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Basti News: रॉयल इनफील्ड एजेंसी ग्राहक को देगी एक लाख रुपये क्षतिपूर्ति
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बस्ती। उपभोक्ता अदालत के अध्यक्ष न्यायाधीश अमरजीत वर्मा ने ग्राहक से रुपये लेने के बाद बुलेट बाइक का पंजीकरण न कराने वाली फर्म को 60 दिनों में पंजीयन कराकर प्रमाणपत्र देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही न्यायाधीश ने एक लाख बीस हजार रुपये विभिन्न मदों में क्षतिपूर्ति देने का भी आदेश दिया है।
दुबौलिया थाना क्षेत्र के बैरागल निवासी मो. शाहबाज ने अधिवक्ता के जरिए न्यायालय में वाद दाखिल कर बताया कि पुरानी बस्ती क्षेत्र में स्थित न्यू इंडिया मर्चेंट रॉयल इनफील्ड सर्विस डिडवहा पचपेड़िया रोड स्थित एजेंसी से 1,85,144 रुपये देकर बुलेट खरीदी थी, जिसका पंजीयन शुल्क अलग से 15,691 रुपये व अतिरिक्त 600 रुपये फर्म काे भुगतान किया। इसके बावजूद गाड़ी का पंजीकरण नहीं कराया गया। 10 सितंबर 2020 को उपभोक्ता के अधिवक्ता ने विधिक नोटिस दिया तो उसके जवाब में विपक्षी फर्म ने कहा कि 14 सितंबर तक पंजीयन प्रमाणपत्र दे दिया, लेकिन, फर्म ने प्रमाणपत्र नहीं दिया।
विवश होकर के पीड़ित ने न्यायालय में मुकदमा दाखिल किया, जिसमें विपक्षी को नोटिस जारी किया गया। सुनवाई के समय विपक्षी उपस्थित नहीं हुए। शिकायतकर्ता के अधिवक्ता को सुनने के बाद अदालत ने 60 दिनों में पंजीयन प्रमाणपत्र देने का आदेश फर्म को दिया और एक लाख रुपये शारीरिक पीड़ा व आर्थिक क्षति के एवज में 15 हजार रुपये, अधिवक्ता शुल्क के रूप में पांच हजार रुपये भुगतान करने का आदेश न्यायालय ने फर्म को दिया है।
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दुबौलिया थाना क्षेत्र के बैरागल निवासी मो. शाहबाज ने अधिवक्ता के जरिए न्यायालय में वाद दाखिल कर बताया कि पुरानी बस्ती क्षेत्र में स्थित न्यू इंडिया मर्चेंट रॉयल इनफील्ड सर्विस डिडवहा पचपेड़िया रोड स्थित एजेंसी से 1,85,144 रुपये देकर बुलेट खरीदी थी, जिसका पंजीयन शुल्क अलग से 15,691 रुपये व अतिरिक्त 600 रुपये फर्म काे भुगतान किया। इसके बावजूद गाड़ी का पंजीकरण नहीं कराया गया। 10 सितंबर 2020 को उपभोक्ता के अधिवक्ता ने विधिक नोटिस दिया तो उसके जवाब में विपक्षी फर्म ने कहा कि 14 सितंबर तक पंजीयन प्रमाणपत्र दे दिया, लेकिन, फर्म ने प्रमाणपत्र नहीं दिया।
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विवश होकर के पीड़ित ने न्यायालय में मुकदमा दाखिल किया, जिसमें विपक्षी को नोटिस जारी किया गया। सुनवाई के समय विपक्षी उपस्थित नहीं हुए। शिकायतकर्ता के अधिवक्ता को सुनने के बाद अदालत ने 60 दिनों में पंजीयन प्रमाणपत्र देने का आदेश फर्म को दिया और एक लाख रुपये शारीरिक पीड़ा व आर्थिक क्षति के एवज में 15 हजार रुपये, अधिवक्ता शुल्क के रूप में पांच हजार रुपये भुगतान करने का आदेश न्यायालय ने फर्म को दिया है।
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