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Basti News: फुटपाथ पर कब्जा, कहीं गैराज तो कहीं गिट्टी-मोरंग डंप
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मालवीय रोड पर करतार चौराहे के पास सड़क गिट्टी उतारती ट्रक के कारण पीछे लगा जाम। संवाद
बस्ती। शहर में राह चलना जान का जोखिम बन गया है। मुख्य सड़कों की पटरियां कहीं खाली नहीं हैं। कहीं गाड़ियों का गैराज है तो कहीं गिट्टी-मोरंग, बालू डंप किए जा रहे हैं। सुबह आठ बजे तक नो-इंट्री होने के बाद भी शहर में ट्रक, ट्रेलर, ट्रैक्टर-ट्राॅली धड़ल्ले से प्रवेश कर रहे हैं। आधी सड़क तक गाड़ी खड़ी कर सामान की लोडिंग और अनलोडिंग की जा रही है। ऐसे में यदि सड़क पर कोई अवरोध दिखे ताे उससे बचने के लिए हड़बड़ी में पटरी पर उतरे तो हादसे का खतरा है।
बता दें कि पटरी बचाने की मुहिम कई बार छिड़ी लेकिन, रसूखदार लोगों के सामने प्रशासन को ही बैकफुट पर आना पड़ा। आठ किमी परिक्षेत्र वाले इस शहर में रोजाना चार लाख वाहनों के आवागमन का दबाव है। बड़ेवन से कंपनीबाग तक 1.750 किमी लंबी सड़क छोड़ दें ताे कोई भी सड़क फोरलेन नहीं है। ज्यादातर आवागमन 12 मीटर चौड़ाई वाले मालवीय मार्ग और गांधीनगर मार्ग पर रहता है। मगर इन दोनों सड़क किनारे तीन-तीन मीटर चौड़ी पटरियों पर लोगों का कब्जा है। मालवीय मार्ग पर फव्वारा तिराहे से लेकर रोडवेज तक दोनों तरफ पटरियां गुम हैं।
टू-लेन के इस मार्ग पर चलते समय अपने ही लेन में लोग सड़क से पटरी पर उतरने में डर रहे हैं। कहीं गिट्टी-मोरंग एक मंजिला इमारत की तरह डंप हैं तो कहीं भारी वाहन ट्रक, बस, ट्रैक्टर-ट्राॅली खड़े कर दिए गए हैं। पटरी पर टायर की छल्लियां सजाने से लेकर लोहा-लक्कड़ और गाड़ियों के अस्थायी वर्कशाप का कारोबार है। रंजीत चौराहा के रहने वाले अविनाश कुमार बताते हैं कि टू-लेन सड़क होने के बाद मालवीय मार्ग पर आवागमन सुरक्षित नहीं है। रौता चौराहा से रोडवेज के बीच पटरियों पर सुबह नौ बजे के बाद तो चलने लायक भी नहीं रहता है। इसीलिए आवागमन का दबाव बढ़ते ही जाम लग जाता है।
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वहीं राहुल सिंह कहते हैं कि यातायात व्यवस्था सुधरने की उम्मीद कम है। नो-इंट्री के बाद भी इस मार्ग पर ट्रक और ट्रैक्टर-ट्राॅली दिन भर दौड़ते हैं। यात्रियों से भरी रोडवेज की बसें इन वाहनों के हटने का इंतजार करती है। स्कूल या ऑफिस पहुंचने की जल्दी में दो पहिया सवार लोग इधर-उधर कट मारकर निकलने की कोशिश में भिड़ जाते हैं। कभी-कभी कोई अनजान व्यक्ति ध्यान नहीं देता है तो अचानक उसे कुछ सूझता भी नहीं है। या तो पटरी के अतिक्रमण की चपेट में आता हैं या सामने धीमी गति से चल रहे वाहन से भिड़ जाता है।
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नो-इंट्री में प्रवेश कर रहे वाहन
बड़ेवन, सिविल लाइन और अमहट के रास्ते भारी वाहन नो-इंट्री में प्रवेश कर रहे हैं। रात नौ बजे के बाद से सुबह आठ बजे तक ही शहर में भारी वाहनों का प्रवेश अनुमन्य है। मगर इन वाहनों की आवाजाही दिन भर देखी जा रही है। दिन में आवागमन का दबाव अधिक होने के दौरान भी मालवीय मार्ग, कोतवाली रोड, स्टेशन रोड पर जहां-तहां भारी वाहन खड़े दिखाई दे रहे हैं। इस वजह से रोडवेज,रौता चौराहा, अस्पताल चौराहा पर जाम की समस्या भी बनी रहती है।
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गांधीनगर मार्ग पर खाली नहीं हुई पटरी
गांधीनगर मार्ग पर पटरी खाली कराने के लिए नगर पालिका ने कई जतन किए। मगर सफलता अभी तक नहीं मिली। कई बार पटरी के अतिक्रमण पर बुलडोजर भी चलाए गए। दो-तीन बाद स्थिति जस की तस हो गई। पालिका ने इस मार्ग पर कंपनीबाग से रोडवेज तक पटरी और नाला के बीच लाल पट्टी बनवाई है। निर्देश दिए गए हैं कि लाल पट्टी की सीमा में कोई दुकान, पार्किंग या अन्य अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। मगर अतिक्रमण के चलते लाल पट्टी गायब हो गई है। यहां पटरी पर दुकान सज रही है और सड़क पर वाहनों की पार्किंग हो रही है।
कोट
अतिक्रमण के खिलाफ कई बार नोटिस देने की कार्रवाई की गई है। व्यापारियों एवंं पुलिस से समन्वय बनाकर बहुत जल्द अभियान चलाया जाएगा। लोगों को स्वेच्छा से सड़क की पटरी खाली रखनी चाहिए।
