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Basti News: शहर से बाहर नए बस अड्डे की टूट गई आस... दोबारा नहीं हुए प्रयास
Fri, 15 Mar 2024 02:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 15 Mar 2024 02:34 AM IST
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दो साल पहले गोटवा के करीब रोडवेज स्थापित करने की हुई थी पेशकश
दूरी की वजह से लोगों ने कर दिया विरोध, इसके बाद नहीं आया कोई प्रस्ताव
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर से बाहर नए बस अड्डे की स्थापना की उम्मीद फिलहाल टूटती दिख रही है। दो साल पहले मुख्यालय से करीब दस किमी दूर बस्ती-अयोध्या हाईवे के किनारे गोटवा के पास बस अड्डा स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार हुआ। इसके चर्चा में आते ही राजनैतिक एवं गैर राजनैतिक संगठनों का विरोध शुरू हो गया। लोगों का तर्क था कि नए रोडवेज की दूरी मुख्यालय से अधिक हो जाएगी। इससे आमजन को परेशानी उठानी पड़ेगी। विरोध के चलते यह प्रस्ताव कुछ ही दिनों के बाद ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद से नए रोडवेज के लिए दोबारा प्रयास ही नहीं हुए।
दिन-ब- दिन शहरी क्षेत्र का दायरा बढ़ने के कारण पुराना रोडवेज शहर के मध्य हिस्से में आ गया है। आबादी एवं आवागमन के लिहाज से यह रोडवेज अब संकरा महसूस किया जा रहा है। रोडवेज के पास 80 से अधिक बस खड़ी करने की क्षमता नहीं है। जबकि यहां वर्तमान में अनुबंधित एवं डिपो की मिलाकर 120 बसों का संलचन हो रहा है।
सवारी भरने के चक्कर में सड़क पर बसों को खड़ा किया जाता है। इसके अलावा रोडवेज-जिला अस्पताल मार्ग और मालवीय मार्ग पर इन बसों की आवाजाही भी हर समय रहती है। इससे शहरी यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इन समस्याओं के दृष्टिगत दो साल पहले डीएम स्तर से नए बस अड्डा के स्थापना की पहल हुई। इसके लिए गोटवा के पास हाईवे के किनारे स्थल काचयन करने का प्रस्ताव लाया गया। यह कार्रवाई आगे बढ़ती तभी स्थानीय लोगों ने अधिक दूरी होने का कारण बताकर इस प्रस्ताव का विरोध शुरू कर दिया। इससे तत्कालीन डीएम को प्रस्ताव रद्द करना पड़ा।
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पर्यटक भवन स्थल रोडवेज के लिए उपयुक्त
बड़ेवन के पास हाईवे के सर्विस रोड के किनारे उपेक्षित पड़े पर्यटक भवन का स्थल नए रोडवेज के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। यह स्थल शहर से सटा हुआ है और हाईवे से भी जुड़ा है। इससे शहर से रोडवेज पहुंचने में ज्यादा दूरी लोगों को तय नहीं करनी पड़ेगी। ऑटो, टैक्सी की भी सुविधा हर समय रहती है। मगर दोबारा प्रयास न होने से इस स्थल का प्रस्ताव नहीं आ सका है। वर्तमान में इस स्थल की उपयोगिता भी नहीं है। अलबत्ता पर्यटक स्थल का कोई पुर्साहाल न होने से लोग आसपास की जमीनों पर कब्जा भी करने लगे हैं। पहले सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय रोडवेज इस स्थल का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाने की तैयारी में भी था। मगर दोबारा नए रोडवेज की कवायद न होने से मामला ठंडा पड़ गया।
छह माह पहले जिले के भ्रमण पर आए सूबे के परिवहन मंत्री ने पुराने रोडवेज को हवाई अड्डे के तर्ज पर विकसित कर अत्याधुनिक बनाए जाने की घोषण की थी। मगर यह योजना अभी अधर में है। डिपो प्रशासन के अनुसार अभी तक अत्याधुनिक रोडवेज के निर्माण के लिए आगणन आदि की कोई कार्रवाई शुरू नहीं हो सकी है। जबकि यहां मल्टी कॉपलेक्स, विश्रामालय, यात्री गेस्ट हाउस एवं कामर्शियल निर्माण का कार्य प्रस्तावित है।
...
