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Basti News: इंजीनियरिंग कॉलेज में एक करोड़ रुपये से होगा बिजली का इंतजाम
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निरीक्षण के दौरान निर्देश देते प्रमुख सचिव। संवाद
- प्रमुख सचिव ने किया इंजीनियरिंग कॉलेज का निरीक्षण
- शासन व रूसा के सहयोग से पूरा हुआ निर्माण, अभी साढ़े तीन करोड़ की दरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। गोरखपुर-बस्ती फोरलेन स्थित जिले के राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज व परिसर में तकरीबन एक करोड़ रुपये खर्च कर बिजली की व्यवस्था बनाई जाएगी। शासन के प्राविधिक शिक्षा के प्रमुख सचिव कुलदीप सहाय ने यह जानकारी कॉलेज के निरीक्षण के दौरान दी।
देर शाम निर्माणाधीन कॉलेज पर पहुंचे सहाय ने इंजीनियरिंग कॉलेज का निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइनिंग सर्विस (सीएंडडीएस) के परियोजना प्रबंधक अविनाश सिंह व साइट इंजीनियर जेपी यादव के साथ नवनिर्मित इंजीनियरिंग कॉलेज के सभी संकाय भवनों, लैब व फर्नीचर आदि की व्यवस्था परखी और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कॉलेज परिसर के निरीक्षण के दौरान जानकारी मिली कि धनाभाव के कारण बिजली की व्यवस्था नहीं हो पाई है। पूरा ब्योरा तलब किया तो पता चला कि लगभग 66 लाख रुपये कनेक्शन व तकरीबन 27 लाख रुपये से हैवी ट्रांसफाॅर्मर का इंतजाम किया जा सकेगा।
प्रमुख सचिव ने आश्वासन दिया कि जल्द ही बिजली का खर्च व अवशेष धनराशि जारी हो जाएगी और विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग के पढ़ाई की सुविधा मिलने लगेगी। इस मौके पर कॉलेज के प्राचार्य आरके सिंह के अलावा अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
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साढ़े तीन करोड़ रुपये की और है जरूरत
वर्ष 2016 से निर्माणाधीन इंजीनियरिंग कॉलेज अब बनकर लगभग तैयार हो चुका है। अब सिर्फ आवासीय ब्लॉक को अंतिम रूप देना बाकी रह गया है, जिसके लिए तकरीबन साढ़े तीन करोड़ रुपये के अवशेष बजट का इंतजार किया जा रहा है। इसके पूर्ण होते ही नए सत्र में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू होने का रास्ता साफ हो जाएगा।
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आठ साल से चल रहा निर्माण
16 मई 2016 को तत्कालीन कैबिनेट मंत्री व हर्रैया के विधायक राजकिशोर सिंह की पहल पर तकनीकी शिक्षा के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज का शिलान्यास किया गया था। 43.46 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाले इस कॉलेज के संपूर्ण निर्माण का जिम्मा सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइनिंग सर्विस) को दिया गया था। विभागीय अभियंताओं ने काम भी पूरे जोश से शुरू किया, लेकिन इसी बीच सूबे में दूसरी सरकार का गठन हो गया। इसके बाद से ही शासन व रूसा (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) के सहयोग से बनने वाले इस महत्वपूर्ण परियोजना की उपेक्षा भी शुरू हो गई। वहीं कोरोना काल में भी निर्माण कार्य पर ग्रहण लग गया।
धीरे-धीरे भुगतान होता रहा और निर्माण कार्य भी उसी गति से चलते रहे और अब जा कर यह कालेज बन कर तैयार हुआ है, जबकि अभी तक 39.98 करोड़ का ही भुगतान मिला है और 3.48 करोड़ रुपये और मिलने हैं, जिससे अभी आवासीय ब्लॉक अधूरा ही बन पाया है, जिसके लिए अवशेष धन का इंतजार किया जा रहा है।
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सभी संसाधनों से लैस हुआ इंजीनियरिंग कॉलेज
सीएंडडीएस के साइट इंजीनियर जयप्रकाश यादव के अनुसार मुख्य भवन का कार्य पूरा हो चुका है। इसके अलावा टाइप वन आवास व गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण भी लगभग पूरा होने वाला है। बताया कि चारदीवारी, ट्यूबवेल और वाटर हेड टैंक, टाइप एक, दो व तीन के आवासों के निर्माण को फाइनल टच दिया जा रहा है।
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जल्द विभाग को हैंडओवर कर दिया जाएगा भवन
मुख्य भवन व अन्य संसाधनों को तेजी से दुरुस्त किया जा रहा है। बिजली की व्यवस्था भी जल्द हो जाएगी। अवशेष धन के लिए पत्राचार किया गया है ताकि नए सत्र से पठन पाठन शुरू कर दिया जाए। आवासीय ब्लॉक तैयार होते ही विभाग को भवन स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
