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मूल्यांकन बहिष्कार पर जीजीआईसी में बुलानी पड़ी फोर्स
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 04 Apr 2016 12:02 AM IST
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जीजीआईसी में माध्यमिक शिक्षक संघ ने मूल्यांकन का विरोध किया।
- फोटो : रमेश मिश्र
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बस्ती। बकाए पारिश्रमिक का बजट वापस हो जाने से नाराज रसायन विज्ञान के परीक्षकों के मूल्यांकन बहिष्कार में माध्यमिक शिक्षक संघ भी शामिल हो गया। शर्मा गुट के शिक्षकों के बहिष्कार से रविवार को मूल्यांकन कार्य प्रभावित रहा। राजकीय गर्ल्स इंटर कालेज केंद्र पर स्थिति को संभालने के लिए प्रधानाचार्य को पुलिस फोर्स तक मंगानी पड़ी। माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष शिवपाल सिंह की अगुवाई में चारों केंद्रों पर जाकर डीआईओएस और प्रशासन विरोधी नारे लगाते हुए मूल्यांकन कार्य को बहिष्कार करने के लिए सभी परीक्षकों से अपील की। संगठन के जिलाध्यक्ष ने कहा कि सोमवार से पूरी तरह कार्य बहिष्कार कराने का निर्णय लिया गया, इसके लिए रणनीति बना ली गई है। हालांकि बहिष्कार का असर आंशिक रहा। मूल्यांकन के चौथे दिन भी रसायन विज्ञान के परीक्षकों ने कापियां नहीं जांचीं। गतिरोध को दूर करने के लिए प्रशासन और जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा कोई प्रयास नहीं किया गया। इसके चलते जो परीक्षक मूल्यांकन कर रहे थे उनमें भय का माहौल रहा।
मूल्यांकन शुरू होने के करीब एक घंटा बाद शर्मा गुट के पदाधिकारी केंद्रों पर पहुंचकर नारे बाजी करने लगे। सबसे पहले पदाधिकारी सक्सेरिया इंटर कालेज पहुंचे। उनके पहुंचते ही अफरातफरी का माहौल हो गया। परीक्षकों ने मूल्यांकन रोक दिया। उसके बाद पदाधिकारी राजकीय गर्ल्स इंटर कालेज और राजकीय इंटर कालेज पहुंचे, तब तक कई हजार कापियां जांची जा चुकी थीं। सबसे अंत में पदाधिकारी श्रीकृष्ण इंटर कालेज पहुंचे और नारेबाजी कर मूल्यांकन बंद कराया। शर्मा गुट के शिवपाल सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों का दावा है कि पचास फीसदी मूल्यांकन कार्य बाधित रहा। बहिष्कार की घोषणा के बाद भी प्रशासन और जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा केंद्रों पर कोई इंतजाम नहीं किया गया। बताया गया कि अधिकतर फोर्स चंगेरवा महोत्सव में लगी हुई है। हंगामें को देखते हुए जब राजकीय गर्ल्स इंटर कालेज की प्रभारी प्रधानाचार्या और अंग्रेजी की प्रवक्ता सबीहा मुमताज ने कोतवाली से फोर्स मांगी तो उन्हें काफी देर आद दो महिला होमगार्ड को सुरक्षा के लिए भेज दिया गया।
डीआईओएस और ट्रेजरी आॅफिस संदेह के घेरे में