कोट
पिछले दिनों नए रोडवेज की स्थापना के लिए डीएम स्तर से पहल की गई थी। बाद में मामला शांत हो गया। नए रोडवेज के लिए स्थल चयन की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो सकी है। जहां तक पुराने रोडवेज को विकसित करने का मामला है तो इस दिशा में भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई है।
-आयुष भटनागर, एआरएम
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दूरी की वजह से लोगों ने कर दिया विरोध, इसके बाद नहीं आया कोई प्रस्ताव
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर से बाहर नए बस अड्डे की स्थापना की उम्मीद फिलहाल टूटती दिख रही है। दो साल पहले मुख्यालय से करीब दस किमी दूर बस्ती-अयोध्या हाईवे के किनारे गोटवा के पास बस अड्डा स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार हुआ। इसके चर्चा में आते ही राजनैतिक एवं गैर राजनैतिक संगठनों का विरोध शुरू हो गया। लोगों का तर्क था कि नए रोडवेज की दूरी मुख्यालय से अधिक हो जाएगी। इससे आमजन को परेशानी उठानी पड़ेगी। विरोध के चलते यह प्रस्ताव कुछ ही दिनों के बाद ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद से नए रोडवेज के लिए दोबारा प्रयास ही नहीं हुए।
दिन-ब- दिन शहरी क्षेत्र का दायरा बढ़ने के कारण पुराना रोडवेज शहर के मध्य हिस्से में आ गया है। आबादी एवं आवागमन के लिहाज से यह रोडवेज अब संकरा महसूस किया जा रहा है। रोडवेज के पास 80 से अधिक बस खड़ी करने की क्षमता नहीं है। जबकि यहां वर्तमान में अनुबंधित एवं डिपो की मिलाकर 120 बसों का संलचन हो रहा है।
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सवारी भरने के चक्कर में सड़क पर बसों को खड़ा किया जाता है। इसके अलावा रोडवेज-जिला अस्पताल मार्ग और मालवीय मार्ग पर इन बसों की आवाजाही भी हर समय रहती है। इससे शहरी यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इन समस्याओं के दृष्टिगत दो साल पहले डीएम स्तर से नए बस अड्डा के स्थापना की पहल हुई। इसके लिए गोटवा के पास हाईवे के किनारे स्थल काचयन करने का प्रस्ताव लाया गया। यह कार्रवाई आगे बढ़ती तभी स्थानीय लोगों ने अधिक दूरी होने का कारण बताकर इस प्रस्ताव का विरोध शुरू कर दिया। इससे तत्कालीन डीएम को प्रस्ताव रद्द करना पड़ा।
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पर्यटक भवन स्थल रोडवेज के लिए उपयुक्त
बड़ेवन के पास हाईवे के सर्विस रोड के किनारे उपेक्षित पड़े पर्यटक भवन का स्थल नए रोडवेज के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। यह स्थल शहर से सटा हुआ है और हाईवे से भी जुड़ा है। इससे शहर से रोडवेज पहुंचने में ज्यादा दूरी लोगों को तय नहीं करनी पड़ेगी। ऑटो, टैक्सी की भी सुविधा हर समय रहती है। मगर दोबारा प्रयास न होने से इस स्थल का प्रस्ताव नहीं आ सका है। वर्तमान में इस स्थल की उपयोगिता भी नहीं है। अलबत्ता पर्यटक स्थल का कोई पुर्साहाल न होने से लोग आसपास की जमीनों पर कब्जा भी करने लगे हैं। पहले सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय रोडवेज इस स्थल का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाने की तैयारी में भी था। मगर दोबारा नए रोडवेज की कवायद न होने से मामला ठंडा पड़ गया।
छह माह पहले जिले के भ्रमण पर आए सूबे के परिवहन मंत्री ने पुराने रोडवेज को हवाई अड्डे के तर्ज पर विकसित कर अत्याधुनिक बनाए जाने की घोषण की थी। मगर यह योजना अभी अधर में है। डिपो प्रशासन के अनुसार अभी तक अत्याधुनिक रोडवेज के निर्माण के लिए आगणन आदि की कोई कार्रवाई शुरू नहीं हो सकी है। जबकि यहां मल्टी कॉपलेक्स, विश्रामालय, यात्री गेस्ट हाउस एवं कामर्शियल निर्माण का कार्य प्रस्तावित है।
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कोट
पिछले दिनों नए रोडवेज की स्थापना के लिए डीएम स्तर से पहल की गई थी। बाद में मामला शांत हो गया। नए रोडवेज के लिए स्थल चयन की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो सकी है। जहां तक पुराने रोडवेज को विकसित करने का मामला है तो इस दिशा में भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई है।
-आयुष भटनागर, एआरएम