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Basti News: पराली के धुएं व धूल से बढ़ा रहा प्रदूषण
Thu, 23 Nov 2023 01:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 23 Nov 2023 01:33 AM IST
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एक्यूआई में इजाफा... जहरीली हवा बिगाड़ेगी सेहत
एक्यूआई पहुंचा 170, अभी और बढ़ने की आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जनपद में हवा का गुणवत्ता स्तर (एक्यूआई) में सुधार नहीं हो रहा है। यह लगातार जहरीली होती जा रही है। शनिवार गिरावट के बाद एक्यूआई करीब 120 तक पहुंच गया था। सोमवार से फिर इसमें तेजी देखी जा रही है। बुधवार की सुबह एक्यूआई 170 और शाम पांच बजे करीब 156 दर्ज किया गया। विशेषज्ञ पराली व धूल को प्रदूषण का कारण मान रहे हैं।
महीनेभर से मौसम शुष्क बना हुआ है। वातावरण में नमी बढ़ने के कारण पाल्यूटेंट भारी होकर ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। इसकी वजह से दिनभर धुंध छा रही है। दूसरी वजह धड़ल्ले से जलाई जा रही पराली है। बुधवार को एक्यूआई 170 तक पहुंच गया, जो सेहत के लिए हानिकारक बताया जा रहा है। दिनभर धुंध के चलते धूप भी हल्की रही। एक बार को लगा कि मानों बादल छाए हुए हैं।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ. अमर नाथ मिश्र ने बताया कि नमी बढ़ने से धूल-धुआं के कारण धुंध छा रहा है। ठंड के मौसम में तापमान गिरने से नमी बढ़ जाती है। इस वजह से हवा में पाल्यूटेंट (प्रदूषण फैलाने वाले कारकों) का प्रसार धीमा हो जाता है। इससे उनका घनत्व बढ़ जाता है। वह वायुमंडल की ऊपरी सतह में नहीं जा पाते हैं। इस कारण हवा प्रदूषित होती जाती है। धूल के अलावा वाहनाें के धुआं, आग जलाने, साफ-सफाई सहित अन्य कारणों से प्रदूषण बढ़ जाता है। इसका जनपद में नजर आ रहा है।
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धुंध की चादर ऐसी कि पास भी कुछ नजर नहीं आया
मौसम विज्ञानी डॉ. अमर नाथ मिश्र ने बताया कि दिसंबर तक ऐसी स्थिति बन रहेगी। प्रदूषण फैलाने वाले कारकों का आकार बढ़ने से एक परदा बन जाता है जिससे दृश्यता कम हो जाती है। पराली जलाने से उठने वाला धुआं भी धुंध के प्रमुख कारणों में से एक है।
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अस्थमा रोगियों के लिए हानिकारक है धुंध
चेष्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि धूल और धुएं के कारण जो धुंध छा रही है। यह अस्थमा रोगियों के लिए हानिकारक है। ऐसे मौसम में अस्थमा अटैक आना सामान्य बात है। इसलिए अस्थमा के मरीज धुंध व धूल से बचें और अपनी नियमित दवाएं लेते रहें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जनपद में हवा का गुणवत्ता स्तर (एक्यूआई) में सुधार नहीं हो रहा है। यह लगातार जहरीली होती जा रही है। शनिवार गिरावट के बाद एक्यूआई करीब 120 तक पहुंच गया था। सोमवार से फिर इसमें तेजी देखी जा रही है। बुधवार की सुबह एक्यूआई 170 और शाम पांच बजे करीब 156 दर्ज किया गया। विशेषज्ञ पराली व धूल को प्रदूषण का कारण मान रहे हैं।
महीनेभर से मौसम शुष्क बना हुआ है। वातावरण में नमी बढ़ने के कारण पाल्यूटेंट भारी होकर ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। इसकी वजह से दिनभर धुंध छा रही है। दूसरी वजह धड़ल्ले से जलाई जा रही पराली है। बुधवार को एक्यूआई 170 तक पहुंच गया, जो सेहत के लिए हानिकारक बताया जा रहा है। दिनभर धुंध के चलते धूप भी हल्की रही। एक बार को लगा कि मानों बादल छाए हुए हैं।
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आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ. अमर नाथ मिश्र ने बताया कि नमी बढ़ने से धूल-धुआं के कारण धुंध छा रहा है। ठंड के मौसम में तापमान गिरने से नमी बढ़ जाती है। इस वजह से हवा में पाल्यूटेंट (प्रदूषण फैलाने वाले कारकों) का प्रसार धीमा हो जाता है। इससे उनका घनत्व बढ़ जाता है। वह वायुमंडल की ऊपरी सतह में नहीं जा पाते हैं। इस कारण हवा प्रदूषित होती जाती है। धूल के अलावा वाहनाें के धुआं, आग जलाने, साफ-सफाई सहित अन्य कारणों से प्रदूषण बढ़ जाता है। इसका जनपद में नजर आ रहा है।
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धुंध की चादर ऐसी कि पास भी कुछ नजर नहीं आया
मौसम विज्ञानी डॉ. अमर नाथ मिश्र ने बताया कि दिसंबर तक ऐसी स्थिति बन रहेगी। प्रदूषण फैलाने वाले कारकों का आकार बढ़ने से एक परदा बन जाता है जिससे दृश्यता कम हो जाती है। पराली जलाने से उठने वाला धुआं भी धुंध के प्रमुख कारणों में से एक है।
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अस्थमा रोगियों के लिए हानिकारक है धुंध
चेष्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि धूल और धुएं के कारण जो धुंध छा रही है। यह अस्थमा रोगियों के लिए हानिकारक है। ऐसे मौसम में अस्थमा अटैक आना सामान्य बात है। इसलिए अस्थमा के मरीज धुंध व धूल से बचें और अपनी नियमित दवाएं लेते रहें।