{"_id":"5a7de35c4f1c1ba0268b9441","slug":"drug-department-raids-on-drugstore","type":"story","status":"publish","title_hn":"दवा की दुकान पर ड्रग विभाग का छापा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
दवा की दुकान पर ड्रग विभाग का छापा
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती
Updated Fri, 09 Feb 2018 11:37 PM IST
विज्ञापन
रौता चौराहे पर दवा की दुकान की जांच करतीं डीआई सीमा।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बस्ती। शहर के रौता चौराहा स्थित भारतीय फार्मेसी पर शुक्रवार को ड्रग विभाग की टीम ने छापा मारकर यहां मौजूद अभिलेख खंगाले। दुकान में टीबी की दवाओं का कोई लेखा-जोखा नहीं मिला। यही नहीं दुकान बगैर फार्मासिस्ट के संचालित होते पाई गई। इन कमियों को गंभीरता से लेते हुए दुकान के क्रय विक्रय पर ड्रग इंस्पेक्टर सीमा वर्मा ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
ड्रग विभाग में एक व्यक्ति ने उक्त दुकान के संबंध में शिकायत दर्ज कराई कि वहां से एक्सपायरी दवाएं बिक रही हैं। उसे भी ऐसी ही एक दवा दी गई है। इसे गंभीरता से लेते हुए ड्रग इंसपेक्टर सीमा दोपहर बाद मय दलबल दुकान पर पहुंच गईं। यहां एक्सपायरी दवा के संबंध में जांच पड़ताल की, मगर दुकान में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला। इसके बाद निरीक्षक ने फार्मासिस्ट के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि वह दुकान पर नहीं हैं। दुकान के अभिलेख में स्पष्ट हुआ कि यहां से टीबी की दवाएं भी बेची जाती हैं। केंद्र सरकार टीबी को जड़ से मिटाने की दिशा में काम रही है। ऐसे में दवाओं के बिक्री से संबंधित सभी विवरण अभिलेख में दर्ज होने का निर्देश है, मगर यहां दवाएं तो मिलीं, लेकिन इसे किससे बेचा गया, किस डॉक्टर ने इसे लिखा था, इसका कोई अभिलेख नहीं मिला। इसके अलावा एच-1 की दवाएं दुकान में मिलीं जरूर मगर इसका भी कोई रिकॉर्ड दुकान स्वामी ने नहीं बनाया था।
ड्रग इंसपेक्टर सीमा ने उक्त की पुष्टि करते हुए कहा कि जांच के बाद दुकान के क्रय-विक्रय पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। जिस दवा की शिकायत की गई, उसके साक्ष्य नहीं मिल सकें। उन्होंने बताया कि पूछताछ में दुकान स्वामी ने शिकायतकर्ता को द्वेष वश आरोप लगाने की बात कही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ड्रग विभाग में एक व्यक्ति ने उक्त दुकान के संबंध में शिकायत दर्ज कराई कि वहां से एक्सपायरी दवाएं बिक रही हैं। उसे भी ऐसी ही एक दवा दी गई है। इसे गंभीरता से लेते हुए ड्रग इंसपेक्टर सीमा दोपहर बाद मय दलबल दुकान पर पहुंच गईं। यहां एक्सपायरी दवा के संबंध में जांच पड़ताल की, मगर दुकान में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला। इसके बाद निरीक्षक ने फार्मासिस्ट के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि वह दुकान पर नहीं हैं। दुकान के अभिलेख में स्पष्ट हुआ कि यहां से टीबी की दवाएं भी बेची जाती हैं। केंद्र सरकार टीबी को जड़ से मिटाने की दिशा में काम रही है। ऐसे में दवाओं के बिक्री से संबंधित सभी विवरण अभिलेख में दर्ज होने का निर्देश है, मगर यहां दवाएं तो मिलीं, लेकिन इसे किससे बेचा गया, किस डॉक्टर ने इसे लिखा था, इसका कोई अभिलेख नहीं मिला। इसके अलावा एच-1 की दवाएं दुकान में मिलीं जरूर मगर इसका भी कोई रिकॉर्ड दुकान स्वामी ने नहीं बनाया था।
विज्ञापन
ड्रग इंसपेक्टर सीमा ने उक्त की पुष्टि करते हुए कहा कि जांच के बाद दुकान के क्रय-विक्रय पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। जिस दवा की शिकायत की गई, उसके साक्ष्य नहीं मिल सकें। उन्होंने बताया कि पूछताछ में दुकान स्वामी ने शिकायतकर्ता को द्वेष वश आरोप लगाने की बात कही है।
विज्ञापन