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Basti News: भगवान श्रीकृष्ण की बाललीला सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
Sat, 10 May 2025 12:52 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 10 May 2025 12:52 AM IST
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बनकटी। गंगौरी गांव में नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन शुक्रवार को अयोध्याधाम से आए कथा व्यास आचार्य दिव्यांशु ने भगवान श्रीकृष्ण की बालीलाओं का वर्णन किया। कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद से ही कंस उन्हें मारने की कोशिश करने लगा था। भगवान श्रीकृष्ण की बाललीला सुन श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
आचार्य ने कहा कि कंस ने भगवान श्रीकृष्ण को मारने के लिए अपनी राज्य की सर्वाधिक बलवान राक्षसी पूतना को भेजा। पूतना वेश बदलकर भगवान श्रीकृष्ण को अपने स्तन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण उसको मौत के घाट उतार देते हैं और उसके बाद कार्तिक माह में ब्रजवासी भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजन का कार्यक्रम करने की तैयारी करते हैं। भगवान कृष्ण द्वारा उनको भगवान इंद्र की पूजन करने से मना करते हुए गोवर्धन महाराज की पूजन करने की बात कहते हैं। इंद्र भगवान उन बातों को सुनकर क्रोधित हो जाते हैं। भारी वर्षा करने लगते हैं। इससे ब्रजवासी परेशान हो जाते हैं। भगवान श्री कृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा अंगुली पर उठाकर पूरे नगरवासियों को पर्वत को नीचे बुला लेते हैं। जिससे हार कर इंद्र एक सप्ताह के बाद वर्षा को बंद कर देते हैं। जिसके बाद ब्रज में भगवान श्री कृष्ण और गोवर्धन महाराज के जयकारे लगाने लगते हैं।
इस अवसर पर आयोजक सज्जन बाबा, रामयज्ञ मणि त्रिपाठी, श्रीमती सावित्री देवी, राजीव शुक्ला, राजेंद्र प्रसाद चौधरी, रुद्र नारायण मणि त्रिपाठी, जितेंद्र मणि त्रिपाठी, दिलीप चौधरी, बबलू दूबे आदि उपस्थित रहे।
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आचार्य ने कहा कि कंस ने भगवान श्रीकृष्ण को मारने के लिए अपनी राज्य की सर्वाधिक बलवान राक्षसी पूतना को भेजा। पूतना वेश बदलकर भगवान श्रीकृष्ण को अपने स्तन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण उसको मौत के घाट उतार देते हैं और उसके बाद कार्तिक माह में ब्रजवासी भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजन का कार्यक्रम करने की तैयारी करते हैं। भगवान कृष्ण द्वारा उनको भगवान इंद्र की पूजन करने से मना करते हुए गोवर्धन महाराज की पूजन करने की बात कहते हैं। इंद्र भगवान उन बातों को सुनकर क्रोधित हो जाते हैं। भारी वर्षा करने लगते हैं। इससे ब्रजवासी परेशान हो जाते हैं। भगवान श्री कृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा अंगुली पर उठाकर पूरे नगरवासियों को पर्वत को नीचे बुला लेते हैं। जिससे हार कर इंद्र एक सप्ताह के बाद वर्षा को बंद कर देते हैं। जिसके बाद ब्रज में भगवान श्री कृष्ण और गोवर्धन महाराज के जयकारे लगाने लगते हैं।
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इस अवसर पर आयोजक सज्जन बाबा, रामयज्ञ मणि त्रिपाठी, श्रीमती सावित्री देवी, राजीव शुक्ला, राजेंद्र प्रसाद चौधरी, रुद्र नारायण मणि त्रिपाठी, जितेंद्र मणि त्रिपाठी, दिलीप चौधरी, बबलू दूबे आदि उपस्थित रहे।
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