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छिपी प्रतिभा निखारें शिक्षक: डीएम
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 19 May 2016 12:11 AM IST
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शिक्षकों की काउंसलिंग शुरू
- फोटो : अमर उजाला
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बस्ती। प्राथमिक शिक्षा में आ रही गिरावट और गुणवत्ता में सुधार को लेकर बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में डीएम की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें शिक्षा विभाग के अधिकारियों और शिक्षक नेताओं समेत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के वार्डेन मौजूद रहे। डीएम नरेंद्र सिंह पटेल ने कहा कि किसी भी देश की तरक्की में शिक्षा का बहुत महत्व होता है। कहा कि सभी बच्चों में कोई न कोई प्रतिभा छिपी होती है, उसको उभारना शिक्षक का कार्य ही नहीं, दायित्व भी है। कहा कि बच्चा और शिक्षक का संबंध माता-पिता से भी प्रगाढ़ होता है। बच्चों को गाइड करें, उनमें हीन भावना न आने दें।
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष उदय शंकर शुक्ल ने कहा कि शिक्षकों से जब तक शिक्षणेतर कार्य कराए जाएंगे, तब तक गुणवत्ता में सुधार संभव नहीं हैं। शिक्षक सिर्फ शिक्षण के लिए है, उसे भवन निर्माण और एमडीएम जैसे कामों में नहीं लगाना चाहिए। शिक्षकों की तैनाती में मानक का ध्यान रखना चाहिए। बच्चों की संख्या के आधार पर शिक्षकों की तैनाती होनी चाहिए। ब्लॉकवार शिक्षकों की तैनाती का सुझाव दिया गया, ताकि वह समय से स्कूल पहुंच सके।
रोल मॉडल शिक्षकों और मेधावी बच्चों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने का भी सुझाव दिया गया। कक्षा के हिसाब से शिक्षकों की तैनाती की बात कही गई। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को पठन-पाठन के बारे में भी बच्चों से जानकारी लेने की सलाह दी गई। बीएसए डाक्टर संतोष कुमार सिंह ने कहा कि समाज का विश्वास प्राथमिक विद्यालयों के प्रति समाप्त होता जा रहा है।
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आज हर व्यक्ति अपने बच्चे का दाखिला प्राइवेट स्कूलों में कराना पसंद करता है। उन्होंने गुणवत्तायुक्त शिक्षा के लिए विभाग की कार्य योजना की जानकारी विस्तार से दी। इस मौके पर बीईओ घनश्याम वर्मा, अखिलेश सिंह, उदयभान कुशवाहा, शैलेंद्र, जगदीश यादव, केपी दुबे, संतोष पांडेय, संतोष ओझा, राम तिलक वर्मा और एमडीएम के जिला समन्वयक अमित कुमार मिश्र आदि रहे।
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प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष उदय शंकर शुक्ल ने कहा कि शिक्षकों से जब तक शिक्षणेतर कार्य कराए जाएंगे, तब तक गुणवत्ता में सुधार संभव नहीं हैं। शिक्षक सिर्फ शिक्षण के लिए है, उसे भवन निर्माण और एमडीएम जैसे कामों में नहीं लगाना चाहिए। शिक्षकों की तैनाती में मानक का ध्यान रखना चाहिए। बच्चों की संख्या के आधार पर शिक्षकों की तैनाती होनी चाहिए। ब्लॉकवार शिक्षकों की तैनाती का सुझाव दिया गया, ताकि वह समय से स्कूल पहुंच सके।
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रोल मॉडल शिक्षकों और मेधावी बच्चों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने का भी सुझाव दिया गया। कक्षा के हिसाब से शिक्षकों की तैनाती की बात कही गई। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को पठन-पाठन के बारे में भी बच्चों से जानकारी लेने की सलाह दी गई। बीएसए डाक्टर संतोष कुमार सिंह ने कहा कि समाज का विश्वास प्राथमिक विद्यालयों के प्रति समाप्त होता जा रहा है।
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आज हर व्यक्ति अपने बच्चे का दाखिला प्राइवेट स्कूलों में कराना पसंद करता है। उन्होंने गुणवत्तायुक्त शिक्षा के लिए विभाग की कार्य योजना की जानकारी विस्तार से दी। इस मौके पर बीईओ घनश्याम वर्मा, अखिलेश सिंह, उदयभान कुशवाहा, शैलेंद्र, जगदीश यादव, केपी दुबे, संतोष पांडेय, संतोष ओझा, राम तिलक वर्मा और एमडीएम के जिला समन्वयक अमित कुमार मिश्र आदि रहे।