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फाइनेंस कंपनी का फरार यूपी हेड पकड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 01 May 2016 11:45 PM IST
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आरोपी पुलिस गिरफ्त में।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मुंडेरवा। लोगों को धोखा देकर तकरीबन दो करोड़ रुपये लेकर गायब हुई फर्जी फाइनेंस कंपनी आस्था इंटरनेशनल लिमिटेड सूरत के यूपी हेड को मुंडेरवा पुलिस ने गिरफ्तार उससे पूछताछ कर रही है।
मुंडेरवा कस्बे में वर्ष 2009 में आस्था इंटर नेशनल लिमिटेड प्राइवेट बैंक के यूपी हेड रामधनी सिंह के अलावा कुछ अन्य ने मुंडेरवा कस्बे के लोगों से अपने बैंक की स्कीम की जानकारी देने के लिए मीटिंग की। इसमें कस्बे के आम आदमी से लेकर व्यवसायी भी शामिल हुए। कथित कंपनी ने लोक-लुभावन स्कीम से लोगों में अपनी पैठ बनाई और बैंक में रुपये जमा कराया।
गोरखपुर अपने जोनल आफिस से आ कर धीरे-धीरे मुंडेरवा बाजार सहित आसपास के लोग भी इस बैंक की स्कीम के झांसे में आने लगे। देखते ही देखते फाइनेंस कंपनी ने लाखों रुपये जमा करा लिया। वर्ष 2010 में कस्बे में किराए के मकान में भव्य ब्रांच आफिस खोल दिया। इस फर्जी फाइनेंस कंपनी में 2010 से लेकर 2012 तक लगभग दो करोड़ रुपये जमा कराए गए। वर्ष 2012 में रातोंरात कंपनी फरार हो गई। इसमें उपभोक्ता अजय अग्रहरि, सुबाष जायसवाल, श्याम सुंदर पांडेय, इंद्रनाथ पांडेय, आरपी राय, राम सुबास यादव, राम प्रताप चौधरी समेत सैकड़ों लोगों ने रुपये जमा किए थे।
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इन लोगों ने बताया कि इस आस्था इंटरनेशनल लिमिटेड में जो रुपये जमा करता था उसी को एजेंट बना देती थी। अजय, सुबाष आदि ने कस्बे सहित आसपास के अपने परिचितों का भी रुपये जमा कराये। जब यह कंपनी भाग गई तो अजय, सुबास, इंद्रनाथ आदि ने अपनी जमीन और मकान को बेच कर जमा कराए अन्य लोगों के रुपये वापस भी किए। इस बैंक में दो, तीन और पांच वर्ष में रुपये दो गुना और दस माह की आरडी पर दस प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान की स्कीम थी।
कंपनी का सीएमडी संतोष किशन सपकाले और एमडी चंद्रेश सिंह चौहान सूरत गुजरात की जेल में बंद हैं। पकड़ा गया रामधनी सिंह मऊ जिले का रहने वाला है। इसने गोरखपुर के सिकटा में मकान बनवाया था, जिसे उसने चोरी-छिपे बेच दिया था। सूत्र बताते हैं कि आस्था के नाम पर कुछ जमीन भी यहीं है, वह मकान बनवा कर बेच रहा था। मुखबिर की सूचना पर मुंडेरवा एसओ प्रदीप सिंह और एसआई दिनेश यादव ने उसे शनिवार की रात को गोरखपुर से गिरफ्तार किया।
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मुंडेरवा कस्बे में वर्ष 2009 में आस्था इंटर नेशनल लिमिटेड प्राइवेट बैंक के यूपी हेड रामधनी सिंह के अलावा कुछ अन्य ने मुंडेरवा कस्बे के लोगों से अपने बैंक की स्कीम की जानकारी देने के लिए मीटिंग की। इसमें कस्बे के आम आदमी से लेकर व्यवसायी भी शामिल हुए। कथित कंपनी ने लोक-लुभावन स्कीम से लोगों में अपनी पैठ बनाई और बैंक में रुपये जमा कराया।
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गोरखपुर अपने जोनल आफिस से आ कर धीरे-धीरे मुंडेरवा बाजार सहित आसपास के लोग भी इस बैंक की स्कीम के झांसे में आने लगे। देखते ही देखते फाइनेंस कंपनी ने लाखों रुपये जमा करा लिया। वर्ष 2010 में कस्बे में किराए के मकान में भव्य ब्रांच आफिस खोल दिया। इस फर्जी फाइनेंस कंपनी में 2010 से लेकर 2012 तक लगभग दो करोड़ रुपये जमा कराए गए। वर्ष 2012 में रातोंरात कंपनी फरार हो गई। इसमें उपभोक्ता अजय अग्रहरि, सुबाष जायसवाल, श्याम सुंदर पांडेय, इंद्रनाथ पांडेय, आरपी राय, राम सुबास यादव, राम प्रताप चौधरी समेत सैकड़ों लोगों ने रुपये जमा किए थे।
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इन लोगों ने बताया कि इस आस्था इंटरनेशनल लिमिटेड में जो रुपये जमा करता था उसी को एजेंट बना देती थी। अजय, सुबाष आदि ने कस्बे सहित आसपास के अपने परिचितों का भी रुपये जमा कराये। जब यह कंपनी भाग गई तो अजय, सुबास, इंद्रनाथ आदि ने अपनी जमीन और मकान को बेच कर जमा कराए अन्य लोगों के रुपये वापस भी किए। इस बैंक में दो, तीन और पांच वर्ष में रुपये दो गुना और दस माह की आरडी पर दस प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान की स्कीम थी।
कंपनी का सीएमडी संतोष किशन सपकाले और एमडी चंद्रेश सिंह चौहान सूरत गुजरात की जेल में बंद हैं। पकड़ा गया रामधनी सिंह मऊ जिले का रहने वाला है। इसने गोरखपुर के सिकटा में मकान बनवाया था, जिसे उसने चोरी-छिपे बेच दिया था। सूत्र बताते हैं कि आस्था के नाम पर कुछ जमीन भी यहीं है, वह मकान बनवा कर बेच रहा था। मुखबिर की सूचना पर मुंडेरवा एसओ प्रदीप सिंह और एसआई दिनेश यादव ने उसे शनिवार की रात को गोरखपुर से गिरफ्तार किया।