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Basti News: 34 वर्ष से उद्योगों का इंतजार कर रहा मिनी औद्योगिक आस्थान
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मिनी औद्योगिक क्षेत्र आस्थान।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। एक ओर ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट कर पूरा तंत्र उद्यम लगाने की तैयारी में जुटा है, मगर जिले के विभिन्न ब्लाॅकों में स्थापित मिनी औद्योगिक आस्थान मूलभूत सुविधाओं की कमी के चलते उपेक्षित है। इंवेस्टर्स समिट में भी इन्हें जगह नहीं मिल पाई है। नतीजतन करीब 34 वर्ष से उपेक्षित यह आस्थान उद्योगों का इंतजार कर रहे हैं।
उद्योग विभाग ने जिले में औद्योगिक नीति के तहत तहसील और ब्लाॅक स्तर पर नए भूखंड विकसित किए थे। इसका नाम मिनी औद्योगिक आस्थान दिया गया। 34 वर्षों में एक भी स्थान विकसित नहीं हो पाया, इसकी वजह यह है कि मिनी औद्योगिक आस्थानों में बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उद्योग विभाग मुहैया नहीं करा पाया है।
इन औद्योगिक आस्थानों के तकरीबन दो सौ से ज्यादा प्लाट वर्षों से निवेशकों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब एक बार इन्वेस्टर्स समिट में हुए 13681.25 हजार करोड़ के निवेश पर 191 उद्यमियों ने एमओयू साइन करने के बाद नई इकाइयों की स्थापना के लिए इनका महत्व बढ़ गया है। उद्यमी मूलभूत सुविधाएं पाने के लिए संघर्षरत हैं।
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उपायुक्त ने शुरू की पहल
जिले आठ मिनी औद्योगिक आस्थानों को विकसित करने के लिए जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र के उपायुक्त हरेंद्र प्रताप ने कहा कि यह सही है कि मिनी औद्योगिक आस्थान अभी अविकसित है, मगर अब यहां उद्योग स्थापना की कवायद शुरू कर दी गई है। यूपी राज्य निर्माण एवं अवस्थापना विकास निगम के एक्सईएन को पत्र लिख कर बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ चारदीवारी बनाए जाने के लिए प्रस्ताव मांगा गया है, ताकि उसके अनुसार शासन से बजट की मांग की जा सके।
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ये हैं जनपद के आठ मिनी औद्योगिक आस्थान
गनेशपुर-सदर,
भदावल-हर्रैया,
पांऊ-कुदरहा, राजाजोत कला-कप्तानगंज,
बोदवल-बनकटी, रेहार जंगल-सल्टौआ,
धोबहिया-गौर,
परसोहिया-रामनगर
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बस्ती। एक ओर ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट कर पूरा तंत्र उद्यम लगाने की तैयारी में जुटा है, मगर जिले के विभिन्न ब्लाॅकों में स्थापित मिनी औद्योगिक आस्थान मूलभूत सुविधाओं की कमी के चलते उपेक्षित है। इंवेस्टर्स समिट में भी इन्हें जगह नहीं मिल पाई है। नतीजतन करीब 34 वर्ष से उपेक्षित यह आस्थान उद्योगों का इंतजार कर रहे हैं।
उद्योग विभाग ने जिले में औद्योगिक नीति के तहत तहसील और ब्लाॅक स्तर पर नए भूखंड विकसित किए थे। इसका नाम मिनी औद्योगिक आस्थान दिया गया। 34 वर्षों में एक भी स्थान विकसित नहीं हो पाया, इसकी वजह यह है कि मिनी औद्योगिक आस्थानों में बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उद्योग विभाग मुहैया नहीं करा पाया है।
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इन औद्योगिक आस्थानों के तकरीबन दो सौ से ज्यादा प्लाट वर्षों से निवेशकों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब एक बार इन्वेस्टर्स समिट में हुए 13681.25 हजार करोड़ के निवेश पर 191 उद्यमियों ने एमओयू साइन करने के बाद नई इकाइयों की स्थापना के लिए इनका महत्व बढ़ गया है। उद्यमी मूलभूत सुविधाएं पाने के लिए संघर्षरत हैं।
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उपायुक्त ने शुरू की पहल
जिले आठ मिनी औद्योगिक आस्थानों को विकसित करने के लिए जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र के उपायुक्त हरेंद्र प्रताप ने कहा कि यह सही है कि मिनी औद्योगिक आस्थान अभी अविकसित है, मगर अब यहां उद्योग स्थापना की कवायद शुरू कर दी गई है। यूपी राज्य निर्माण एवं अवस्थापना विकास निगम के एक्सईएन को पत्र लिख कर बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ चारदीवारी बनाए जाने के लिए प्रस्ताव मांगा गया है, ताकि उसके अनुसार शासन से बजट की मांग की जा सके।
ये हैं जनपद के आठ मिनी औद्योगिक आस्थान
गनेशपुर-सदर,
भदावल-हर्रैया,
पांऊ-कुदरहा, राजाजोत कला-कप्तानगंज,
बोदवल-बनकटी, रेहार जंगल-सल्टौआ,
धोबहिया-गौर,
परसोहिया-रामनगर