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बेबसी: दर-दर भटकने पर मजबूर है ये बुजुर्ग महिला, प्लास्टिक की पन्नी के सहारे कट रही जिंदगी
Fri, 23 Jul 2021 09:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, बस्ती।
अमर उजाला नेटवर्क, बस्ती।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 23 Jul 2021 09:51 AM IST
सार
गरीबी के कारण कभी-कभार भोजन नहीं बन पाता। ऐसे में दो जून की रोटी के लिए भी दूसरे के घरों का सहारा लेना पड़ता है।
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पीड़ित बुजुर्ग महिला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
बस्ती जिले के गौर क्षेत्र के ग्राम पंचायत सिटकोहर निवासी 90 वर्षीय विधवा तजना उम्र के अंतिम पड़ाव पर हैं। मगर आजादी के इतने दिनों के बाद भी बुजुर्ग को राशन कार्ड के अलावा अन्य कोई सरकारी सुविधाएं नहीं मिल सकी। ऐसे में मजबूर होकर प्लास्टिक के पन्नी के नीचे जीवन काट रही हैं।
तजना को पांच बेटे थे, जिसमें चार की बचपन में मौत हो चुकी है। जबकि एक बेटा बचा है, लेकिन उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। तीस वर्ष पहले पति की भी मौत हो चुकी है। तजना के पास कोई अपना सहारा नहीं है। कोटेदार से राशन तो मिल जाता है। लेकिन गरीबी के कारण कभी-कभार भोजन नहीं बन पाता। ऐसे में दो जून की रोटी के लिए भी दूसरे के घरों का सहारा लेना पड़ता है। उम्र अंतिम पड़ाव पर है मजदूरी भी नहीं कर सकतीं।
तजना बताती हैं कि सरकार की योजनाओं के लिए गांव के प्रधान से लेकर ब्लॉक के कर्मचारियों तक कई बार फरियाद कीं मगर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
बुजुर्ग की दशा को देखते हुए परासडीह गांव के प्रधान प्रतिनिधि अमन शुक्ल ने ट्विटर से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, डीएम, सीडीओ और एसडीएम हरैया को ट्वीट किया। लेकिन किसी ने सुधि नहीं ली। सिटकोहर गांव के प्रधान लल्लन वर्मा ने बताया कि बुजुर्ग को राशन कार्ड के अलावा सरकार की किसी भी योजनाओं का लाभ नहीं मिला है। इस बाबत सीडीओ डॉ. राजेश प्रजापति ने बताया जानकारी हुई है, जांच के लिए बीडीओ को निर्देशित किया गया है।
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तजना को पांच बेटे थे, जिसमें चार की बचपन में मौत हो चुकी है। जबकि एक बेटा बचा है, लेकिन उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। तीस वर्ष पहले पति की भी मौत हो चुकी है। तजना के पास कोई अपना सहारा नहीं है। कोटेदार से राशन तो मिल जाता है। लेकिन गरीबी के कारण कभी-कभार भोजन नहीं बन पाता। ऐसे में दो जून की रोटी के लिए भी दूसरे के घरों का सहारा लेना पड़ता है। उम्र अंतिम पड़ाव पर है मजदूरी भी नहीं कर सकतीं।
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तजना बताती हैं कि सरकार की योजनाओं के लिए गांव के प्रधान से लेकर ब्लॉक के कर्मचारियों तक कई बार फरियाद कीं मगर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
बुजुर्ग की दशा को देखते हुए परासडीह गांव के प्रधान प्रतिनिधि अमन शुक्ल ने ट्विटर से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, डीएम, सीडीओ और एसडीएम हरैया को ट्वीट किया। लेकिन किसी ने सुधि नहीं ली। सिटकोहर गांव के प्रधान लल्लन वर्मा ने बताया कि बुजुर्ग को राशन कार्ड के अलावा सरकार की किसी भी योजनाओं का लाभ नहीं मिला है। इस बाबत सीडीओ डॉ. राजेश प्रजापति ने बताया जानकारी हुई है, जांच के लिए बीडीओ को निर्देशित किया गया है।
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