद्र पाठक ने बताया कि इस मंदिर के उत्थान से क्षेत्र का देश-प्रदेश से जुड़ाव बढ़ेगा। घरेलू पर्यटक आकर्षित होंगे तो यहां के लोगों के आय के साधन भी विकसित होंगे। यह अच्छी पहल है।

 
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