-अविनाश सिंह, परियोजना प्रबंधक, सीएंडडीएस
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- शासन व रूसा के सहयोग से पूरा हुआ निर्माण, अभी साढ़े तीन करोड़ की दरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। गोरखपुर-बस्ती फोरलेन स्थित जिले के राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज व परिसर में तकरीबन एक करोड़ रुपये खर्च कर बिजली की व्यवस्था बनाई जाएगी। शासन के प्राविधिक शिक्षा के प्रमुख सचिव कुलदीप सहाय ने यह जानकारी कॉलेज के निरीक्षण के दौरान दी।
देर शाम निर्माणाधीन कॉलेज पर पहुंचे सहाय ने इंजीनियरिंग कॉलेज का निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइनिंग सर्विस (सीएंडडीएस) के परियोजना प्रबंधक अविनाश सिंह व साइट इंजीनियर जेपी यादव के साथ नवनिर्मित इंजीनियरिंग कॉलेज के सभी संकाय भवनों, लैब व फर्नीचर आदि की व्यवस्था परखी और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कॉलेज परिसर के निरीक्षण के दौरान जानकारी मिली कि धनाभाव के कारण बिजली की व्यवस्था नहीं हो पाई है। पूरा ब्योरा तलब किया तो पता चला कि लगभग 66 लाख रुपये कनेक्शन व तकरीबन 27 लाख रुपये से हैवी ट्रांसफाॅर्मर का इंतजाम किया जा सकेगा।
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प्रमुख सचिव ने आश्वासन दिया कि जल्द ही बिजली का खर्च व अवशेष धनराशि जारी हो जाएगी और विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग के पढ़ाई की सुविधा मिलने लगेगी। इस मौके पर कॉलेज के प्राचार्य आरके सिंह के अलावा अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
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साढ़े तीन करोड़ रुपये की और है जरूरत
वर्ष 2016 से निर्माणाधीन इंजीनियरिंग कॉलेज अब बनकर लगभग तैयार हो चुका है। अब सिर्फ आवासीय ब्लॉक को अंतिम रूप देना बाकी रह गया है, जिसके लिए तकरीबन साढ़े तीन करोड़ रुपये के अवशेष बजट का इंतजार किया जा रहा है। इसके पूर्ण होते ही नए सत्र में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू होने का रास्ता साफ हो जाएगा।
आठ साल से चल रहा निर्माण
16 मई 2016 को तत्कालीन कैबिनेट मंत्री व हर्रैया के विधायक राजकिशोर सिंह की पहल पर तकनीकी शिक्षा के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज का शिलान्यास किया गया था। 43.46 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाले इस कॉलेज के संपूर्ण निर्माण का जिम्मा सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइनिंग सर्विस) को दिया गया था। विभागीय अभियंताओं ने काम भी पूरे जोश से शुरू किया, लेकिन इसी बीच सूबे में दूसरी सरकार का गठन हो गया। इसके बाद से ही शासन व रूसा (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) के सहयोग से बनने वाले इस महत्वपूर्ण परियोजना की उपेक्षा भी शुरू हो गई। वहीं कोरोना काल में भी निर्माण कार्य पर ग्रहण लग गया।
धीरे-धीरे भुगतान होता रहा और निर्माण कार्य भी उसी गति से चलते रहे और अब जा कर यह कालेज बन कर तैयार हुआ है, जबकि अभी तक 39.98 करोड़ का ही भुगतान मिला है और 3.48 करोड़ रुपये और मिलने हैं, जिससे अभी आवासीय ब्लॉक अधूरा ही बन पाया है, जिसके लिए अवशेष धन का इंतजार किया जा रहा है।
सभी संसाधनों से लैस हुआ इंजीनियरिंग कॉलेज
सीएंडडीएस के साइट इंजीनियर जयप्रकाश यादव के अनुसार मुख्य भवन का कार्य पूरा हो चुका है। इसके अलावा टाइप वन आवास व गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण भी लगभग पूरा होने वाला है। बताया कि चारदीवारी, ट्यूबवेल और वाटर हेड टैंक, टाइप एक, दो व तीन के आवासों के निर्माण को फाइनल टच दिया जा रहा है।
जल्द विभाग को हैंडओवर कर दिया जाएगा भवन
मुख्य भवन व अन्य संसाधनों को तेजी से दुरुस्त किया जा रहा है। बिजली की व्यवस्था भी जल्द हो जाएगी। अवशेष धन के लिए पत्राचार किया गया है ताकि नए सत्र से पठन पाठन शुरू कर दिया जाए। आवासीय ब्लॉक तैयार होते ही विभाग को भवन स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
-अविनाश सिंह, परियोजना प्रबंधक, सीएंडडीएस