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यहां डॉक्टर का सुझाव निशुल्क, दवाएं बाहर से
basti
Updated Wed, 10 Oct 2018 11:50 PM IST
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बाहर से दवा लेने के लिए लिखी गई पर्ची।
- फोटो : amar ujala
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बस्ती। कल्याणकारी योजनाओं में निशुल्क स्वास्थ्य सेवा भी शामिल हैं। सरकार ने इसके लिए जहां संसाधन उपलब्ध कराए हैं, वहीं, सरकारी अस्पतालों में जांच, दवा व इलाज निशुल्क की व्यवस्था है, मगर इस व्यवस्था को संचालित करने वाले हाथ मनमानी पर उतारू हैं। तमाम आदेश निर्देश को ठेंगा दिखाकर जिला अस्पताल में इलाज में खुलेआम मरीजों का शोषण हो रहा है। अस्पताल में दवा होने के बावजूद डॉक्टर बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं।
बुधवार को जिला अस्पताल की ओपीडी मरीजों से खचाखच थी, जो मरीज चिकित्सकों को दिखा कर लौट रहे थे, उनके हाथों में एक पर्ची थी, जिन्हें डॉक्टर ने यह निर्देश दिया था कि इस दवा को बाहर से ले लो। हाल ही में एडी हेल्थ ने भी इस विषय को गंभीरता से लेते हुए ऐसे चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन मामला सिफर रहा। शहर की पुुरानी बस्ती निवासिनी नेहा को सिर में दर्द था। वह फिजिशियन के पास इलाज के लिए गई थी। नेहा ने कहा कि डॉक्टर ने इन्हें देखने के बाद बाहर की दवाएं लिख दी, वहीं, रामपुर निवासिनी अफजा खातून ने कहा कि वह भी दूसरे फिजिशियन को जब भी दिखाने आती हैं, दो से चार सौ की दवा वे बाहर की लिख देते हैं। वहीं, शहर के दस वर्षीय राहुल का इलाज कराने आईं उनकी मां ने बताया कि बेटे को कई दिनों से बुखार आ रहा था, बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाया, जिन्होंने लगभग सात सौ रुपये की दवा लिख दी। यही हाल जिला अस्पताल में तैनात कई चिकित्सकों का है, जो मरीजों का बाहर की दवा व जांच लिख रहे हैं। इस संबंध में एडी हेल्थ डॉ रंगजी दूबे ने कहा कि स्थिति से अवगत हूं, हाल ही में मेरी ओर से पत्र भी जारी किया गया।
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बुधवार को जिला अस्पताल की ओपीडी मरीजों से खचाखच थी, जो मरीज चिकित्सकों को दिखा कर लौट रहे थे, उनके हाथों में एक पर्ची थी, जिन्हें डॉक्टर ने यह निर्देश दिया था कि इस दवा को बाहर से ले लो। हाल ही में एडी हेल्थ ने भी इस विषय को गंभीरता से लेते हुए ऐसे चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन मामला सिफर रहा। शहर की पुुरानी बस्ती निवासिनी नेहा को सिर में दर्द था। वह फिजिशियन के पास इलाज के लिए गई थी। नेहा ने कहा कि डॉक्टर ने इन्हें देखने के बाद बाहर की दवाएं लिख दी, वहीं, रामपुर निवासिनी अफजा खातून ने कहा कि वह भी दूसरे फिजिशियन को जब भी दिखाने आती हैं, दो से चार सौ की दवा वे बाहर की लिख देते हैं। वहीं, शहर के दस वर्षीय राहुल का इलाज कराने आईं उनकी मां ने बताया कि बेटे को कई दिनों से बुखार आ रहा था, बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाया, जिन्होंने लगभग सात सौ रुपये की दवा लिख दी। यही हाल जिला अस्पताल में तैनात कई चिकित्सकों का है, जो मरीजों का बाहर की दवा व जांच लिख रहे हैं। इस संबंध में एडी हेल्थ डॉ रंगजी दूबे ने कहा कि स्थिति से अवगत हूं, हाल ही में मेरी ओर से पत्र भी जारी किया गया।
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