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किसानों के बजाए पत्नी और बेटे के खाते में भेजा 88 लाख
basti
Updated Sat, 14 Oct 2017 11:11 PM IST
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बस्ती।
प्रधानमंत्री सिंचाई योजना में कृषि और गन्ना विभाग के नोडल उद्यान विभाग में पर ड्रॉप मोर क्राप में किसानों को स्प्रिंकलर एवं ड्रिप के नाम पर मिले 88 लाख रुपये से अधिक के गोलमाल में बड़ा खुलासा हुआ है। सिद्धार्थनगर का भी कार्यभार देख रहे जिला उद्यान अधिकारी मुन्ना यादव ने बताया कि बस्ती से अधिक सिद्धार्थनगर में इस योजना में घोटाला हुआ है। एक दिन की जांच में यह बात सामने आई है।
योजना के तहत साजिशकर्ताओं ने धन की बंदरबांट करने के लिए किसानों के बजाए अपने पत्नी और बेटे के खाते में अनुदान का धन भेज दिया। इस खेल में उप निदेशक उद्यान और जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय के कम से कम 10 कर्मचारी के शामिल होने की बात सामने आ रही है। अभी तक इस मामले सहायक उद्यान निरीक्षक मनोज कुमार श्रीवास्तव निलंबित हो चुके हैं और सामान की आपूर्ति करने वाली चंद्रा एग्रो टेक फर्म को काली सूची में डाल दिया गया है। विभाग इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। दो पूर्व डीएचओ पर कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव को डायरेक्टर ने पत्र लिखा है।
जिला उद्यान अधिकारी मुन्ना यादव ने बताया कि वर्ष 2015-16 में परशुरामपुर ब्लॉक के तरैनी मंसूरनगर में जिला भूमि संरक्षण अधिकारी कार्यालय की ओर से नमसा नामक योजना चलाई जा रही। इस गांव को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत वर्ष 2015-16 में भी चयन हुआ। ड्रिप और स्प्रिंगलर (फौव्वारा विधि) के लिए भूमि संरक्षण कार्यालय ने 131 किसानों की सूची उद्यान विभाग को उपलब्ध कराई। यहीं से गोलमाल शुरू हो गया। उद्यान विभाग के लोगों ने इसी सूची को आधार बनाकर 41 लाख से अधिक का फर्जी बिल बनाया। उसे रिकॉर्ड में यह दिखाने के लिए चस्पा कर दिया गया कि इन सभी किसानों को अनुदान दिया जा चुका है। उसके बाद घपलेबाजों ने विभाग के लगभग 10 कर्मियों की सूची बनाई और ट्रेजरी कार्यालय को भुगतान के लिए भेज दिया। ट्रेजरी ने भुगतान भी कर दिया। बताया कि जो बातें सामने आ रही है, उसमें कर्मियों के नाम पर तो धन भेजा ही गया उसके अतिरिक्त उनकी पत्नियों और बच्चों के नाम पर भी धन भेजा गया। वर्ष 2016-17 में इस योजना को 13 ब्लॉकों में लागू किया गया।
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पांच कंपनियों की डीलरशिप कैंसल
बस्ती।
प्रधानमंत्री सिंचाई योजना में 88 लाख रुपये अधिक के घोटाले की रिपोर्ट पर उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण के निदेशक एसपी जोशी ने धोखाधड़ी करने और फर्जी बिल बनाने के आरोप में देश के पांच कंपनियों का डीलरशिप कैंसल कर दिया है और इन्हें माइक्रोइरीगेशन के सभी कार्य से प्रतिबंधित कर भी दिया है।
जिला उद्यान अधिकारी मुन्ना यादव ने बताया कि डीएम अरविंद कुमार सिंह की रिपोर्ट पर निदेशक की ओर से जारी आदेश में जिन कंपनियों के डीलरशिप को कैंसल और कारोबार से प्रतिबंधित किया गया है, उनमें दिनेश इरीगेशन प्रा.लि. जयपुर, चंद्रा एग्रोटेक आवास विकास कॉलोनी बस्ती, एमटेल इंडिया लि. अहमदाबाद, हार्वेल एग्यूआ इंडिया प्रा. लि. नई दिल्ली, नागार्जुन फर्टिलाइजर एंड केमिकल लि. हैदराबाद तेलंगाना के नाम शामिल हैं।