बस्ती। जिस धन की वापसी के चलते मूल्यांकन कार्य बहिष्कार हो रहा है, उसके लिए शिक्षा विभाग और कोषागार विभाग के अधिकारी को जिम्मेदार ठहराने में लगे हैं। संयुक्त निदेशक शिक्षा एबी चतुर्वेदी ने बताया कि मूल्यांकन बकाए के मद में जो 27 लाख रुपये का बजट आया था, उसका बिल डीआईओएस ने ट्रेजरी में समय से भेज दिया था। मगर ट्रेजरी की देरी के चलते बजट वापस करना पड़ा। वहीं मुख्य कोषाधिकारी अशोक कुमार सिंह का कहना है कि डीआईओएस की ओर से ट्रेजरी में पहले रात दस बजे बिल प्रस्तुत किया गया, जब उनसे बिल को अनुमोदित कराकर लोड करने को कहा गया तो वे बिल लेकर वापस ही नहीं आए। हम लोगों ने रात 12 बजे तक इंतजार किया। फिर भी वह बिल अनुमोदित कराकर नहीं लाए। जिसके चलते बजट वापस चला गया। हांलाकि डीआईओएस कार्यालय के कुछ लोगों का कहना है कि बिल को पास कराने में सौदेबाजी हो रही थी, जिसके चलते समय ओवर हो गया। सीटीओ ने किसी भी सौदेबाजी के होने से इंकार किया।
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मूल्यांकन शुरू होने के करीब एक घंटा बाद शर्मा गुट के पदाधिकारी केंद्रों पर पहुंचकर नारे बाजी करने लगे। सबसे पहले पदाधिकारी सक्सेरिया इंटर कालेज पहुंचे। उनके पहुंचते ही अफरातफरी का माहौल हो गया। परीक्षकों ने मूल्यांकन रोक दिया। उसके बाद पदाधिकारी राजकीय गर्ल्स इंटर कालेज और राजकीय इंटर कालेज पहुंचे, तब तक कई हजार कापियां जांची जा चुकी थीं। सबसे अंत में पदाधिकारी श्रीकृष्ण इंटर कालेज पहुंचे और नारेबाजी कर मूल्यांकन बंद कराया। शर्मा गुट के शिवपाल सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों का दावा है कि पचास फीसदी मूल्यांकन कार्य बाधित रहा। बहिष्कार की घोषणा के बाद भी प्रशासन और जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा केंद्रों पर कोई इंतजाम नहीं किया गया। बताया गया कि अधिकतर फोर्स चंगेरवा महोत्सव में लगी हुई है। हंगामें को देखते हुए जब राजकीय गर्ल्स इंटर कालेज की प्रभारी प्रधानाचार्या और अंग्रेजी की प्रवक्ता सबीहा मुमताज ने कोतवाली से फोर्स मांगी तो उन्हें काफी देर आद दो महिला होमगार्ड को सुरक्षा के लिए भेज दिया गया।
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डीआईओएस और ट्रेजरी आॅफिस संदेह के घेरे में
बस्ती। जिस धन की वापसी के चलते मूल्यांकन कार्य बहिष्कार हो रहा है, उसके लिए शिक्षा विभाग और कोषागार विभाग के अधिकारी को जिम्मेदार ठहराने में लगे हैं। संयुक्त निदेशक शिक्षा एबी चतुर्वेदी ने बताया कि मूल्यांकन बकाए के मद में जो 27 लाख रुपये का बजट आया था, उसका बिल डीआईओएस ने ट्रेजरी में समय से भेज दिया था। मगर ट्रेजरी की देरी के चलते बजट वापस करना पड़ा। वहीं मुख्य कोषाधिकारी अशोक कुमार सिंह का कहना है कि डीआईओएस की ओर से ट्रेजरी में पहले रात दस बजे बिल प्रस्तुत किया गया, जब उनसे बिल को अनुमोदित कराकर लोड करने को कहा गया तो वे बिल लेकर वापस ही नहीं आए। हम लोगों ने रात 12 बजे तक इंतजार किया। फिर भी वह बिल अनुमोदित कराकर नहीं लाए। जिसके चलते बजट वापस चला गया। हांलाकि डीआईओएस कार्यालय के कुछ लोगों का कहना है कि बिल को पास कराने में सौदेबाजी हो रही थी, जिसके चलते समय ओवर हो गया। सीटीओ ने किसी भी सौदेबाजी के होने से इंकार किया।
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