{"_id":"66c90a89f35ccea4d50a8664","slug":"fatima-hospital-investigation-completed-clean-chit-to-surgeon-basti-news-c-207-1-bst1001-122559-2024-08-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: फातिमा हॉस्पिटल की जांच पूरी, सर्जन को क्लीन चिट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: फातिमा हॉस्पिटल की जांच पूरी, सर्जन को क्लीन चिट
Sat, 24 Aug 2024 03:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 24 Aug 2024 03:47 AM IST
विज्ञापन
- पति ने चिकित्सक पर लापरवाही पूर्वक ऑपरेशन कर बच्चेदानी निकालने का लगाया था आरोप
- मृत बच्चे को पेट से निकालने के लिए ऑपरेशन करते समय महिला को हुआ था पोस्टपार्टम हेमरेज
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। फातिमा हॉस्पिटल पर लापरवाही पूर्वक ऑपरेशन कर महिला की बच्चेदानी निकाले जाने के आरोप के बाद प्रकरण की जांच शुक्रवार को पूरी कर ली गई। डिप्टी सीएमओ की टीम ने रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी है। इसमें ऑपरेशन करने वाले निजी अस्पताल के चिकित्सक को क्लीन चिट दे दी गई।
प्रकरण की छानबीन के दौरान पता चला कि ऑपरेशन करते समय महिला को पोस्टपार्टम हेमरेज हो गया था। यह खतरनाक स्थिति होती है। अधिक रक्तस्राव से महिला की जान जा सकती थी। मरीज को सुरक्षित कर पाने के लिए चिकित्सक के पास केवल आधे घंटे का समय होता है। सीएमओ डॉ. आरएस दुबे ने बताया कि सर्जरी करने वाले चिकित्सक के बयान से यह स्पष्ट हुआ कि ऑपरेशन के दौरान संबंधित महिला में पोस्टपार्टम हेमरेज तेजी से डेवलप हो रहा था। इससे रक्तस्राव बढ़ जाता है। इसके अलावा बच्चा निकालते समय बच्चेदानी की साइज अपने आप छोटी होती है।
मानव शरीर की प्रक्रिया के अनुसार यह 6 लीटर से घटकर आधा लीटर साइज में हो जाती है। विकृतियों के चलते महिला के यूट्रस की साइज छोटी नहीं हुई। ऐसी परिस्थिति में मरीज की जान बचाने के लिए तत्काल बच्चेदानी (यूट्रस) निकालना विवशता बन जाती है। संबंधित चिकित्सक ने परिजनों को इस स्थिति से अवगत कराकर उनसे पहले सहमति ली। इसके बाद मृत बच्चे के साथ यूट्रस निकालकर महिला को सुरक्षित बचाया गया। सीएमओ ने बताया कि पूरे प्रकरण में लापरवाही का आरोप निराधार मिला है। ऑपरेशन के दौरान महिला गंभीर स्थिति में पहुंच चुकी थी। यदि आधे घंटे के अंदर बच्चेदानी न निकाली गई होती तो संबंधित मरीज की जान जा सकती थी।
विज्ञापन
..
क्या हैं पोस्टपार्टम हेमरेज
पोस्टपार्टम हेमरेज एक ऐसी स्थिति है जिसमें महिला शिशु को जन्म देने के बाद बहुत ज्यादा रक्तस्राव का सामना करने लगती है। इससे शरीर में रक्त की कमी होने के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है।
...
निजी अस्पताल के चिकित्सक का दर्ज हुआ बयान
सीएमओ ने शिकायत पत्र मिलने के बाद डिप्टी सीएमओ डॉ. रणजीत सिंह, सर्जन डॉ. सुनील तिवारी और गायनी डॉ. प्रीति को शामिल करते हुए तीन सदस्यीय टीम गठित की थी। यह टीम एक दिन पहले फातिमा हाॅस्पिटल पहुंची थी। वहां महिला की सर्जरी करने वाले चिकित्सक मौजूद नहीं मिले। उन्हें फोन करके सीएमओ कार्यालय में तलब किया गया था। अगले दिन संबंधित अस्पताल के चिकित्सक पहुंचकर टीम के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया। इसके बाद डिप्टी सीएमओ ने पूरी रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी।
..