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प्रधानमंत्री सिंचाई योजना में कृषि और गन्ना विभाग के नोडल उद्यान विभाग में पर ड्रॉप मोर क्राप में किसानों को स्प्रिंकलर एवं ड्रिप के नाम पर मिले 88 लाख रुपये से अधिक के गोलमाल में बड़ा खुलासा हुआ है। सिद्धार्थनगर का भी कार्यभार देख रहे जिला उद्यान अधिकारी मुन्ना यादव ने बताया कि बस्ती से अधिक सिद्धार्थनगर में इस योजना में घोटाला हुआ है। एक दिन की जांच में यह बात सामने आई है।
योजना के तहत साजिशकर्ताओं ने धन की बंदरबांट करने के लिए किसानों के बजाए अपने पत्नी और बेटे के खाते में अनुदान का धन भेज दिया। इस खेल में उप निदेशक उद्यान और जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय के कम से कम 10 कर्मचारी के शामिल होने की बात सामने आ रही है। अभी तक इस मामले सहायक उद्यान निरीक्षक मनोज कुमार श्रीवास्तव निलंबित हो चुके हैं और सामान की आपूर्ति करने वाली चंद्रा एग्रो टेक फर्म को काली सूची में डाल दिया गया है। विभाग इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। दो पूर्व डीएचओ पर कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव को डायरेक्टर ने पत्र लिखा है।
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जिला उद्यान अधिकारी मुन्ना यादव ने बताया कि वर्ष 2015-16 में परशुरामपुर ब्लॉक के तरैनी मंसूरनगर में जिला भूमि संरक्षण अधिकारी कार्यालय की ओर से नमसा नामक योजना चलाई जा रही। इस गांव को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत वर्ष 2015-16 में भी चयन हुआ। ड्रिप और स्प्रिंगलर (फौव्वारा विधि) के लिए भूमि संरक्षण कार्यालय ने 131 किसानों की सूची उद्यान विभाग को उपलब्ध कराई। यहीं से गोलमाल शुरू हो गया। उद्यान विभाग के लोगों ने इसी सूची को आधार बनाकर 41 लाख से अधिक का फर्जी बिल बनाया। उसे रिकॉर्ड में यह दिखाने के लिए चस्पा कर दिया गया कि इन सभी किसानों को अनुदान दिया जा चुका है। उसके बाद घपलेबाजों ने विभाग के लगभग 10 कर्मियों की सूची बनाई और ट्रेजरी कार्यालय को भुगतान के लिए भेज दिया। ट्रेजरी ने भुगतान भी कर दिया। बताया कि जो बातें सामने आ रही है, उसमें कर्मियों के नाम पर तो धन भेजा ही गया उसके अतिरिक्त उनकी पत्नियों और बच्चों के नाम पर भी धन भेजा गया। वर्ष 2016-17 में इस योजना को 13 ब्लॉकों में लागू किया गया।
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पांच कंपनियों की डीलरशिप कैंसल
बस्ती।
प्रधानमंत्री सिंचाई योजना में 88 लाख रुपये अधिक के घोटाले की रिपोर्ट पर उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण के निदेशक एसपी जोशी ने धोखाधड़ी करने और फर्जी बिल बनाने के आरोप में देश के पांच कंपनियों का डीलरशिप कैंसल कर दिया है और इन्हें माइक्रोइरीगेशन के सभी कार्य से प्रतिबंधित कर भी दिया है।
जिला उद्यान अधिकारी मुन्ना यादव ने बताया कि डीएम अरविंद कुमार सिंह की रिपोर्ट पर निदेशक की ओर से जारी आदेश में जिन कंपनियों के डीलरशिप को कैंसल और कारोबार से प्रतिबंधित किया गया है, उनमें दिनेश इरीगेशन प्रा.लि. जयपुर, चंद्रा एग्रोटेक आवास विकास कॉलोनी बस्ती, एमटेल इंडिया लि. अहमदाबाद, हार्वेल एग्यूआ इंडिया प्रा. लि. नई दिल्ली, नागार्जुन फर्टिलाइजर एंड केमिकल लि. हैदराबाद तेलंगाना के नाम शामिल हैं।