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दुष्कर्म के आरोपी को दस वर्ष की सजा
अमर उजाला ब्यूरो, बस्ती।
Updated Fri, 24 Feb 2017 12:05 AM IST
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सजा सुनाई
- फोटो : डेलीमेल
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विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट विद्या शंकर पटेल ने किशोरी को अगवाकर दुष्कर्म के मामले में आरोपी को 10 वर्ष कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 22 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। जुर्माना अदा न करने पर छह मास की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
विशेष लोक अभियोजक राजेंद्र शंकर द्विवेदी ने कोर्ट को बताया कि दुबौलिया थाना क्षेत्र के एक गांव के वादी ने रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें कहा गया कि उनके बहनोई श्यामू यादव निवासी अमौली चौराहा थाना परशुरामपुर 10 दिसंबर 2013 को उनके घर आया। तीन बजे बाइक पर बैठाकर उनकी 16 वर्षीय बेटी को सामान खरीदने के लिए बाजार ले गया, मगर लौटा नहीं। 27 दिसंबर 2014 को अमौली चौराहे के पास लड़की बरामद हुई। लड़की ने बताया कि श्यामू पहले उसे कानपुर, फिर दिल्ली ले गया और दुष्कर्म किया। फिर 25 मई को अपने घर ले आया। घर पर भी दुष्कर्म करता रहा। कोर्ट ने परीक्षण में लड़की को नाबालिक पाया।
हत्या में सगे भाइयों को सात साल की सजा
अपर सत्र न्यायाधीश इरफान अहमद ने गैर इरादतन हत्या के आरोपी को दोषी करार देते हुए तीन सगे भाइयों को सात-सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर 10-10 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। शासकीय अधिवक्ता लालजी यादव ने कोर्ट में बताया कि वादी कलवारी थाना क्षेत्र के बभनियावां के फूलचंद ने रिर्पोट दर्ज कराई, जिसमें रास्ते के विवाद को लेकर गांव के राजेश, राजेंद्र, बिट्टू उर्फ ओम प्रकाश एक राय होकर उनके बेटे देव नरायन की लाठी-डंडों से पीटकर घायल कर दिया था। घटना 30 अगस्त 2008 के सुबह छह की है। इलाज के दौरान देव नरायन की मृत्यु हो गई। गवाहों के बयान व सबूतों के आधार पर जज ने गैर इरादतन हत्या में दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
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हमले में चार वर्ष की सजा
अमर सत्र न्यायाधीश अजय कुमार शाही ने प्राणघातक हमले के आरोपी लल्लू सिंह को दोषी मानते हुए उसे चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके अतिरिक्त सात हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर चार माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। शासकीय अधिवक्ता अब्दुल समद ने कोर्ट को बताया कि वादी अनिल कुमार सिंह निवासी भदावल डड़वा थाना हरैया ने मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें कहा गया कि 13 दिसंबर 2005 को गांव के नेवासेदार लल्लू सिंह, शांती, कुमुद वादी के घर में घुसकर पिता को मारने-पीटने लगे। इससे उसके पिता को गंभीर चोटें आईं। गवाहों के बयान व सबूतों के आधार पर न्यायधीश ने लल्लू सिंह को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। वहीं राम मिलन सिंह, शांती सिंह, कुमुद सिंह को उन पर लगे आरोप से दोष मुक्त कर दिया।
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विशेष लोक अभियोजक राजेंद्र शंकर द्विवेदी ने कोर्ट को बताया कि दुबौलिया थाना क्षेत्र के एक गांव के वादी ने रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें कहा गया कि उनके बहनोई श्यामू यादव निवासी अमौली चौराहा थाना परशुरामपुर 10 दिसंबर 2013 को उनके घर आया। तीन बजे बाइक पर बैठाकर उनकी 16 वर्षीय बेटी को सामान खरीदने के लिए बाजार ले गया, मगर लौटा नहीं। 27 दिसंबर 2014 को अमौली चौराहे के पास लड़की बरामद हुई। लड़की ने बताया कि श्यामू पहले उसे कानपुर, फिर दिल्ली ले गया और दुष्कर्म किया। फिर 25 मई को अपने घर ले आया। घर पर भी दुष्कर्म करता रहा। कोर्ट ने परीक्षण में लड़की को नाबालिक पाया।
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हत्या में सगे भाइयों को सात साल की सजा
अपर सत्र न्यायाधीश इरफान अहमद ने गैर इरादतन हत्या के आरोपी को दोषी करार देते हुए तीन सगे भाइयों को सात-सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर 10-10 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। शासकीय अधिवक्ता लालजी यादव ने कोर्ट में बताया कि वादी कलवारी थाना क्षेत्र के बभनियावां के फूलचंद ने रिर्पोट दर्ज कराई, जिसमें रास्ते के विवाद को लेकर गांव के राजेश, राजेंद्र, बिट्टू उर्फ ओम प्रकाश एक राय होकर उनके बेटे देव नरायन की लाठी-डंडों से पीटकर घायल कर दिया था। घटना 30 अगस्त 2008 के सुबह छह की है। इलाज के दौरान देव नरायन की मृत्यु हो गई। गवाहों के बयान व सबूतों के आधार पर जज ने गैर इरादतन हत्या में दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
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हमले में चार वर्ष की सजा
अमर सत्र न्यायाधीश अजय कुमार शाही ने प्राणघातक हमले के आरोपी लल्लू सिंह को दोषी मानते हुए उसे चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके अतिरिक्त सात हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर चार माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। शासकीय अधिवक्ता अब्दुल समद ने कोर्ट को बताया कि वादी अनिल कुमार सिंह निवासी भदावल डड़वा थाना हरैया ने मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें कहा गया कि 13 दिसंबर 2005 को गांव के नेवासेदार लल्लू सिंह, शांती, कुमुद वादी के घर में घुसकर पिता को मारने-पीटने लगे। इससे उसके पिता को गंभीर चोटें आईं। गवाहों के बयान व सबूतों के आधार पर न्यायधीश ने लल्लू सिंह को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। वहीं राम मिलन सिंह, शांती सिंह, कुमुद सिंह को उन पर लगे आरोप से दोष मुक्त कर दिया।