यह है प्रकरण
वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के गनेशपुर बड़ेवन निवासी मेवालाल ने सीएमओ को शिकायती पत्र सौंपा था। इसमें उन्होंने शहर के कटरा पतेलवा स्थित फातिमा हॉस्पिटल एवं मैटरनिटी सेंटर पर आरोप लगाया कि उनकी पत्नी रीता का ऑपरेशन लापरवाही पूर्वक किया गया। इसमें मृत बच्चे के साथ बच्चेदानी भी निकाल दी गई। मामला तूल पकड़ने के बाद सीएमओ ने टीम गठित कर जॉच शुरू करा दी थी।
विज्ञापन
- मृत बच्चे को पेट से निकालने के लिए ऑपरेशन करते समय महिला को हुआ था पोस्टपार्टम हेमरेज
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। फातिमा हॉस्पिटल पर लापरवाही पूर्वक ऑपरेशन कर महिला की बच्चेदानी निकाले जाने के आरोप के बाद प्रकरण की जांच शुक्रवार को पूरी कर ली गई। डिप्टी सीएमओ की टीम ने रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी है। इसमें ऑपरेशन करने वाले निजी अस्पताल के चिकित्सक को क्लीन चिट दे दी गई।
प्रकरण की छानबीन के दौरान पता चला कि ऑपरेशन करते समय महिला को पोस्टपार्टम हेमरेज हो गया था। यह खतरनाक स्थिति होती है। अधिक रक्तस्राव से महिला की जान जा सकती थी। मरीज को सुरक्षित कर पाने के लिए चिकित्सक के पास केवल आधे घंटे का समय होता है। सीएमओ डॉ. आरएस दुबे ने बताया कि सर्जरी करने वाले चिकित्सक के बयान से यह स्पष्ट हुआ कि ऑपरेशन के दौरान संबंधित महिला में पोस्टपार्टम हेमरेज तेजी से डेवलप हो रहा था। इससे रक्तस्राव बढ़ जाता है। इसके अलावा बच्चा निकालते समय बच्चेदानी की साइज अपने आप छोटी होती है।
विज्ञापन
मानव शरीर की प्रक्रिया के अनुसार यह 6 लीटर से घटकर आधा लीटर साइज में हो जाती है। विकृतियों के चलते महिला के यूट्रस की साइज छोटी नहीं हुई। ऐसी परिस्थिति में मरीज की जान बचाने के लिए तत्काल बच्चेदानी (यूट्रस) निकालना विवशता बन जाती है। संबंधित चिकित्सक ने परिजनों को इस स्थिति से अवगत कराकर उनसे पहले सहमति ली। इसके बाद मृत बच्चे के साथ यूट्रस निकालकर महिला को सुरक्षित बचाया गया। सीएमओ ने बताया कि पूरे प्रकरण में लापरवाही का आरोप निराधार मिला है। ऑपरेशन के दौरान महिला गंभीर स्थिति में पहुंच चुकी थी। यदि आधे घंटे के अंदर बच्चेदानी न निकाली गई होती तो संबंधित मरीज की जान जा सकती थी।
विज्ञापन
..
क्या हैं पोस्टपार्टम हेमरेज
पोस्टपार्टम हेमरेज एक ऐसी स्थिति है जिसमें महिला शिशु को जन्म देने के बाद बहुत ज्यादा रक्तस्राव का सामना करने लगती है। इससे शरीर में रक्त की कमी होने के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है।
...
निजी अस्पताल के चिकित्सक का दर्ज हुआ बयान
सीएमओ ने शिकायत पत्र मिलने के बाद डिप्टी सीएमओ डॉ. रणजीत सिंह, सर्जन डॉ. सुनील तिवारी और गायनी डॉ. प्रीति को शामिल करते हुए तीन सदस्यीय टीम गठित की थी। यह टीम एक दिन पहले फातिमा हाॅस्पिटल पहुंची थी। वहां महिला की सर्जरी करने वाले चिकित्सक मौजूद नहीं मिले। उन्हें फोन करके सीएमओ कार्यालय में तलब किया गया था। अगले दिन संबंधित अस्पताल के चिकित्सक पहुंचकर टीम के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया। इसके बाद डिप्टी सीएमओ ने पूरी रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी।
..
यह है प्रकरण
वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के गनेशपुर बड़ेवन निवासी मेवालाल ने सीएमओ को शिकायती पत्र सौंपा था। इसमें उन्होंने शहर के कटरा पतेलवा स्थित फातिमा हॉस्पिटल एवं मैटरनिटी सेंटर पर आरोप लगाया कि उनकी पत्नी रीता का ऑपरेशन लापरवाही पूर्वक किया गया। इसमें मृत बच्चे के साथ बच्चेदानी भी निकाल दी गई। मामला तूल पकड़ने के बाद सीएमओ ने टीम गठित कर जॉच शुरू करा दी थी।