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रहस्यमय ढंग से झुलसी महिला की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 28 Nov 2017 11:53 PM IST
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विलाप करतीं महिलाएं।
- फोटो : Amar Ujala
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परशुरामपुर। शादी के 12 वर्ष बाद रहस्यमय ढंग से झुलसी महिला की सोमवार रात मौत हो गई। जिला अस्पताल फैजाबाद में इलाज के दौरान उसके दम तोड़ने के बाद मायके वाले थाने जा पहुंचे। मां ने तहरीर दी,जिसमें दामाद और उसके पिता पर जिंदा जलाकर मार डालने का आरोप लगाया। पुलिस ने दोनों के विरुद्घ मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
चौरी निवासी सोमनाथ की इसी क्षेत्र के नरायनपुर की सुनीता से शादी के बाद उनके तीन बच्चे पैदा हुए। सोमनाथ दिल्ली रहकर प्राइवेट जॉब करता है। पुलिस की मानें तो पांच दिन पहले ही वह छुट्टी पर घर आया। 23 नवंबर को पति-पत्नी सात साल के बेटे के साथ कमरे में सोए थे।
आधी रात को अचानक आग लगने से सुनीता गंभीर रूप से झुलस गई। साथ में सो रहा बेटा और पति ने जान पर खेलकर आग बुझाने की कोशिश की लेकिन वे नाकाम रहे। सोमनाथ का भी हाथ झुलस गया। आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। एसओ रवि राय का कहना है कि मृतका की मां सुघरा ने तहरीर में दामाद सोमनाथ और समधी (दामाद के पिता) जगलाल पर जिंदा जलाने का आरोप लगाया।
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हत्या नहीं फिर भी धारा 302 लगा दी
पारिवारिक व क्रिमिनल अफेंस के जानकार अधिवक्ता अवधेश प्रताप सिंह का कहना है कि विवाह के सात वर्ष केे भीतर ही दहेज संबंधित केस बनते हैं। विवाहिता की मौत पर घरेलू हिंसा की धारा 304-बी और 3/4 डीपी एक्ट के तहत केस होगा। यदि विवाहित महिला की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हो तो धारा 306 अथवा हत्या यानी 302 आईपीसी के तहत मुकदमा होगा।
घायल की मृत्यु यदि 24 घंटे के भीतर हुई तो 302 और बाद में धारा 304 लगेगी। इस केस में हत्या का मुकदमा तो लिख लिया लेकिन विवेचना बिना तरमीम किए आगे नहीं बढ़ेगी। तब विवेचक को धारा 306 लगाना ही होगा। जिसमें अस्वाभाविक मौत के लिए जिम्मेदार माना जाता है।
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चौरी निवासी सोमनाथ की इसी क्षेत्र के नरायनपुर की सुनीता से शादी के बाद उनके तीन बच्चे पैदा हुए। सोमनाथ दिल्ली रहकर प्राइवेट जॉब करता है। पुलिस की मानें तो पांच दिन पहले ही वह छुट्टी पर घर आया। 23 नवंबर को पति-पत्नी सात साल के बेटे के साथ कमरे में सोए थे।
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आधी रात को अचानक आग लगने से सुनीता गंभीर रूप से झुलस गई। साथ में सो रहा बेटा और पति ने जान पर खेलकर आग बुझाने की कोशिश की लेकिन वे नाकाम रहे। सोमनाथ का भी हाथ झुलस गया। आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। एसओ रवि राय का कहना है कि मृतका की मां सुघरा ने तहरीर में दामाद सोमनाथ और समधी (दामाद के पिता) जगलाल पर जिंदा जलाने का आरोप लगाया।
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हत्या नहीं फिर भी धारा 302 लगा दी
पारिवारिक व क्रिमिनल अफेंस के जानकार अधिवक्ता अवधेश प्रताप सिंह का कहना है कि विवाह के सात वर्ष केे भीतर ही दहेज संबंधित केस बनते हैं। विवाहिता की मौत पर घरेलू हिंसा की धारा 304-बी और 3/4 डीपी एक्ट के तहत केस होगा। यदि विवाहित महिला की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हो तो धारा 306 अथवा हत्या यानी 302 आईपीसी के तहत मुकदमा होगा।
घायल की मृत्यु यदि 24 घंटे के भीतर हुई तो 302 और बाद में धारा 304 लगेगी। इस केस में हत्या का मुकदमा तो लिख लिया लेकिन विवेचना बिना तरमीम किए आगे नहीं बढ़ेगी। तब विवेचक को धारा 306 लगाना ही होगा। जिसमें अस्वाभाविक मौत के लिए जिम्मेदार माना जाता है।