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दीपावली काउंट डाउन शुरू, घर से बाजार तक तैयारी तेज
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गांधी नगर में दुकानों पर दीपावली की खरीदारी करतीं महिलाएं।
- फोटो : BASTI
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दीपावली काउंट डाउन शुरू, घर से बाजार तक तैयारी तेज
बस्ती। घरों व प्रतिष्ठानों में दीपावली की तैयारियां शुरू हो गईं हैं। लोगों ने अपने-अपने घरों-दुकानों को अच्छे व आकर्षक रंग से सजाना-संवारना शुरू कर दिया है। पुरानी व बदहाल दिखने वाली दीवारें कलर करने के बाद नए लुक में दिखने लगी हैं। दीपावली से ठीक पहले लोगों का पूरा जोर घर की सजावट और रंगाई-पुताई पर है।
पेंट विक्रेता देवेश का कहना है कि अधिकतर लोगों का आकर्षक दिखने वाले रंगों पर ज्यादा फोकस है। डिस्टेंपर और ऑयल ब्रांड पेंट के चाहने वालों की संख्या कम हुई है। प्लास्टिक पेंट की और अधिक रुझान देखा जा रहा है। इन पेंटों की खासियत और खूबसूरती लोगों को लुभा रही है। जो इसका खर्च नहीं उठा पाते वो चाहते है कि कम से कम घर के गेस्ट रूम में इसकी पेंटिंग जरूर हो जाए। इसकी खासियत है कि दीवार पर किसी भी तरह का दाग लग जाए, उसे पानी से धोकर या कपड़े से साफ किया जा सकता है।
आधुनिक युग में इन दिनों रंगों के चयन के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल हो रहा है। पहले रंगाई-पुताई के लिए गिने-चुने ही कलर हुआ करते थे, लेकिन अब रंगों की भरमार है। सामने इतने सारे कलर देखकर ग्राहकों के सामने दुविधा न खड़ी हो जाए, इसलिए कंपनियों की साइट्स पर ये सारे कलर उपलब्ध है। ज्यादातर ग्राहक इंटरनेट के जरिए कलर पसंद कर दुकान पर पहुंच रहे हैं।
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रंगों की कीमत 10 से 15 फीसदी बढ़ी
रंगों के दामों में पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार 10 से 15 फीसदी बढ़ी है। महंगाई के बावजूद लोग अपने घर-दुकान को सजाने-संवारने में संकोच नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि साल में एक बार घर को संवारने को मौका मिलता है।
मजदूरों ने बदला ट्रेंड
त्योहारी मौसम में पेंट्स की कीमतों में उछाल तो आया है, साथ ही रंगाई-पुताई करने वाले भी इस बार मजदूरी का ट्रेंड बदल रहे है। वे मजदूरी फीट के हिसाब से ले रहे है। कोई विशेष पुताई कराने या खास तकनीकि पर पुतइया कराने पर महंगा रेट वसूल रहे है। रोजाना के आधार पर रंगाई-पुताई करने वाले मजदूर एक दिन की 450 से 500 रुपये तक की कीमत वसूल रहे है। जबकि पिछले वर्ष यही मजदूरी 350-400 रुपये थी।
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बस्ती। घरों व प्रतिष्ठानों में दीपावली की तैयारियां शुरू हो गईं हैं। लोगों ने अपने-अपने घरों-दुकानों को अच्छे व आकर्षक रंग से सजाना-संवारना शुरू कर दिया है। पुरानी व बदहाल दिखने वाली दीवारें कलर करने के बाद नए लुक में दिखने लगी हैं। दीपावली से ठीक पहले लोगों का पूरा जोर घर की सजावट और रंगाई-पुताई पर है।
पेंट विक्रेता देवेश का कहना है कि अधिकतर लोगों का आकर्षक दिखने वाले रंगों पर ज्यादा फोकस है। डिस्टेंपर और ऑयल ब्रांड पेंट के चाहने वालों की संख्या कम हुई है। प्लास्टिक पेंट की और अधिक रुझान देखा जा रहा है। इन पेंटों की खासियत और खूबसूरती लोगों को लुभा रही है। जो इसका खर्च नहीं उठा पाते वो चाहते है कि कम से कम घर के गेस्ट रूम में इसकी पेंटिंग जरूर हो जाए। इसकी खासियत है कि दीवार पर किसी भी तरह का दाग लग जाए, उसे पानी से धोकर या कपड़े से साफ किया जा सकता है।
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आधुनिक युग में इन दिनों रंगों के चयन के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल हो रहा है। पहले रंगाई-पुताई के लिए गिने-चुने ही कलर हुआ करते थे, लेकिन अब रंगों की भरमार है। सामने इतने सारे कलर देखकर ग्राहकों के सामने दुविधा न खड़ी हो जाए, इसलिए कंपनियों की साइट्स पर ये सारे कलर उपलब्ध है। ज्यादातर ग्राहक इंटरनेट के जरिए कलर पसंद कर दुकान पर पहुंच रहे हैं।
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रंगों की कीमत 10 से 15 फीसदी बढ़ी
रंगों के दामों में पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार 10 से 15 फीसदी बढ़ी है। महंगाई के बावजूद लोग अपने घर-दुकान को सजाने-संवारने में संकोच नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि साल में एक बार घर को संवारने को मौका मिलता है।
मजदूरों ने बदला ट्रेंड
त्योहारी मौसम में पेंट्स की कीमतों में उछाल तो आया है, साथ ही रंगाई-पुताई करने वाले भी इस बार मजदूरी का ट्रेंड बदल रहे है। वे मजदूरी फीट के हिसाब से ले रहे है। कोई विशेष पुताई कराने या खास तकनीकि पर पुतइया कराने पर महंगा रेट वसूल रहे है। रोजाना के आधार पर रंगाई-पुताई करने वाले मजदूर एक दिन की 450 से 500 रुपये तक की कीमत वसूल रहे है। जबकि पिछले वर्ष यही मजदूरी 350-400 रुपये थी।