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शहद की मिठास बन रही अतिरिक्त आमदनी का जरिया

Tue, 08 Feb 2022 12:42 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 08 Feb 2022 12:42 AM IST
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Income sorceses honey,Income sorceses of honey
शहद की मिठास बन रही अतिरिक्त आय की स्रोत
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बस्ती। जनपद के करीब दर्जन भर किसानों के जीवन में मधुमक्खियां मिठास घोल रही है। मधुमक्खी पालन किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत बन रहा है। इसमें उद्यान विभाग की भी बड़ी भूमिका है। विभाग किसानों को अनुदान उपलब्ध कराता है जिससे मधुमक्खियों के पालन में आने वाला खर्च आधा रह जाता है। इस व्यवसाय में किसानों को एक बार कुछ धनराशि लगानी पड़ती है।
मधुमक्खी पालन के लिए उद्यान विभाग किसानों को प्रशिक्षित करता है। विभाग से प्रशिक्षण लेकर परशुरामपुर ब्लॉक के कोहराएं निवासी दूधराम, विक्रम कुमार, बरखू व कुंवरापुर निवासी नंदलाल और विक्रमजोत ब्लॉक क्षेत्र के इमिलिया निवासी नीबर व फूूलडीह निवासी सरयू आदि मौन (मधुमक्खी) पालन कर रहे हैं। कोहराएं के दूधराम बताते हैं कि शहर उत्पादन का काम बहुत कठिन नहीं है। घर पर रहकर जीविका चलाने का यह सबसे बढ़िया माध्यम है। बताते हैं खेती के साथ मधुमक्खी पालन फायदे का काम है।
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अयोध्या में बिक जाता है शहद
शहद उत्पादक दूधराम, विक्रम कुमार, सरयू आदि बताते हैं कि फूलों की उपलब्धता के आधार पर शहद प्राप्त होता है। जनवरी-फरवरी में अधिक मात्रा में शहद प्राप्त हो जाता है। इससे सालाना कम से कम डेढ़ से दो लाख तक की आय प्राप्त हो जाती है। बताते हैं कि तैयार शहद को अयोध्या में स्थित व्यवसायियों को दो सौ से 250 रुपये प्रति किलो ग्राम में बेचते हैं। इन व्यवसायियों के माध्यम से कंपनियां शहद खरीदती हैं।
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फसल उत्पादन बढ़ाने में सहायक हैं मधुमक्खियां
मधुमक्खी पालन से आय व रोजगार को बढ़ावा दिया मिलता है। इसे भूमिहीन लोग भी कर सकते हैं। मधुमक्खी पालन कृषि व बागवानी उत्पादन बढ़ाने की क्षमता भी रखता है। मधुमक्खियों से शहद के अलावा मोम व गोंद भी प्राप्त होते हैं। मधुमक्खियों से फूलों में पर-परागणकी क्रिया तेज होती है जिससे फसलों की उपज में लगभग एक चौथाई तक बढ़ोत्तरी होती है।

प्रशिक्षण के बाद उद्यान विभाग देता है अनुदान
उद्यान विभाग मधुमक्खी पालन के लिए किसानों को प्रशिक्षण देता है। प्रशिक्षण उपरांत किसानों को सरकार से अनुबंधित फर्म से मधुमक्खी पालन के लिए 50 बक्से खरीदने होते हैं। इसके बाद अनुदान के लिए उद्यान विभाग में खरीद बिल जमा करना होता है। वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक धर्मेंद्र चौधरी बताते हैं कि बक्सों का भौतिक सत्यापन कर किसानों के बैंक खाते में अनुदान राशि डीबीटी के माध्यम से भेजी जाती है। जिला उद्यान अधिकारी राजेंद्र यादव ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में छह लोगों को अनुदान राशि देने का लक्ष्य शासन से मिला है। अनुदान के लिए आवेदन करने वाले किसानों का सत्यापन शुरू कर दिया गया है।
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