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किशोरी से दुष्कर्म में दस साल की सजा
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किशोरी से दुष्कर्म में दस साल की सजा
- 35 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पॉक्सो न्यायालय के न्यायाधीश बृजेश मणि त्रिपाठी की अदालत ने किशोरी से दुष्कर्म के मामले में एक व्यक्ति को 10 वर्ष कारावास व 35 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
अभियोजन अधिकारी/ शासकीय अधिवक्ता अखिलेश दुबे, वंदना चौधरी, कमलेश चौधरी अरविंद पांडेय तथा अरुण कुमार श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि कलवारी थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी एक व्यक्ति ने थाने पर तहरीर दिया कि सात नवंबर 2017 को वह अपनी पत्नी की इलाज के लिए टांडा गये थे। घर में उसकी दो नाबालिग बेटियां मौजूद थीं। शाम करीब तीन से चार बजे गांव का पीर घर आया और मेरी 16 वर्षीय नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर बाइक पर बैठाकर भगा ले गया। पीड़ित ने कई जगह प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। पीड़ित के बयान से घटना साबित हुई। अभियोजन अधिकारियों ने साक्ष्य संकलित कर न्यायालय को दिया। न्यायालय ने दोनो पक्षों की दलील सुनने के बाद तथ्यों के आधार पर पीर मोहम्मद को सजा सुनाई।
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- 35 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पॉक्सो न्यायालय के न्यायाधीश बृजेश मणि त्रिपाठी की अदालत ने किशोरी से दुष्कर्म के मामले में एक व्यक्ति को 10 वर्ष कारावास व 35 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
अभियोजन अधिकारी/ शासकीय अधिवक्ता अखिलेश दुबे, वंदना चौधरी, कमलेश चौधरी अरविंद पांडेय तथा अरुण कुमार श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि कलवारी थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी एक व्यक्ति ने थाने पर तहरीर दिया कि सात नवंबर 2017 को वह अपनी पत्नी की इलाज के लिए टांडा गये थे। घर में उसकी दो नाबालिग बेटियां मौजूद थीं। शाम करीब तीन से चार बजे गांव का पीर घर आया और मेरी 16 वर्षीय नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर बाइक पर बैठाकर भगा ले गया। पीड़ित ने कई जगह प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। पीड़ित के बयान से घटना साबित हुई। अभियोजन अधिकारियों ने साक्ष्य संकलित कर न्यायालय को दिया। न्यायालय ने दोनो पक्षों की दलील सुनने के बाद तथ्यों के आधार पर पीर मोहम्मद को सजा सुनाई।
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