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Basti News: डॉक्टर सरकारी... बन गए नर्सिंग होम के मालिक, जांच नहीं

Mon, 17 Feb 2025 12:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Mon, 17 Feb 2025 12:34 AM IST
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Government doctors... became owners of nursing homes, no investigation
- प्रतिबंध के बाद भी प्राइवेट प्रैक्टिस करने का आरोप
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- शहर से लेकर ग्रामीण कस्बों तक संचालित हो रहे निजी अस्पताल
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सरकारी चिकित्सकों के लिए प्राइवेट प्रैक्टिस निबंधन नियमावली- 1983 बनाई गई है। इसके तहत एलोपैथिक सरकारी चिकित्सकों के लिए प्राइवेट प्रैक्टिस प्रतिबंधित है, मगर इस नियमावली का पालन लंबे समय से नहीं हो रहा है। सेवा में रहते हुए तमाम चिकित्सकों ने निजी नर्सिंग होम तैयार कर लिया है। निजी क्षेत्र में नर्सिंग होम स्थापित करने के बाद अधिकतर चिकित्सकों ने बीआरएस का प्रार्थना पत्र देकर नौकरी से तौबा भी कर ली है। वहीं कम वर्ष की सेवा वाले चिकित्सक इस मुकाम को हासिल करने के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं। यदि निष्पक्ष जांच हो तो कई सरकारी चिकित्सक निजी नर्सिंग होम के मालिक निकलेंगे। विभाग के जिम्मेदार इस खेल को नजरंदाज कर दे रहे हैं।
शहर के मुरलीजोत मोहल्ले में एक किराए के भवन में निजी अस्पताल संचालित हो रहा है। यहां बच्चों का इलाज किया जाता है। चर्चा में रहने वाला यह अस्पताल एक सरकारी चिकित्सक के नाम से जाना जा रहा है। यहां आए तीमारदार राम सजीवन ने बताया कि वह अपने बच्चे को दिखाने आए हैं। अस्पताल के बारे में पूछने पर बताया कि उन्हें सिर्फ डॉक्टर का नाम पता है। एक डॉक्टर का नाम बताते हुए कहा कि यहां बच्चों को वहीं देखते है।
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जिला अस्पताल में उनकी तैनाती भी है। सरकारी ड्यूटी से पहले और उसके बाद में वह अपने अस्पताल में पूरा समय देते हैं। सरकारी अस्पताल में उन्हें बच्चों का इलाज करते हुए देखा जाता है, इसलिए उनके निजी अस्पताल में भी काफी संख्या में मरीज आ रहे हैं। सरकारी चिकित्सक के इस निजी अस्पताल में पर्चा काउंटर, दवा कक्ष, परामर्श कक्ष के अलावा गंभीर बच्चों को भर्ती करने तक की व्यवस्था है।
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सरकारी चिकित्सक के यहां सात से आठ निजी कर्मचारी भी काम कर रहे हैं। दोपहर दो बजे के बाद मरीजों की यहां काफी भीड़ हो रही है। यह निजी अस्पताल संबंधित चिकित्सक के तैनाती स्थल जिला अस्पताल से महज एक किमी के दायरे में है।
इसी तरह रौता पार मोहल्ले में भी एक सरकारी सेवा में कार्यरत बाल रोग विशेषज्ञ के आवास पर क्लीनिक संचालित हो रही है। यहां चिकित्सक के नाम का बोर्ड लगा है और आवास के कुछ हिस्सों में मरीजों की बुकिंग की जाती है। सरकारी ड्यूटी खत्म होने के बाद चिकित्सक फीस लेकर यहां मरीजों को देखते हैं। तीमारदार परवेज ने बताया कि यहां बच्चों का इलाज करने वाले डॉक्टर साहब जिला महिला चिकित्सालय में तैनात हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल से जिगिना और कैली मार्ग पर भी सरकारी चिकित्सकों के आधा दर्जन से अधिक निजी नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं।
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सेवाकाल में व्यवस्थित कर लिया निजी नर्सिंग होम
शहर में हाई प्रोफाइल के एक दर्जन से अधिक नर्सिंग होम ऐसे हैं जिन्हें सरकारी चिकित्सकों ने प्राइवेट प्रैक्टिस के आधार पर अपने सेवा काल में तैयार कर लिया है। 10 वर्ष की सेवा पूरी होने पर नौकरी से तौबा कर लिया। इधर एक दशक के भीतर इस तरह से कई सरकारी चिकित्सकों को सेवा काल में रहते हुए ही बड़े नर्सिंग होम का मालिक बनते देखा गया है। इनमें से कुछ चिकित्सकों का अभी बीआरएस मंजूर नहीं हुआ है। इसमें बाल रोग विशेषज्ञ, गायनी, हड्डी रोग विशेषज्ञ, सर्जन, एमबीबीएस एमडी आदि विषयों के चिकित्सक शामिल हैं।
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जिला अस्पताल से बड़ा चिल्ड्रेन वार्ड तैयार कर लिया डॉक्टर साहब
शहर के दवा व्यापारी ने बताया कि जिला अस्पताल, ओपेक चिकित्सालय कैली एवं महिला अस्पताल में तैनात होने वाले चिकित्सक जैसे ही चर्चा में आते हैं वह निजी प्रैक्टिस शुरू कर देते हैं। फिर अच्छी कमाई देखकर उनका रुझान सरकारी सेवा के प्रति कम हो जाता है। जिला अस्पताल में तैनात बाहर से आए एक बाल रोग विशेषज्ञ हम लोगों के आंखों के सामने ही कुछ ही साल में अपना बहुत बड़ा निजी सेट-अप तैयार कर लिया। जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड से अधिक क्षमता का उनका अपना अस्पताल हो गया है।
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प्रशासनिक अफसर भी लगा रहे अंकुश
शासन के नए फरमान के मुताबिक सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर डीएम एवं प्रशासनिक अफसर खुद अंकुश लगाएंगे। निजी प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की खोज शुरू हो गई है। इसी के बाद इन चिकित्सकों में हड़कंप की स्थिति है। यदि विभागीय जिम्मेदार इस मिशन में साथ दिए तो बड़े पैमाने पर ऐसे चिकित्सकों की धरपकड़ होने की उम्मीद है।

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कोट
सरकारी चिकित्सकों के लिए प्राइवेट प्रैक्टिस प्रतिबंधित है। शासन के नए निर्देश के मुताबिक ऐसे चिकित्सकों पर विधिक कार्रवाई की तैयारी भी चल रही है। यदि कोई निजी प्रैक्टिस करते हुए पकड़ा गया तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. आरएस दुबे, सीएमओ
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