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Basti News: चकबंदी से अटकी फार्मर रजिस्ट्री, खाद के लिए परेशान किसान
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टिनिच। भानपुर तहसील क्षेत्र की अजगैवाजंगल ग्राम पंचायत में चकबंदी प्रक्रिया के चलते सैकड़ों किसान फार्मर रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे हैं। इसका असर खेती-किसानी पर पड़ रहा है। धान की रोपाई पूरी होने के बाद किसानों को यूरिया और डीएपी जैसे उर्वरक लेने में दिक्कत हो रही है, जिससे उनकी चिंता बढ़ गई है।
सरकार ने खाद वितरण, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) जैसी योजनाओं को फार्मर रजिस्ट्री से जोड़ दिया है। लेकिन चकबंदी के कारण कई किसानों को कंप्यूटरीकृत खतौनी नहीं मिल पा रही है। वहीं, आधार कार्ड और खतौनी में नाम अलग-अलग दर्ज होने से भी अनेक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं बन रही है।
किसान उमेश चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि धान की रोपाई पूरी हो चुकी है और अब फसल में यूरिया व डीएपी डालने का समय है। आधार कार्ड में उनका नाम उमेश चंद्र त्रिपाठी और खतौनी में केवल उमेश चंद्र दर्ज होने के कारण उनकी फार्मर रजिस्ट्री नहीं बन पा रही है। समय पर खाद नहीं मिलने से फसल प्रभावित होने की आशंका है।
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किसान कृष्ण चंद्र ने बताया कि चकबंदी के चलते कंप्यूटरीकृत खतौनी उपलब्ध नहीं हो रही है, जिससे फार्मर रजिस्ट्री लंबित है। वहीं, किसान रामशंकर चौहान का कहना है कि समिति पर खाद लेने जाने पर फार्मर रजिस्ट्री मांगी जाती है। रजिस्ट्री न होने के कारण उन्हें खाद नहीं मिल सकी।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य रामप्रकाश सिंह उर्फ नन्हे सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि चकबंदी प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के लिए खाद वितरण की वैकल्पिक व्यवस्था तत्काल लागू की जाए, ताकि समय पर उर्वरक उपलब्ध हो सके और फसल प्रभावित न हो। इस संबंध में आमा-टिनिच साधन सहकारी समिति के सचिव चंद्रशेखर ने बताया कि खाद वितरण के लिए फार्मर रजिस्ट्री जरूरी है। हालांकि, जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं बन पाई है, उनके लिए नियमानुसार वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है।
कोट
जिन गांवों में चकबंदी चल रही है, वहां फार्मर रजिस्ट्री न होने की स्थिति में किसान अपने रकबे का विवरण देकर भी खाद प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने किसानों से कृषि विभाग से संपर्क कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत उर्वरक लेने की अपील की।
-विजय वर्मा, सहायक विकास अधिकारी (कृषि), सल्टौआ
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सरकार ने खाद वितरण, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) जैसी योजनाओं को फार्मर रजिस्ट्री से जोड़ दिया है। लेकिन चकबंदी के कारण कई किसानों को कंप्यूटरीकृत खतौनी नहीं मिल पा रही है। वहीं, आधार कार्ड और खतौनी में नाम अलग-अलग दर्ज होने से भी अनेक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं बन रही है।
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किसान उमेश चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि धान की रोपाई पूरी हो चुकी है और अब फसल में यूरिया व डीएपी डालने का समय है। आधार कार्ड में उनका नाम उमेश चंद्र त्रिपाठी और खतौनी में केवल उमेश चंद्र दर्ज होने के कारण उनकी फार्मर रजिस्ट्री नहीं बन पा रही है। समय पर खाद नहीं मिलने से फसल प्रभावित होने की आशंका है।
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किसान कृष्ण चंद्र ने बताया कि चकबंदी के चलते कंप्यूटरीकृत खतौनी उपलब्ध नहीं हो रही है, जिससे फार्मर रजिस्ट्री लंबित है। वहीं, किसान रामशंकर चौहान का कहना है कि समिति पर खाद लेने जाने पर फार्मर रजिस्ट्री मांगी जाती है। रजिस्ट्री न होने के कारण उन्हें खाद नहीं मिल सकी।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य रामप्रकाश सिंह उर्फ नन्हे सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि चकबंदी प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के लिए खाद वितरण की वैकल्पिक व्यवस्था तत्काल लागू की जाए, ताकि समय पर उर्वरक उपलब्ध हो सके और फसल प्रभावित न हो। इस संबंध में आमा-टिनिच साधन सहकारी समिति के सचिव चंद्रशेखर ने बताया कि खाद वितरण के लिए फार्मर रजिस्ट्री जरूरी है। हालांकि, जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं बन पाई है, उनके लिए नियमानुसार वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है।
कोट
जिन गांवों में चकबंदी चल रही है, वहां फार्मर रजिस्ट्री न होने की स्थिति में किसान अपने रकबे का विवरण देकर भी खाद प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने किसानों से कृषि विभाग से संपर्क कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत उर्वरक लेने की अपील की।
-विजय वर्मा, सहायक विकास अधिकारी (कृषि), सल्टौआ