फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   due to closing of entry pointpeople bothered

एंट्री प्वॉइंट 13 महीने से बंद, खतरे में जान

Fri, 16 Mar 2018 10:37 PM IST
basti
basti Updated Fri, 16 Mar 2018 10:37 PM IST
विज्ञापन
due to closing of entry pointpeople bothered
हाईवे के अवैध कट से लेन पार करते लोग। - फोटो : amar ujala
बस्ती। 
विज्ञापन

जिले के दक्षिण-पूर्व बसी तीन सौ गांवों की करीब सात लाख आबादी जान हथेली पर लेकर मुख्यालय पहुंचने के लिए मजबूर है। सदर तहसील के बहादुरपुर, कुुदरहा ब्लॉक के अलावा आंशिक रूप से सदर, कप्तानगंज और दुबौलिया ब्लॉक के लोगों का 13 महीने से संपर्क कटा है। कारण कि पुराना अमहट पुल 13 महीने पहले ढह गया था। इसके निर्माण के लिए धरना-प्रदर्शन भी चल रहा है। 
 शहर में दाखिल होने के लिए या तो जानलेवा अवैध कट पार करके गलियों से गुजर कर कचहरी पहुंचें अथवा बड़ेवन फ्लाईओवर के नीचे से होकर आएं। बस्ती सदर और महादेवा (नगर पूरब) विधाना सभाओं को अलग करती कुआनो पर बने इस पुल के ढहने से दोनों विधानसभा क्षेत्रों के लोगों की राह बंद है। यह हालत तब है जब जिले की सभी पांच विधान सभा और एक मात्र संसदीय सीट पर भाजपा का कब्जा है। बावजूद इसके जिले की एक चौथाई आबादी का जिला मुख्यालय से संपर्क कटा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बार-बार बजट का रिवीजन और नेताओं की आपसी खींचतान के कारण पुल को लेकर आम सहमति अब तक नहीं बन सकी। डीएम सुशील कुमार मौर्य का कहना है कि शासन में फाइल लंबित है। निर्णय होते ही पुल का निर्माण शुरू होगा। 
विज्ञापन


तंग गलियों में दिनभर जाम 
पुराने अमहट पुल से होकर गुजरने वाले जिस गली से होकर आते-जाते हैं, उसकी हालत भी जर्जर है। कोर्ट चौराहे से पुराना डाकखाना मोहल्ले से होकर जिन दो गलियों में को विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, उसमें ‘पीक टाइम’ में जाम लगता है। फोरलेन से मूड़घाट मोड़ पर नो एंट्री लागू है। उसके पहले पटवा धर्मकांटे के बगल से गुजरी गली काफी संकरी है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


दंश झेल रही दोआबा की आबादी 
पुल निर्माण की मांग लेकर कई तरह की राजनैतिक चाल चली गई लेकिन कामयाब एक भी नहीं हुई। यहां तक कि जल सत्याग्रह और धरना-प्रदर्शन भी हुआ लेकिन बेअसर रहा। सांसद, विधायक के अलावा अन्य निर्वाचित जन प्रतिनिधियों की कमजोर इच्छाशक्ति के चलते कोई दबाव नहीं बना। सरकारी तंत्र की न तो निष्ठा जागृत हुई, न ही जनप्रतिनिधियों को कर्तव्य याद आया। जबकि कुआनो और मनवर दोआबा के बीच के गांवों के लोग दुपहिया, चार पहिया गाड़ी लेकर आराम से आते-जाते रहे। मगर पुल का अब तक न तो मरम्मत हुआ न ही नया पुल बनाने की शुरुआत हुई। 

सरकस की रस्सी पर चलने जैसी राह 
शहर की प्रमुख सड़कों से होकर गुजरना सर्कस की रस्सी पर चलने से कम नहीं है। चाहे जिला अस्पताल जाना हो या कचहरी-कलेक्ट्रेट, हाईवे पर पहुंचना हो या शहर से बाहर किसी संपर्क मार्ग पर जाना हो। बच-बचाकर निकल गए तो किस्मत समझिए, वरना हालत तो यह है कि गाड़ी या शरीर में बिना कुछ चोट पहुंचे गुजर पाना मुश्किल है। 


शहर की सड़कें भी खस्ताहाल 
कोतवाली के सामने शिवा कालोनी मोड़ तक सड़क टूट गई है। बीच में बडे़-बडे़ गड्ढे बन गए हैं। उसी रास्ते प्रशासनिक अधिकारी, राजनेता, अभियंत्रण से जुड़े जिम्मेदार गुजरते हैं। स्टेशन रोड पर दक्षिण दरवाजा चौकी से आगे बढ़ते ही सड़क में गड्ढे शुरू हो जाते हैं। हाईवे-पचपेड़िया रोडवेज रोड, कांटे-मुंडेरवा-बस्ती मार्ग की हालत जर्जर है। 

इन रास्तों से भी चलिए तो बचकर 
मालवीय मार्ग पर बादशाह टाकीज के मोड़ पर। 
इसी रास्ते पर नेहरू तिराहे से पेट्रोलपंप तक। 
कैली अस्पताल रोड लंबे समय से जर्जर है। 
मंगल बाजार, करुआ बाबा स्थान मार्ग। 
रंजीत चौराहे से सेंट बेसिल्स स्कूल होते हुए पचपेड़िया रोड। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed