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Basti News: विदेशी पक्षियों ने चंदो ताल से फेरा मुंह, रास नहीं आई आबोहवा
Sat, 17 Feb 2024 01:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 17 Feb 2024 01:42 AM IST
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बस्ती। चंदोताल से इस बार प्रवासी पक्षियों ने मुंह मोड लिया है। हर बार सर्दियों में इस ताल में विचरण करने वाली रंग-विरंगी विदेशी पक्षियों को दूरदराज से देखने आने वाले पर्यटक मायूस हैं। ठंड का मौसम भी अंतिम चरण में पहुंच चुका है। जबकि हर साल नवंबर माह के अंत तक यहां विदेशी पक्षियां डेरा डाल देती थीं।
मंडल मुख्यालय से आठ किमी दूर पोखरनी गांव में चंदोताल करीब चार किमी चौड़ाई व सात किमी लंबाई में है। 11 हजार हेक्टेयर भूभाग में फैले इस विशाल ताल में विदेशी पक्षियां हर साल हजारों की संख्या में नवंबर में डेरा डाला करते थे। फरवरी तक उनका जमावड़ा लगा रहता था। इनमें दक्षिण अफ्रीका से लालसर, पिक शीर्ष व बत्तख, श्रीलंका व म्यांमार से रक्त शिखी व कोचर्ड, म्यांमार से बिजी विस्लिंग व डक, बांग्लादेश से मेलर्ड और गैंडाल आती थीं।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस बार ठंड का मौसम ठीक से शुरू नहीं से पाया। इसलिए पक्षियों ने ताल की तरफ रुख नहीं किया। प्रवासी पक्षियों की निगरानी के लिए पोखरनी, अठदमा और मजगवां में तीन वाच टॉवर बनाए गए हैं, लेकिन कर्मचारियों की तैनाती न होना भी एक कारण रहा। यहां देशी-विदेशी पक्षियों के बैठने के लिए सात टीले बनवाए गए हैं। करीब दो साल से पानी की निकासी न हो पाने से टीले अब तक डूबे हैं। ताल क्षेत्र में वन विभाग की ओर से बनवाए गए ठोकरों ने पूरे ताल के पानी को डंप कर रखा है। इस वजह से पक्षियों को बैठने के लिए जगह उपलब्ध हो पा रही है।
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पक्षियों के बसेरे के लिए बनेगी व्यवस्था
डीएफओ जेपी सिंह ने बताया कि चंदोताल में डंप पानी का सदुपयोग किया जाएगा। सूखे टीलों पर पौधरोपण करवाकर पक्षियों की शरणगाह तैयार की जाएगी। इसके लिए कार्ययोजना शासन स्तर पर संस्तुति के लिए भेजी जा चुकी है।
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मंडल मुख्यालय से आठ किमी दूर पोखरनी गांव में चंदोताल करीब चार किमी चौड़ाई व सात किमी लंबाई में है। 11 हजार हेक्टेयर भूभाग में फैले इस विशाल ताल में विदेशी पक्षियां हर साल हजारों की संख्या में नवंबर में डेरा डाला करते थे। फरवरी तक उनका जमावड़ा लगा रहता था। इनमें दक्षिण अफ्रीका से लालसर, पिक शीर्ष व बत्तख, श्रीलंका व म्यांमार से रक्त शिखी व कोचर्ड, म्यांमार से बिजी विस्लिंग व डक, बांग्लादेश से मेलर्ड और गैंडाल आती थीं।
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वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस बार ठंड का मौसम ठीक से शुरू नहीं से पाया। इसलिए पक्षियों ने ताल की तरफ रुख नहीं किया। प्रवासी पक्षियों की निगरानी के लिए पोखरनी, अठदमा और मजगवां में तीन वाच टॉवर बनाए गए हैं, लेकिन कर्मचारियों की तैनाती न होना भी एक कारण रहा। यहां देशी-विदेशी पक्षियों के बैठने के लिए सात टीले बनवाए गए हैं। करीब दो साल से पानी की निकासी न हो पाने से टीले अब तक डूबे हैं। ताल क्षेत्र में वन विभाग की ओर से बनवाए गए ठोकरों ने पूरे ताल के पानी को डंप कर रखा है। इस वजह से पक्षियों को बैठने के लिए जगह उपलब्ध हो पा रही है।
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पक्षियों के बसेरे के लिए बनेगी व्यवस्था
डीएफओ जेपी सिंह ने बताया कि चंदोताल में डंप पानी का सदुपयोग किया जाएगा। सूखे टीलों पर पौधरोपण करवाकर पक्षियों की शरणगाह तैयार की जाएगी। इसके लिए कार्ययोजना शासन स्तर पर संस्तुति के लिए भेजी जा चुकी है।