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नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को दस साल की कारावास
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नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को दस साल की सजा
बस्ती। अपर सत्र न्यायाधीश (पंचम) मनमीत सिंह सूरी की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म और पॉक्सो के मामले में दोषी को दस साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने 40 हजार रुपये का अर्थदंड लगाते हुए कहा कि इसे न अदा करने पर अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी पड़ेगी।
विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो कमलेश कुमार चौधरी ने अदालत के समक्ष घटना का विवरण रखते हुए कहा कि नगर थानाक्षेत्र के एक गांव की पीड़िता के पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई। उसके अनुसार 24 फरवरी-2015 की शाम करीब 4:30 बजे उनकी आठ वर्षीय दिव्यांग बेटी को गांव के ही संजय चौहान बहला-फुसला कर सिवान में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। बेटी के रोने की आवाज सुनकर खेत में काम कर रहे एक किसान उसके पास पहुंचे। उसे देखकर आरोपी गंभीर हालत में किशोरी को छोड़कर भाग। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने दुष्कर्म व पॉक्सो के तहत मुकदमा दर्ज किया। मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान के आधार पर विवेचक ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। अभियोजन की ओर से वादी व पीड़िता सहित सात गवाहों के बयान हुए। पीड़िता का बयान दिव्यांग सशक्तिकरण विशेषज्ञों की मौजूदगी में लिया गया। बचाव पक्ष ने झूठा फंसाने की बात कही। फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि समाज में इस प्रकार की घटनाएं बढ़ रही हैं। इस पर न्यायालय के माध्यम कठोर कार्रवाई की जानी जरूरी है।
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बस्ती। अपर सत्र न्यायाधीश (पंचम) मनमीत सिंह सूरी की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म और पॉक्सो के मामले में दोषी को दस साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने 40 हजार रुपये का अर्थदंड लगाते हुए कहा कि इसे न अदा करने पर अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी पड़ेगी।
विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो कमलेश कुमार चौधरी ने अदालत के समक्ष घटना का विवरण रखते हुए कहा कि नगर थानाक्षेत्र के एक गांव की पीड़िता के पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई। उसके अनुसार 24 फरवरी-2015 की शाम करीब 4:30 बजे उनकी आठ वर्षीय दिव्यांग बेटी को गांव के ही संजय चौहान बहला-फुसला कर सिवान में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। बेटी के रोने की आवाज सुनकर खेत में काम कर रहे एक किसान उसके पास पहुंचे। उसे देखकर आरोपी गंभीर हालत में किशोरी को छोड़कर भाग। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने दुष्कर्म व पॉक्सो के तहत मुकदमा दर्ज किया। मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान के आधार पर विवेचक ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। अभियोजन की ओर से वादी व पीड़िता सहित सात गवाहों के बयान हुए। पीड़िता का बयान दिव्यांग सशक्तिकरण विशेषज्ञों की मौजूदगी में लिया गया। बचाव पक्ष ने झूठा फंसाने की बात कही। फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि समाज में इस प्रकार की घटनाएं बढ़ रही हैं। इस पर न्यायालय के माध्यम कठोर कार्रवाई की जानी जरूरी है।
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