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Basti News: सभी पढ़ सकेंगे डॉॅक्टर का पर्चा, दवा का लिखना होगा साफ-साफ नाम
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बस्ती। अब डाॅक्टरों को मरीजों के इलाज के लिए दी जाने वाली दवाओं का पर्चा साफ- साफ लिखना होगा, जिससे कोई व्यक्ति दवा का नाम पढ़ सकें। इतना ही नहीं डॉक्टरों को जेनरिक दवाएं ही लिखनी होंगी। इसको लेकर नेशनल मेडिकल कमीशन ने गाइड लाइन जारी की है।
गाइड लाइन के मुताबिक यह नियम सभी पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर पर लागू होगा। मान्यता प्राप्त नेशनल मेडिकल कमीशन में रजिस्टर्ड होने वाले डॉक्टर इसमें आते हैं। इनके पर्चे का नमूना भी जारी किया गया है। इस पर डॉक्टर का नाम, पंजीकरण संख्या, आपातकालीन नंबर, रोगी का नाम, उम्र, श्रेणी आदि का भी जिक्र करना होगा।
अधिकांश डॉक्टर अपने पर्चे पर दवा का नाम साफ नहीं लिखते हैं। इसमें कुछ नाम तो पढ़ने में नहीं आते हैं, लेकिन मेडिकल स्टोर के संचालक पर्चा देखते ही समझ जाते हैं कि चिकित्सक ने कौन सी दवा लिखी है। कई बार मरीजों को किसी खास दवा के लिए दुकानों पर भटकना पड़ता है। एनएमसी की नई गाइड लाइन ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि डॉक्टर पर्चे पर दवाओं का नाम स्पष्ट रूप से बड़े अक्षरों में लिखें। संभव हो तो नाम टाइप कराएं, जिससे मरीज और तीमारदार गलत दवा लेने से बच सकेंगे।
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इसके अलावा केवल जेनरिक दवा ही लिखनी होगी। गाइड लाइन में स्पष्ट किया गया है कि जेनरिक दवा ब्रांडेड दवाओं से 30 से 80 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं। कुछ दवाएं ब्रांडेड जेनरिक की श्रेणी में हैं। वह ब्रांडेड से तो सस्ती होती हैं, लेकिन जेनरिक की महंगी होती हैं। इसलिए डॉक्टरों को चाहिए कि इस श्रेणी में केवल जेनरिक दवा ही मरीजों को लिखें। इसके अलावा ऐसी दवा का नाम लिखें, जो दवा की दुकानों पर आसानी से उपलब्ध हो।
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एनएमसी ने दिए हैं यह सुझाव
- केवल जेनरिक, गैर मालिकाना दवाओं का ही नाम लिखें
- तर्कसंगत और किफायती दवाएं लिखें
-दवाओं के प्रभाव को देखते हुए उतनी ही दवा लिखें, जितनी जरूरी हो
- निश्चित खुराक संयोजन का इस्तेमाल विवेकपूर्ण तरीके से करें
- दवा विक्रेताओं को समझाएं कि वे केवल जेनरिक दवाएं ही लिखें
- ब्रांडेड जेनरिक दवाएं लिखने से बचें
- ब्रांडेड और जेनरिक दवाओं की समानता के बारे में मेडिकल छात्रों, मरीज व जनता को बताएं
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बोले आइएमए के पदाधिकारी
नए नियम की सोच सही हो सकती है, लेकिन तरीका गलत है। यह बिना सोचे समझे किया जा रहा कार्य है। इससे मरीजों को नुकसान होगा। मौजूदा समय जेनरिक दवाओं की उपलब्धता नहीं है। पहले इसकी उपलब्धता व गुणवत्ता को सुनिश्चित किया जाए। ब्रांडेड कंपनियों के दवा व दर की जांच सरकार करें और गलत व मनमाना मिलने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। ड्रग कंट्रोल आफ इंडिया को इसे संज्ञान में लेकर जेनरिक दवाओं की गुणवत्ता की जांच की जानी चाहिए फिर इसे लागू किया जाएगा।
-डॉ. अनिल श्रीवास्तव, प्रदेश अध्यक्ष, आईएमए
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दवा का नाम साफ लिखने का नियम ठीक है। पर सभी दवाओं का कंपोनेट लिखने में समय अधिक लगेगा। सिर्फ जेनरिक दवाएं लिखने का असर मरीजों की सुरक्षा पर पड़ता है। इससे हम मरीजों को मेडिकल स्टोर के भरोसे छोड़ देंगे। सिर्फ फार्मूला लिखने पर मेडिकल स्टोर संचालक कोई इस तरह की दवा दे सकता है, जो मर्ज को ठीक करने में पूरी तरह से कारगर न हो।
-डॉ. नवीन कुमार, जिलाध्यक्ष, आईएमए बस्ती।
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मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को पहले से जेनरिक दवा लिखने का निर्देश दिया गया है। अब दवा का नाम साफ लिखने को कहा गया है। सरकार के नियमों का पालन कराया जाएगा।
-डॉ. एएन प्रसाद, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज
