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Basti News: 25 से शुरू होगा कुआनो- मनोरमा संगम तट पर मेला
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कुआनों मनोरमा संगम तट एतिहासिक प्राचीन बाबा मुक्षेश्वर नाथ मंदिर
-चैत्र पूर्णिमा पर लालगंज बाजार पांच दिन चलेगा आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी।
लालगंज। महर्षि उद्दालक मुनि की तपोभूमि और कुआनो-मनोरमा के संगम तट पर मेले का आयोजन 25 अप्रैल से किया जाएगा। इसका समापन 29 अप्रैल को होगा। मेले में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं और बड़े-बड़े व्यापारी आते हैं।
पौराणिक मान्यता है कि इस संगम स्थल पर मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने अनुज लक्ष्मण और माता सीता के साथ लिट्टी चोखा का सेवन कर रात्रि विश्राम भी किया था। यहीं संगम में स्नान कर बाबा मोक्षेश्वर नाथ की पूजा अर्चना की थी। ऐसी मान्यता है कि संगम तट पर स्नान करके दान करना पुण्य है। पौराणिक मान्यता है कि इस तट पर स्नान कर दान देने से पाप का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। चैत्र पूर्णिमा से एक दिन पहले चतुर्दशी की शाम को घाटों के किनारे दूरदराज आए श्रद्धालु लिट्टी चोखे का सेवन कर सुबह स्नान दान करते हैं।
चैत्र पूर्णिमा से शुरू होने वाले इस मेले में शामिल होने के लिए दूर दूर से व्यापारियों जमावड़ा होने लगा है। संगम तट पर बाबा मोक्षेश्वर नाथ का एक प्राचीन मंदिर भी है। जो प्रमुख आस्था का केंद्र है। बताया जाता है कि चैत्र पूर्णिमा, परूवा और द्वितीया को मेले का विशेष महत्व है। इन तीनों दिन श्रद्धालु संगम में स्नान करके दान दान पुण्य करते हैं और बाबा मोक्षेशवर नाथ का जलाभिषेक कर मन्नतें मंगाते हैं।
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मेले का आयोजन ग्राम पंचायत और व्यापार मंडल के सहयोग से किया जा रहा है। ग्राम पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी गुप्ता, वीरेंद्र कुमार ने बताया कि मेले की तैयारी पूरी हो चुकी है। बड़ी संख्या में दुकानदार मेला परिसर में अपनी-अपनी दुकानें लगाने लगे हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी।
लालगंज। महर्षि उद्दालक मुनि की तपोभूमि और कुआनो-मनोरमा के संगम तट पर मेले का आयोजन 25 अप्रैल से किया जाएगा। इसका समापन 29 अप्रैल को होगा। मेले में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं और बड़े-बड़े व्यापारी आते हैं।
पौराणिक मान्यता है कि इस संगम स्थल पर मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने अनुज लक्ष्मण और माता सीता के साथ लिट्टी चोखा का सेवन कर रात्रि विश्राम भी किया था। यहीं संगम में स्नान कर बाबा मोक्षेश्वर नाथ की पूजा अर्चना की थी। ऐसी मान्यता है कि संगम तट पर स्नान करके दान करना पुण्य है। पौराणिक मान्यता है कि इस तट पर स्नान कर दान देने से पाप का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। चैत्र पूर्णिमा से एक दिन पहले चतुर्दशी की शाम को घाटों के किनारे दूरदराज आए श्रद्धालु लिट्टी चोखे का सेवन कर सुबह स्नान दान करते हैं।
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चैत्र पूर्णिमा से शुरू होने वाले इस मेले में शामिल होने के लिए दूर दूर से व्यापारियों जमावड़ा होने लगा है। संगम तट पर बाबा मोक्षेश्वर नाथ का एक प्राचीन मंदिर भी है। जो प्रमुख आस्था का केंद्र है। बताया जाता है कि चैत्र पूर्णिमा, परूवा और द्वितीया को मेले का विशेष महत्व है। इन तीनों दिन श्रद्धालु संगम में स्नान करके दान दान पुण्य करते हैं और बाबा मोक्षेशवर नाथ का जलाभिषेक कर मन्नतें मंगाते हैं।
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मेले का आयोजन ग्राम पंचायत और व्यापार मंडल के सहयोग से किया जा रहा है। ग्राम पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी गुप्ता, वीरेंद्र कुमार ने बताया कि मेले की तैयारी पूरी हो चुकी है। बड़ी संख्या में दुकानदार मेला परिसर में अपनी-अपनी दुकानें लगाने लगे हैं।