-अंगद गुप्ता, ईओ, नगर पालिका परिषद।
कोट
सुबह आठ बजे के बाद से रात नौ बजे तक शहर में भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित है। पटरी भी दुकानदारों को खाली रखनी है। सड़क पर अनावश्यक गाड़ी नहीं खड़ी करनी है। यदि ऐसा हो रहा है तो अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
-प्रदीप कुमार त्रिपाठी, सीओ यातायात।
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बता दें कि पटरी बचाने की मुहिम कई बार छिड़ी लेकिन, रसूखदार लोगों के सामने प्रशासन को ही बैकफुट पर आना पड़ा। आठ किमी परिक्षेत्र वाले इस शहर में रोजाना चार लाख वाहनों के आवागमन का दबाव है। बड़ेवन से कंपनीबाग तक 1.750 किमी लंबी सड़क छोड़ दें ताे कोई भी सड़क फोरलेन नहीं है। ज्यादातर आवागमन 12 मीटर चौड़ाई वाले मालवीय मार्ग और गांधीनगर मार्ग पर रहता है। मगर इन दोनों सड़क किनारे तीन-तीन मीटर चौड़ी पटरियों पर लोगों का कब्जा है। मालवीय मार्ग पर फव्वारा तिराहे से लेकर रोडवेज तक दोनों तरफ पटरियां गुम हैं।
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टू-लेन के इस मार्ग पर चलते समय अपने ही लेन में लोग सड़क से पटरी पर उतरने में डर रहे हैं। कहीं गिट्टी-मोरंग एक मंजिला इमारत की तरह डंप हैं तो कहीं भारी वाहन ट्रक, बस, ट्रैक्टर-ट्राॅली खड़े कर दिए गए हैं। पटरी पर टायर की छल्लियां सजाने से लेकर लोहा-लक्कड़ और गाड़ियों के अस्थायी वर्कशाप का कारोबार है। रंजीत चौराहा के रहने वाले अविनाश कुमार बताते हैं कि टू-लेन सड़क होने के बाद मालवीय मार्ग पर आवागमन सुरक्षित नहीं है। रौता चौराहा से रोडवेज के बीच पटरियों पर सुबह नौ बजे के बाद तो चलने लायक भी नहीं रहता है। इसीलिए आवागमन का दबाव बढ़ते ही जाम लग जाता है।
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वहीं राहुल सिंह कहते हैं कि यातायात व्यवस्था सुधरने की उम्मीद कम है। नो-इंट्री के बाद भी इस मार्ग पर ट्रक और ट्रैक्टर-ट्राॅली दिन भर दौड़ते हैं। यात्रियों से भरी रोडवेज की बसें इन वाहनों के हटने का इंतजार करती है। स्कूल या ऑफिस पहुंचने की जल्दी में दो पहिया सवार लोग इधर-उधर कट मारकर निकलने की कोशिश में भिड़ जाते हैं। कभी-कभी कोई अनजान व्यक्ति ध्यान नहीं देता है तो अचानक उसे कुछ सूझता भी नहीं है। या तो पटरी के अतिक्रमण की चपेट में आता हैं या सामने धीमी गति से चल रहे वाहन से भिड़ जाता है।
नो-इंट्री में प्रवेश कर रहे वाहन
बड़ेवन, सिविल लाइन और अमहट के रास्ते भारी वाहन नो-इंट्री में प्रवेश कर रहे हैं। रात नौ बजे के बाद से सुबह आठ बजे तक ही शहर में भारी वाहनों का प्रवेश अनुमन्य है। मगर इन वाहनों की आवाजाही दिन भर देखी जा रही है। दिन में आवागमन का दबाव अधिक होने के दौरान भी मालवीय मार्ग, कोतवाली रोड, स्टेशन रोड पर जहां-तहां भारी वाहन खड़े दिखाई दे रहे हैं। इस वजह से रोडवेज,रौता चौराहा, अस्पताल चौराहा पर जाम की समस्या भी बनी रहती है।
गांधीनगर मार्ग पर खाली नहीं हुई पटरी
गांधीनगर मार्ग पर पटरी खाली कराने के लिए नगर पालिका ने कई जतन किए। मगर सफलता अभी तक नहीं मिली। कई बार पटरी के अतिक्रमण पर बुलडोजर भी चलाए गए। दो-तीन बाद स्थिति जस की तस हो गई। पालिका ने इस मार्ग पर कंपनीबाग से रोडवेज तक पटरी और नाला के बीच लाल पट्टी बनवाई है। निर्देश दिए गए हैं कि लाल पट्टी की सीमा में कोई दुकान, पार्किंग या अन्य अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। मगर अतिक्रमण के चलते लाल पट्टी गायब हो गई है। यहां पटरी पर दुकान सज रही है और सड़क पर वाहनों की पार्किंग हो रही है।
कोट
अतिक्रमण के खिलाफ कई बार नोटिस देने की कार्रवाई की गई है। व्यापारियों एवंं पुलिस से समन्वय बनाकर बहुत जल्द अभियान चलाया जाएगा। लोगों को स्वेच्छा से सड़क की पटरी खाली रखनी चाहिए।
-अंगद गुप्ता, ईओ, नगर पालिका परिषद।
कोट
सुबह आठ बजे के बाद से रात नौ बजे तक शहर में भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित है। पटरी भी दुकानदारों को खाली रखनी है। सड़क पर अनावश्यक गाड़ी नहीं खड़ी करनी है। यदि ऐसा हो रहा है तो अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
-प्रदीप कुमार त्रिपाठी, सीओ यातायात।