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Basti News: सावन में जेठ जैसी गर्मी, खेतों में पड़ने लगीं दरारें
Mon, 29 Jul 2024 11:56 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 29 Jul 2024 11:56 PM IST
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सल्टौआ क्षेत्र में धान के खेत में पड़ी दरारें।
पानी के अभाव में धान की फसल से गायब हो रही हरियाली
सिंचाई के सस्ते माध्यम भी दे रहे दगा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सावन के महीने में जेठ जैसी धूप, गर्मी व उमस से लोग परेशान हैं। कुछ दिनों से मानसून के रुठने के कारण धान के खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। इससे किसान चिंतित हैं। पानी के अभाव में फसल से हरियाली गायब होने लगी है। सोमवार को अधिकतम तापमान सामान्य से 3 डिग्री अधिक 36 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मानसून सत्र शुरू होने से पहले मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जारी कर औसत से अधिक बारिश की संभावना व्यक्त कर चुका है। इसके आधार पर तमाम काश्तकारों ने बीते वर्ष की तुलना में अधिक रकबे में धान की रोपाई की है। बारिश न होने से अब वह चिंतित दिख रहे हैं।
फसल की सिंचाई करनी पड़ रही तो उनकी लागत में भी इजाफा हो रहा है। नहरों में पानी नहीं है और राजकीय नलकूप खराब पड़े हैं। बिजली की अघोषित कटौती चल रही है। ऐसे में सिंचाई के सस्ते माध्यम भी मानसून की तरह दगा दे रहे हैं। आषाढ़ का महीना खत्म हो चुका है और सावन चल रहा है। फिर भी बारिश न होना चिंता बढ़ा रही है। सोमवार को आर्द्रता 90 प्रतिशत दर्ज की गई। मौसम विज्ञानी डॉ. अमर नाथ मिश्र ने बताया कि मानसून भटक गया है। 48 घंटों में इसके पटरी पर आने की संभावना दिख रही है।
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सिंचाई के सस्ते माध्यम भी दे रहे दगा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सावन के महीने में जेठ जैसी धूप, गर्मी व उमस से लोग परेशान हैं। कुछ दिनों से मानसून के रुठने के कारण धान के खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। इससे किसान चिंतित हैं। पानी के अभाव में फसल से हरियाली गायब होने लगी है। सोमवार को अधिकतम तापमान सामान्य से 3 डिग्री अधिक 36 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मानसून सत्र शुरू होने से पहले मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जारी कर औसत से अधिक बारिश की संभावना व्यक्त कर चुका है। इसके आधार पर तमाम काश्तकारों ने बीते वर्ष की तुलना में अधिक रकबे में धान की रोपाई की है। बारिश न होने से अब वह चिंतित दिख रहे हैं।
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फसल की सिंचाई करनी पड़ रही तो उनकी लागत में भी इजाफा हो रहा है। नहरों में पानी नहीं है और राजकीय नलकूप खराब पड़े हैं। बिजली की अघोषित कटौती चल रही है। ऐसे में सिंचाई के सस्ते माध्यम भी मानसून की तरह दगा दे रहे हैं। आषाढ़ का महीना खत्म हो चुका है और सावन चल रहा है। फिर भी बारिश न होना चिंता बढ़ा रही है। सोमवार को आर्द्रता 90 प्रतिशत दर्ज की गई। मौसम विज्ञानी डॉ. अमर नाथ मिश्र ने बताया कि मानसून भटक गया है। 48 घंटों में इसके पटरी पर आने की संभावना दिख रही है।
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