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सीएचसी, पीएचसी के डॉक्टरों को जेनरिक दवा लिखने का नियम पहले से है। दवाओं का फार्मूला स्पष्ट लिखने के नियम का पालन कराया जाएगा। सरकार का ध्यान जेनरिक दवा से मरीजों को कम खर्च में बेहतर स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने का है।
-डॉ.आरपी मिश्र, सीएमओ बस्ती।
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गाइड लाइन के मुताबिक यह नियम सभी पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर पर लागू होगा। मान्यता प्राप्त नेशनल मेडिकल कमीशन में रजिस्टर्ड होने वाले डॉक्टर इसमें आते हैं। इनके पर्चे का नमूना भी जारी किया गया है। इस पर डॉक्टर का नाम, पंजीकरण संख्या, आपातकालीन नंबर, रोगी का नाम, उम्र, श्रेणी आदि का भी जिक्र करना होगा।
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अधिकांश डॉक्टर अपने पर्चे पर दवा का नाम साफ नहीं लिखते हैं। इसमें कुछ नाम तो पढ़ने में नहीं आते हैं, लेकिन मेडिकल स्टोर के संचालक पर्चा देखते ही समझ जाते हैं कि चिकित्सक ने कौन सी दवा लिखी है। कई बार मरीजों को किसी खास दवा के लिए दुकानों पर भटकना पड़ता है। एनएमसी की नई गाइड लाइन ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि डॉक्टर पर्चे पर दवाओं का नाम स्पष्ट रूप से बड़े अक्षरों में लिखें। संभव हो तो नाम टाइप कराएं, जिससे मरीज और तीमारदार गलत दवा लेने से बच सकेंगे।
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इसके अलावा केवल जेनरिक दवा ही लिखनी होगी। गाइड लाइन में स्पष्ट किया गया है कि जेनरिक दवा ब्रांडेड दवाओं से 30 से 80 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं। कुछ दवाएं ब्रांडेड जेनरिक की श्रेणी में हैं। वह ब्रांडेड से तो सस्ती होती हैं, लेकिन जेनरिक की महंगी होती हैं। इसलिए डॉक्टरों को चाहिए कि इस श्रेणी में केवल जेनरिक दवा ही मरीजों को लिखें। इसके अलावा ऐसी दवा का नाम लिखें, जो दवा की दुकानों पर आसानी से उपलब्ध हो।
एनएमसी ने दिए हैं यह सुझाव
- केवल जेनरिक, गैर मालिकाना दवाओं का ही नाम लिखें
- तर्कसंगत और किफायती दवाएं लिखें
-दवाओं के प्रभाव को देखते हुए उतनी ही दवा लिखें, जितनी जरूरी हो
- निश्चित खुराक संयोजन का इस्तेमाल विवेकपूर्ण तरीके से करें
- दवा विक्रेताओं को समझाएं कि वे केवल जेनरिक दवाएं ही लिखें
- ब्रांडेड जेनरिक दवाएं लिखने से बचें
- ब्रांडेड और जेनरिक दवाओं की समानता के बारे में मेडिकल छात्रों, मरीज व जनता को बताएं
बोले आइएमए के पदाधिकारी
नए नियम की सोच सही हो सकती है, लेकिन तरीका गलत है। यह बिना सोचे समझे किया जा रहा कार्य है। इससे मरीजों को नुकसान होगा। मौजूदा समय जेनरिक दवाओं की उपलब्धता नहीं है। पहले इसकी उपलब्धता व गुणवत्ता को सुनिश्चित किया जाए। ब्रांडेड कंपनियों के दवा व दर की जांच सरकार करें और गलत व मनमाना मिलने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। ड्रग कंट्रोल आफ इंडिया को इसे संज्ञान में लेकर जेनरिक दवाओं की गुणवत्ता की जांच की जानी चाहिए फिर इसे लागू किया जाएगा।
-डॉ. अनिल श्रीवास्तव, प्रदेश अध्यक्ष, आईएमए
दवा का नाम साफ लिखने का नियम ठीक है। पर सभी दवाओं का कंपोनेट लिखने में समय अधिक लगेगा। सिर्फ जेनरिक दवाएं लिखने का असर मरीजों की सुरक्षा पर पड़ता है। इससे हम मरीजों को मेडिकल स्टोर के भरोसे छोड़ देंगे। सिर्फ फार्मूला लिखने पर मेडिकल स्टोर संचालक कोई इस तरह की दवा दे सकता है, जो मर्ज को ठीक करने में पूरी तरह से कारगर न हो।
-डॉ. नवीन कुमार, जिलाध्यक्ष, आईएमए बस्ती।
मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को पहले से जेनरिक दवा लिखने का निर्देश दिया गया है। अब दवा का नाम साफ लिखने को कहा गया है। सरकार के नियमों का पालन कराया जाएगा।
-डॉ. एएन प्रसाद, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज
सीएचसी, पीएचसी के डॉक्टरों को जेनरिक दवा लिखने का नियम पहले से है। दवाओं का फार्मूला स्पष्ट लिखने के नियम का पालन कराया जाएगा। सरकार का ध्यान जेनरिक दवा से मरीजों को कम खर्च में बेहतर स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने का है।
-डॉ.आरपी मिश्र, सीएमओ बस्ती।