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कर्मियों ने किया कार्य बहिष्कार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 08 May 2016 12:07 AM IST
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विकास भवन पर डीआरडीए के कर्मचारियों ने किया प्रर्दशन।
- फोटो : रमेश मिश्र
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बस्ती। सरकारी कर्मचारी घोषित करने की मांग को लेकर शनिवार को जिला ग्राम्य विकास विभाग के कर्मचारियों ने काला फीता बांधकर कार्य बहिष्कार किया। विभाग के कर्मियों, इंजीनियर आदि ने गेट मीटिंग की। डीआरडीए इंप्लाइज यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष और मंत्री के निर्देश पर कार्य बहिष्कार किया गया।
डीआरडीए इंप्लाइज यूनियन के महामंत्री इं.प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि डीआरडीए कर्मी पिछले 20 साल से सरकारी कर्मचारी घोषित करने और राजकीय कर्मियों की तरह अन्य सुविधाएं देने की मांग करते आ रहे हैं। 1999 में केंद्र ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि डीआरडीए कर्मियों को तीन से पांच साल के भीतर सरकारी विभागों में समायोजित कर दिया जाए। फिर भी राज्य सरकार ने कर्मियों का समायोजन नहीं किया। उसके बाद राज्य भर में धरना प्रदर्शन हुआ। इसे देखते हुए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाई पावर कमेटी बनी। कमेटी ने राज्य सरकार को पेंशन छोड़कर अन्य सरकारी सुविधाएं देने और इन्हें सरकारी कर्मचारी घोषित करने की सिफारिश की।
अभी 23 अप्रैल को कमेटी ने पुन: सरकार को शीघ्र ही डीआरडीए कर्मियों को सरकारी कर्मचारी घोषित करने की सिफारिश की। बताया कि बताया छह मई तक काला फीता बांधकर कार्य किया जाएगा। सात को कार्य बहिष्कार किया जाएगा और 10 मई को सामूहिक अवकाश लेकर लखनऊ में सीएम के आवास तक रैली निकाली जाएगी। गेट मीटिंग में जिलाध्यक्ष लालबहादुर, ज्ञानेश श्रीवास्तव, आदित्य वर्मा, विनय शुक्ल, वीके श्रीवास्तव, मुक्तिनाथ, राममिलन, राम आसरे, गुरुप्रसाद एवं राम जियावन आदि मौजूद रहे।
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डीआरडीए इंप्लाइज यूनियन के महामंत्री इं.प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि डीआरडीए कर्मी पिछले 20 साल से सरकारी कर्मचारी घोषित करने और राजकीय कर्मियों की तरह अन्य सुविधाएं देने की मांग करते आ रहे हैं। 1999 में केंद्र ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि डीआरडीए कर्मियों को तीन से पांच साल के भीतर सरकारी विभागों में समायोजित कर दिया जाए। फिर भी राज्य सरकार ने कर्मियों का समायोजन नहीं किया। उसके बाद राज्य भर में धरना प्रदर्शन हुआ। इसे देखते हुए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाई पावर कमेटी बनी। कमेटी ने राज्य सरकार को पेंशन छोड़कर अन्य सरकारी सुविधाएं देने और इन्हें सरकारी कर्मचारी घोषित करने की सिफारिश की।
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अभी 23 अप्रैल को कमेटी ने पुन: सरकार को शीघ्र ही डीआरडीए कर्मियों को सरकारी कर्मचारी घोषित करने की सिफारिश की। बताया कि बताया छह मई तक काला फीता बांधकर कार्य किया जाएगा। सात को कार्य बहिष्कार किया जाएगा और 10 मई को सामूहिक अवकाश लेकर लखनऊ में सीएम के आवास तक रैली निकाली जाएगी। गेट मीटिंग में जिलाध्यक्ष लालबहादुर, ज्ञानेश श्रीवास्तव, आदित्य वर्मा, विनय शुक्ल, वीके श्रीवास्तव, मुक्तिनाथ, राममिलन, राम आसरे, गुरुप्रसाद एवं राम जियावन आदि मौजूद रहे।
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