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जिंदगी की जंग जीत गई दूसरी निर्भया

Sat, 18 May 2019 12:16 AM IST
basti Published by: राकेश पांडेय Updated Sat, 18 May 2019 12:16 AM IST
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nirbhya surviived
marital rape - फोटो : pexels.com
बस्ती/कलवारी। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 48 घंटे मौत से जंग लड़कर शुक्रवार सुबह कलवारी क्षेत्र की निर्भया आखिरकार जीत गई। पास बैठी मां से बिस्कुट मांगा। गुनगुनी चाय के साथ बिस्कुट खाकर उसके चेहरे पर हल्की चमक लौटी। इलाज कर रहे डॉक्टर ने उसे अब पूरी तरह से खतरे से बाहर बताया। थाने से पहुंचे एसआई संतोष कुमार मिश्र ने बताया कि उससे अभी ज्यादा बातचीत करने की मनाही है। उधर, दुष्कर्म की पुष्टि के लिए नमूने फॉरेंसिक लेबोरेटरी में भेजे गए हैं। इसकी रिपोर्ट का इंतजार है।
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कलवारी थाना क्षेत्र के गांव ही नहीं पूरे इलाके में घटना को लेकर लोगों में गुस्सा है। जिस तरह से मां के बिस्तर पर सोई तीन वर्ष की मासूम को हवस का शिकार बनाया गया, उससे लोग हतप्रभ हैं। बुधवार तड़के की घटना में पीड़िता की दादी को सबसे पहले इसकी जानकारी हुई। आसपास ढूंढने के बाद जब कोई पता नहीं चला तो उसने पुलिस की मदद लेना मुनासिब समझा। थाने पर पहुंचते ही एसओ जय प्रकाश दुबे को उसने वाकया बताया। ताबड़तोड़ सुरागकशी के बाद एक संदिग्ध को हिरासत में लिया। पहले तो वह मामले से पल्ला झाड़ता रहा लेकिन कड़ाई करने पर उसने हैवानियत की ऐसी दास्तान सुनाई कि पुलिस व परिवार वालों के पैरों तले जमीन सरक गई। आरोपी की निशानदेही पर दिन में करीब नौ बजे मासूम को खून से लथपथ पेड़ के नीचे पाया गया। हालत नाजुक देख एसओ बिना एंबुलेंस का इंतजार किए, पुलिस की गाड़ी में उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां महिला आरक्षी न होने और मुकदमा दर्ज न होने का हवाला देकर इलाज करने से मना कर दिया। विवाद खड़ा होने पर सीएमओ जेएलएम कुशवाहा और एसआईसी ओपी सिंह पहुंचे और तब जाकर इलाज शुरू हो सका। हालांकि, बालरोग सर्जन की उपलब्धता न होने से पीड़िता को बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया गया था। जहां उसने शुक्रवार की सुबह मुंह खोला। थानाध्यक्ष जेपी दुबे ने बताया कि आरोपी अजीत के खिलाफ दुष्कर्म, पॉक्सो व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज है। उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। 
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