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नई बनाने में पुरानी सड़कें और पुलिया ध्वस्त

Wed, 21 Feb 2018 12:48 AM IST
बस्ती, उत्तर प्रदेश्ा
बस्ती, उत्तर प्रदेश्ा Updated Wed, 21 Feb 2018 12:48 AM IST
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In the new build, old roads and culvert collapses.
ध्वस्त सड़क। - फोटो : बस्ती
बस्ती। हाइवे सहित तमाम नए रोड बनने की वजह से पैदा हुई विसंगतियों से नगर थाने के रजली के पास बवाल होते-होते बचा। ओवरलोड ट्रकों के गुजरने से धंसी पंप कैनाल की पक्की पटरी धंस गई थी। गांव के कुछ युवक टूटी सड़क से होकर गुजरने वालों पर छींटाकशी कर रहे थे। रास्ता बंद होने की जानकारी न होने की स्थिति में कार लेकर पहुंचा एक परिवार के साथ गांव का एक युवक बदसलूकी करने लगा। उसकी हरकत से झुंझलाए वहां खड़े बाकी लोगों ने किसी तरह उन्हें पगडंडी से होकर निकलवाया। यह एक बानगी है। इस तरह की जिले में कई ऐसी सड़के हैं, जो दूसरी सड़कों बनाने के लिए जा रहे ओवर लोड वाहनों के कारण ध्वस्त हो गई हैं, जो रोज जाम और हादसों का कारण बन रही हैं।
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  वहां मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि इस तरह से कई जगह सड़कें इन ट्रकों की वजह से धंस गई हैं, जहां अक्सर दुर्घटनाएं हो रही हैं। ऐसी ही उत्तमपुर से नरायनपुर को जोड़ने वाली सड़क की एक पुलिया भी ओवरलोड होने के कारण टूट गई है। इस तरह नगर बाजार से मारन बाजार तक जाने वाला मार्ग भी ध्वस्त हो चुका है। पोखरनी चौराहे से नगहरा मार्ग भी खराब हो चुका है। यह किसी एक क्षेत्र की बात नहीं है, बल्कि जिले के ज्यादातर गांवों से निकलने वाले लिंक रोड का यही हाल है।
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 इस विसंगति पर डीएम सुशील कुमार मौर्य ने सख्त रुख अख्तियार किया है। कहा है कि यदि कोई एजेंसी किसी विभाग का नुकसान करती है तो उसके मरम्मत का जिम्मा संबंधित एजेंसी का होगा। अगर हाइवे या किसी भी रोड के बनाने में नागरिकों को परेशान करने या अन्य कोई मनमानी भारी पड़ेगी।
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सड़क बनाने के मैटेरियल्स लादे ओवरलोड ट्रक-डंपर शहर से गांव को जोड़ने के संपर्क मार्ग, ह्यूम पाइप और आरसीसी तकनीकी से बने पुल-पुलिया से होकर गुजरते हैं। इसमें ब्लॉक स्तर से बनाई गई पुलिया के अलावा पीडब्लूडी, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा आदि को टूटी सड़क का मामला संज्ञान में नहीं है। 


भगवान बुद्ध की तपोस्थली सारनाथ (वाराणसी) को उनकी जन्मस्थली लुंबिनी से जोड़ने की बहु-महत्वाकांक्षी परियोजना का 2016 में केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने जैसे ही शिलान्यास किया तो जिले की दक्षिणी सीमा कलवारी-टांडा से उत्तर पूर्वी सीमा के रुधौली तक का रोड तोड़कर दूसरी गिट्टियां बिछने लगीं। युद्ध स्तर पर टू-लेन राजमार्ग का निर्माण शुरू तो हुआ लेकिन मौजूदा समय तक पूरा नहीं हो पाया। रोड बना रही एजेंसी के सैकड़ों ट्रक-डंपर अगल-बगल के गांव क्षेत्र के लिंक रोड से होकर मिट्टी ढोने लगे। बाद में 12 से 22 चक्का तक के ओवरलोड गिट्टी, स्टोन डस्ट आदि लादकर ऐसे रास्ते रौंदने लगे हैं, जिसे हल्के वाहन के चलने के लिए बनाया गया है।
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