{"_id":"5a1b00da4f1c1b156b8b8743","slug":"gabbage-vhicle-diturbs-traffic","type":"story","status":"publish","title_hn":"ट्रैफिक सिस्टम पर भारी कूड़ा गाड़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ट्रैफिक सिस्टम पर भारी कूड़ा गाड़ी
basti
Updated Sun, 26 Nov 2017 11:28 PM IST
विज्ञापन
समस्याा
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बस्ती।
शहर में ट्रैफिक सिस्टम ध्वस्त करने में नगर पालिका की कूड़ा गाड़ी का सबसे अहम रोल है। जिस समय सड़क पर स्कूल जा रहे बच्चे और दफ्तर जा रहे नौकरी पेशा वाले जल्दी पहुंचने की हड़बड़ी में रहते हैं, उसी समय पर पालिका का कूड़ा दस्ता जेसीबी और ट्रक लेकर निकलता है। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में वैसे भी निकलना मुश्किल होता है, उसी समय इनके निकलने से दिक्कत बढ़ जा रही है। लोग कहने लगे हैं कि कूड़ा न उठाएं ठीक लेकिन जाम न लगवाएं।
छोटे से शहर में जाम लाइलाज बीमारी बन गई है। जाम से निजात के लिए पुलिस, ट्रैफिक पुलिस और सड़क यातायात विभाग दिन-रात उपाय ढूंढने में लगा है। लेकिन इसका सबसे बड़ा कारक नगर पालिका जरा भी संज्ञान लेने को तैयार नहीं है। शहर में रोडवेज तिराहे और गायत्री मंदिर के सामने हो या अस्पताल चौराहे की भीड़भाड़ हो, हर जगह जाम लगना रोजमर्रा का काम हो गया है। अस्पताल चौराहे से रोडवेज की तरफ जाने वाली सड़क पर कूड़ा उठाने वाला दस्ता 11 बजे के आसपास पहुंचता है। उस समय चौतरफा ट्रैफिक का दबाव रहता है। यही हाल गांधीनगर और कटरा का भी है। शहर का हृदय कहे जाने वाले पक्के बाजार और निकास द्वार कटरा में भी जाम लगने की वजह असमय कूड़ा उठाने पहुंची गाड़ियां हैं, जो सफाई करने के नाम पर आवागमन रोके रखते हैं।
बार-बार आग्रह ठुकराती है पालिका
ट्रैफिक समस्या पर बार-बार डीएम, एसपी और परिवहन विभाग के अधिकारी नगर पालिका परिषद के अधिकारियों से सुबह के समय कूड़ा उठवाने का इंतजाम करने का आग्रह कर चुके हैं। बावजूद इसके सिलसिला बंद नहीं हुआ। देखकर चुप रहने की परंपरा का नतीजा है कि न तो व्यापारी बोल रहे हैं न ही शहर की काया पलट करने का दावा करने वाले सियासी सूरमाओं ने सुध ली।
विज्ञापन
नाले की गंदगी से नहा रहे लोग
आप नहा-धोकर मंदिर या दफ्तर जा रहे हों और रास्ते में नाले से निकले कचरे की धूल ऊपर पड़ जाए तो स्वाभाविक है कि मन खिन्न हो उठेगा। मगर यहां इस धूल से नहाए बिना कोई भी शख्स गुजर नहीं सकता। क्योंकि नाले का कचरा उठाकर पालिका के लोग किनारे रख देते हैं। जो धीरे-धीरे सूखकर उड़ता है और रास्ते में चलने वाले राहगीर के ऊपर पड़ता जाता है।
आग्रह नहीं माने तो होगी लिखा-पढ़ी
जाम की वजह से सबसे ज्यादा उलाहना सुन रहे एसपी संकल्प शर्मा का कहना है कि काफी आग्रह कर चुके हैं लेकिन नगर पालिका के लोग सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। अंतिम बार कहा गया है। यदि नहीं माने तो लिखा-पढ़ी शुरू करेंगे।
कूड़ा हटाने के समय की समीक्षा करेंगे
नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी ओम प्रकाश का कहना है कि एसपी स्तर से भी उन्हें इस समस्या से अवगत कराया गया है। ईओ के अनुसार कूड़ा हटाने में समय तो लगता ही है लेकिन यदि इससे ट्रैफिक की समस्या उत्पन्न हो रही है तो इसे ठीक किया जाएगा। इसके समय की समीक्षा करके हर संभव उपाय किए जाएंगे।
विज्ञापन
शहर में ट्रैफिक सिस्टम ध्वस्त करने में नगर पालिका की कूड़ा गाड़ी का सबसे अहम रोल है। जिस समय सड़क पर स्कूल जा रहे बच्चे और दफ्तर जा रहे नौकरी पेशा वाले जल्दी पहुंचने की हड़बड़ी में रहते हैं, उसी समय पर पालिका का कूड़ा दस्ता जेसीबी और ट्रक लेकर निकलता है। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में वैसे भी निकलना मुश्किल होता है, उसी समय इनके निकलने से दिक्कत बढ़ जा रही है। लोग कहने लगे हैं कि कूड़ा न उठाएं ठीक लेकिन जाम न लगवाएं।
छोटे से शहर में जाम लाइलाज बीमारी बन गई है। जाम से निजात के लिए पुलिस, ट्रैफिक पुलिस और सड़क यातायात विभाग दिन-रात उपाय ढूंढने में लगा है। लेकिन इसका सबसे बड़ा कारक नगर पालिका जरा भी संज्ञान लेने को तैयार नहीं है। शहर में रोडवेज तिराहे और गायत्री मंदिर के सामने हो या अस्पताल चौराहे की भीड़भाड़ हो, हर जगह जाम लगना रोजमर्रा का काम हो गया है। अस्पताल चौराहे से रोडवेज की तरफ जाने वाली सड़क पर कूड़ा उठाने वाला दस्ता 11 बजे के आसपास पहुंचता है। उस समय चौतरफा ट्रैफिक का दबाव रहता है। यही हाल गांधीनगर और कटरा का भी है। शहर का हृदय कहे जाने वाले पक्के बाजार और निकास द्वार कटरा में भी जाम लगने की वजह असमय कूड़ा उठाने पहुंची गाड़ियां हैं, जो सफाई करने के नाम पर आवागमन रोके रखते हैं।
विज्ञापन
बार-बार आग्रह ठुकराती है पालिका
ट्रैफिक समस्या पर बार-बार डीएम, एसपी और परिवहन विभाग के अधिकारी नगर पालिका परिषद के अधिकारियों से सुबह के समय कूड़ा उठवाने का इंतजाम करने का आग्रह कर चुके हैं। बावजूद इसके सिलसिला बंद नहीं हुआ। देखकर चुप रहने की परंपरा का नतीजा है कि न तो व्यापारी बोल रहे हैं न ही शहर की काया पलट करने का दावा करने वाले सियासी सूरमाओं ने सुध ली।
विज्ञापन
नाले की गंदगी से नहा रहे लोग
आप नहा-धोकर मंदिर या दफ्तर जा रहे हों और रास्ते में नाले से निकले कचरे की धूल ऊपर पड़ जाए तो स्वाभाविक है कि मन खिन्न हो उठेगा। मगर यहां इस धूल से नहाए बिना कोई भी शख्स गुजर नहीं सकता। क्योंकि नाले का कचरा उठाकर पालिका के लोग किनारे रख देते हैं। जो धीरे-धीरे सूखकर उड़ता है और रास्ते में चलने वाले राहगीर के ऊपर पड़ता जाता है।
आग्रह नहीं माने तो होगी लिखा-पढ़ी
जाम की वजह से सबसे ज्यादा उलाहना सुन रहे एसपी संकल्प शर्मा का कहना है कि काफी आग्रह कर चुके हैं लेकिन नगर पालिका के लोग सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। अंतिम बार कहा गया है। यदि नहीं माने तो लिखा-पढ़ी शुरू करेंगे।
कूड़ा हटाने के समय की समीक्षा करेंगे
नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी ओम प्रकाश का कहना है कि एसपी स्तर से भी उन्हें इस समस्या से अवगत कराया गया है। ईओ के अनुसार कूड़ा हटाने में समय तो लगता ही है लेकिन यदि इससे ट्रैफिक की समस्या उत्पन्न हो रही है तो इसे ठीक किया जाएगा। इसके समय की समीक्षा करके हर संभव उपाय किए जाएंगे।