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Basti News: झांसे में आकर गंवा रहीं अस्मत, उछाल रहीं परिजनों की पगड़ी
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बस्ती। हसीन जिंदगी का सब्जबाग दिखाकर युवतियों और किशोरियों की अस्मत से खेलने का शगल बढ़ता जा रहा है। शायद ही कोई ऐसा दिन हो जब जिले के किसी न किसी थाने में इस तरह के केस दर्ज न हो रहे हों। किसी को छह महीने तक झांसा देकर छला गया तो किसी के साथ साल-दो साल तक अंधेरे में रखकर मनमानी की गई।
कई युवतियां व किशोरियां झांसे में आकर अपना घर छोड़कर भी भागने में संकोच नहीं करतीं। वह भूल जाती हैं कि उनके इस कदम से परिवार वालों पर क्या बीतेगी। परिवार की पगड़ी उछालते देर न करने वाली नई पीढ़ी की करतूत से माता-पिता ही नहीं, सगे संबंधी भी शर्मसार हैं।
आकड़ों की बात करें तो छह महीने में ऐसे 47 मामले पुलिस के पास पहुंचे हैं। इनमें 21 मामले ऐसे हैं, जिनमें पीड़िताओं ने खुद थाने पहुंचकर प्रार्थनापत्र दिया है कि शादी का झांसा देकर उनके साथ दुष्कर्म किया गया। जब उसने शादी का दबाव बनाया तो उसका कथित प्रेमी या दोस्त मुकर गया। यहां तक कि अपशब्द कहने, मारपीट और धमकी देने तक के आरोप लगाती हैं। इनमें पांच मामले तो ऐसे आए जिनमें पीड़िता गर्भवती हो गई और उसे गर्भपात कराने के लिए प्रताड़ित किया गया।
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परिजनों ने दर्ज कराए भगा ले जाने के केस
छह महीने में किशोरी व युवती को भगा ले जाने के 22 मामले सामने आए। इनमें 16 प्रकरण ऐसे हैं, जिनमें आरोपी काे गिरफ्तार करके पीड़िता को उसके चंगुल से छुड़ाया गया।
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किशोरियों के मामले सबसे पीड़ादायक
परिवार के लिए किशोरियों के मामले सबसे ज्यादा समस्या खड़ी करते हैं। अधिवक्ता अखिलेश बताते हैं कि किशोरियों के घर से भाग जाने के बाद परिवार के लोगों को सबसे ज्यादा जिल्लत झेलनी पड़ती है। कम उम्र में अपनी अस्मत गंवा देने का दंश परिवार को भुगतना पड़ता है। पुलिस के पकड़कर लाने के बाद उन किशोरियों को अपनाने की उनकी मजबूरी होती है। ऐसा न करने पर उन्हें नारी निकेतन भेजा जाता है।
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अपनी दुनिया में खोई रहती है नई पीढ़ी
समाजशास्त्री डाॅ. रघुवर पांडेय बताते हैं कि मौजूदा सामाजिक परिवेश में स्वच्छंद मानसिकता को काफी बढ़ावा मिलने लगा है। मोबाइल-इंटरनेट ने सामाजिक मान्यताओं और मर्यादाओं को काफी नुकसान पहुंचाया है। पारिवारिक जिंदगी से कटकर नई पीढ़ी अपनी अलग दुनिया में खोई रहती है। जहां दोस्त बनाने का कल्चर काफी बढ़ गया है। विकृत मानसिकता के लोग इसी कमजोरी का फायदा उठाकर इस तरह की हरकत करते हैं। ऐसे में परिवार वालों को काफी सजग रहने की जरूरत होती है।
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कई युवतियां व किशोरियां झांसे में आकर अपना घर छोड़कर भी भागने में संकोच नहीं करतीं। वह भूल जाती हैं कि उनके इस कदम से परिवार वालों पर क्या बीतेगी। परिवार की पगड़ी उछालते देर न करने वाली नई पीढ़ी की करतूत से माता-पिता ही नहीं, सगे संबंधी भी शर्मसार हैं।
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आकड़ों की बात करें तो छह महीने में ऐसे 47 मामले पुलिस के पास पहुंचे हैं। इनमें 21 मामले ऐसे हैं, जिनमें पीड़िताओं ने खुद थाने पहुंचकर प्रार्थनापत्र दिया है कि शादी का झांसा देकर उनके साथ दुष्कर्म किया गया। जब उसने शादी का दबाव बनाया तो उसका कथित प्रेमी या दोस्त मुकर गया। यहां तक कि अपशब्द कहने, मारपीट और धमकी देने तक के आरोप लगाती हैं। इनमें पांच मामले तो ऐसे आए जिनमें पीड़िता गर्भवती हो गई और उसे गर्भपात कराने के लिए प्रताड़ित किया गया।
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परिजनों ने दर्ज कराए भगा ले जाने के केस
छह महीने में किशोरी व युवती को भगा ले जाने के 22 मामले सामने आए। इनमें 16 प्रकरण ऐसे हैं, जिनमें आरोपी काे गिरफ्तार करके पीड़िता को उसके चंगुल से छुड़ाया गया।
किशोरियों के मामले सबसे पीड़ादायक
परिवार के लिए किशोरियों के मामले सबसे ज्यादा समस्या खड़ी करते हैं। अधिवक्ता अखिलेश बताते हैं कि किशोरियों के घर से भाग जाने के बाद परिवार के लोगों को सबसे ज्यादा जिल्लत झेलनी पड़ती है। कम उम्र में अपनी अस्मत गंवा देने का दंश परिवार को भुगतना पड़ता है। पुलिस के पकड़कर लाने के बाद उन किशोरियों को अपनाने की उनकी मजबूरी होती है। ऐसा न करने पर उन्हें नारी निकेतन भेजा जाता है।
अपनी दुनिया में खोई रहती है नई पीढ़ी
समाजशास्त्री डाॅ. रघुवर पांडेय बताते हैं कि मौजूदा सामाजिक परिवेश में स्वच्छंद मानसिकता को काफी बढ़ावा मिलने लगा है। मोबाइल-इंटरनेट ने सामाजिक मान्यताओं और मर्यादाओं को काफी नुकसान पहुंचाया है। पारिवारिक जिंदगी से कटकर नई पीढ़ी अपनी अलग दुनिया में खोई रहती है। जहां दोस्त बनाने का कल्चर काफी बढ़ गया है। विकृत मानसिकता के लोग इसी कमजोरी का फायदा उठाकर इस तरह की हरकत करते हैं। ऐसे में परिवार वालों को काफी सजग रहने की जरूरत होती है।