{"_id":"6a972c7f363678f866059474","slug":"hal-shashthi-is-today-mothers-will-observe-a-fast-for-the-prosperity-of-their-children-basti-news-c-207-1-bst1005-165678-2026-09-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: हलषष्ठी आज, संतान की समृद्धि के लिए व्रत रखेंगी माताएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: हलषष्ठी आज, संतान की समृद्धि के लिए व्रत रखेंगी माताएं
विज्ञापन
गांधीनगर बाजार में पर्व पर महुआ, पत्ता व कुश की खरीदारी करते लोग संवाद
बस्ती। हलषष्ठी (हरछठ) का पर्व बुधवार को आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए माताएं व्रत रखेंगी और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगी। पर्व को लेकर मंगलवार को शहर के बाजारों में काफी चहल-पहल रही। गांधीनगर बाजार में पूजन सामग्री के साथ महुआ, पत्ता, कुश और अन्य सामग्री की खूब बिक्री हुई।
शहर के अमहट घाट, मूड़घाट पुल के पास, काली स्थान सहित कई जगहों पर महिलाएं व्रत रखकर पूजा करेंगी। ग्रामीण क्षेत्रों में भी तालाब और अन्य जलाशयों के किनारे पूजा की तैयारियां की गई हैं। व्रती महिलाएं पूजा की वेदी बनाकर हरछठ माता की पूजा करेंगी और हलषष्ठी व भगवान बलराम की कथा सुनेंगी। पूजा के दौरान भैंस के गोबर से पूजा स्थल की दीवार पर हरछठ माता का चित्र बनाया जाता है। इसके बाद भगवान गणेश और माता गौरी की भी पूजा की जाती है।
मान्यता है कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। बलराम का प्रमुख अस्त्र हल और मूसल था। इसी कारण इस दिन हल, मूसल और बैलों की पूजा करने की परंपरा है। इसे किसानों के प्रमुख त्योहारों में भी माना जाता है।
विज्ञापन
पं. देवस्य मिश्रा के अनुसार, इस बार षष्ठी तिथि का शुभ मुहूर्त बुधवार सुबह 6:12 बजे से अगले दिन सुबह 4:25 बजे तक रहेगा। बाजार में नए कपड़ों की खरीदारी के साथ पूजा सामग्री की बिक्री भी बढ़ी रही। व्रत में प्रयोग होने वाले केरमुआ के साग और तिन्नी चावल की भी मांग रही।
विज्ञापन
शहर के अमहट घाट, मूड़घाट पुल के पास, काली स्थान सहित कई जगहों पर महिलाएं व्रत रखकर पूजा करेंगी। ग्रामीण क्षेत्रों में भी तालाब और अन्य जलाशयों के किनारे पूजा की तैयारियां की गई हैं। व्रती महिलाएं पूजा की वेदी बनाकर हरछठ माता की पूजा करेंगी और हलषष्ठी व भगवान बलराम की कथा सुनेंगी। पूजा के दौरान भैंस के गोबर से पूजा स्थल की दीवार पर हरछठ माता का चित्र बनाया जाता है। इसके बाद भगवान गणेश और माता गौरी की भी पूजा की जाती है।
विज्ञापन
मान्यता है कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। बलराम का प्रमुख अस्त्र हल और मूसल था। इसी कारण इस दिन हल, मूसल और बैलों की पूजा करने की परंपरा है। इसे किसानों के प्रमुख त्योहारों में भी माना जाता है।
विज्ञापन
पं. देवस्य मिश्रा के अनुसार, इस बार षष्ठी तिथि का शुभ मुहूर्त बुधवार सुबह 6:12 बजे से अगले दिन सुबह 4:25 बजे तक रहेगा। बाजार में नए कपड़ों की खरीदारी के साथ पूजा सामग्री की बिक्री भी बढ़ी रही। व्रत में प्रयोग होने वाले केरमुआ के साग और तिन्नी चावल की भी मांग रही।