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गोरखपुर में बवाल के बाद जेल में हाई अलर्ट

Thu, 13 Oct 2016 11:12 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती Updated Thu, 13 Oct 2016 11:12 PM IST
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Gorakhpur jail on high alert after the storm
जिला कारागार बस्ती।
गोरखपुर जेल में हिंसा व बंदियों के जेल में कब्जा कर लेने की खबर मिलते ही बस्ती कारागार में भी गेट से लेकर भीतर तक की सुरक्षा कड़ी कर दी गई। मार्च 2012 में बस्ती कारागार में हुआ बवाल जेल अफसरों के जेहन में ताजा हो गया। सावधानी बरतते हुए सभी गेट पर तलाशी शुरू करा दी गई। 
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मेरठ जेल से स्थानांतरित होकर आए तत्कालीन जेल अधीक्षक आरके केसरवानी ने एक मार्च 2012 को कारागार का चार्ज लेते ही शिकंजा कसना शुरू किया तो बंदी गुटबाजी पर उतर आए। उस समय धड़ल्ले से बैरकों में मोबाइल का इस्तेमाल हो रहा था। भनक लगने पर केसरवानी ने पूरी तरह से पाबंदी लगा दी। जिससे बंदी चिढ़ गए। दबंग बंदियों के अलग भोजन बनाने की प्रथा पर शिकंजा कसा दिया गया। बंदियों के आक्रोश में घी डालने का काम जेल के  कुछ बंदी रक्षकों ने किया था। असल में सुविधा देने के नाम पर हो रही मोटी कमाई अंदर कड़ाई होने से बंद हो गई थी। इसलिए बंदी भी चाहते थे कि बवाल हो जाएगा तो माहौल फिर से पहले जैसा हो जाएगा। यह बात अलग है कि बाद में जेल के भीतर बवाल का माहौल पैदा करने के दोषी जेल अधीक्षक पाए गए। रिपोर्ट में बताया गया कि उन्होंने बंदियों की पिटाई न कराई होती तो बगावत और आगजनी की नौबत ही नहीं आती।
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