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Basti News: मनवर-कुआनो संगम में श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, किया दान-पुण्य
Mon, 14 Apr 2025 12:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 14 Apr 2025 12:18 AM IST
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लालगंज। चैत्र पूर्णिमा पर लालगंज स्थित कुआनो-मनवर संगम के तट पर रविवार को भोर से श्रद्धालुओं तांता लगना शुरू हो गया।
लोगों ने पवित्र संगम में आस्था की डुबकी लगाई। अन्न एवं गोदान के साथ पूजन-अर्चन किया गया। ठोकवा, सिसई पंडित, जनजन, कुरमौल, चैबाह, बारीघाट, मसुरिहा, मेहनौना, कल्यानपुर, हथियाव, कुदरहा, महादेवा, मुंडेरवा पिपरपाती, चकिया, परसाव, सेल्हरा आदि गांवों के अलावा दूर दराज तथा अन्य जनपदों से लोग शनिवार से ही संगम तट पहुंचने लगे हैं। यहां परंपरा के अनुसार लोग लिट्टी-चोखे का भोजन कर रात्रि विश्राम किया। भोर में 5 बजे से ही कुआनो-मनवर संगम में डुबकी लगानी प्रारंभ कर दी।
यह सिलसिला पूरे दिन चलता रहा। श्रद्धालुओं ने संगम तट पर स्थित बाबा मोक्षेश्वर नाथ शिव मंदिर में भगवान शिव की आराधना की। पूरे दिन पुण्य अर्जित करने की होड़ मची रही।
मान्यता है कि त्रेता काल में यहां भगवान राम ने लिट्टी चोखा खाकर रात में विश्राम किया था। तभी से यहां पूजन-अर्चन के साथ लिट्टी-चोखा खाने की परंपरा है। चैत्र पूर्णिमा के दिन से इस संगम तट पर पांच दिवसीय मेला भी लगता है। रविवार से शुरू मेला 17 अप्रैल तक चलेगा। मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। व्यापार मंडल और ग्राम पंचायत के सहयोग से मेले का आयोजन किया गया है।
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लोगों ने पवित्र संगम में आस्था की डुबकी लगाई। अन्न एवं गोदान के साथ पूजन-अर्चन किया गया। ठोकवा, सिसई पंडित, जनजन, कुरमौल, चैबाह, बारीघाट, मसुरिहा, मेहनौना, कल्यानपुर, हथियाव, कुदरहा, महादेवा, मुंडेरवा पिपरपाती, चकिया, परसाव, सेल्हरा आदि गांवों के अलावा दूर दराज तथा अन्य जनपदों से लोग शनिवार से ही संगम तट पहुंचने लगे हैं। यहां परंपरा के अनुसार लोग लिट्टी-चोखे का भोजन कर रात्रि विश्राम किया। भोर में 5 बजे से ही कुआनो-मनवर संगम में डुबकी लगानी प्रारंभ कर दी।
यह सिलसिला पूरे दिन चलता रहा। श्रद्धालुओं ने संगम तट पर स्थित बाबा मोक्षेश्वर नाथ शिव मंदिर में भगवान शिव की आराधना की। पूरे दिन पुण्य अर्जित करने की होड़ मची रही।
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मान्यता है कि त्रेता काल में यहां भगवान राम ने लिट्टी चोखा खाकर रात में विश्राम किया था। तभी से यहां पूजन-अर्चन के साथ लिट्टी-चोखा खाने की परंपरा है। चैत्र पूर्णिमा के दिन से इस संगम तट पर पांच दिवसीय मेला भी लगता है। रविवार से शुरू मेला 17 अप्रैल तक चलेगा। मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। व्यापार मंडल और ग्राम पंचायत के सहयोग से मेले का आयोजन किया गया है।
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