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Basti News: पड़ोसियों के तानों ने तराशा...मेहनत से बनीं नेशनल खिलाड़ी
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नेशनल हैंडबॉल खिलाड़ी रेशमा यादव
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। वाराणसी की रहने वाली नेशनल खिलाड़ी रेशमा यादव (20) देश में होने वाली हैंडबॉल की कोई ऐसी प्रतियोगिता नहीं बची है, जिसमें हिस्सा न लिया हो। अब तक वह नौ स्वर्ण, 14 कांस्य और 18 रजत पदक अपने नाम कर चुकी हैं। वह भी देश के लिए खेलने का सपना पाले हुए हैं। इसी ललक में कोच तरुण कुमार के नेतृत्व में रोजाना पांच से छह घंटे तक प्रैक्टिस करती हैं।
उसका कहना है कि जब उसने हैंडबॉल की प्रैक्टिस शुरू की तो पड़ोसी ताने मारते थे, जब नेशनल लेबल पर चमक गईं तो वही प्रशंसा करते चूक नहीं रहे हैं।
बस्ती में चल रही राज्य स्तरीय महिला हैंडबॉल प्रतियोगिता में वाराणसी मंडल की टीम की तरफ से खेलने आई रेशमा ने शुक्रवार को बातचीत में बताया कि उसके पापा शिव पूजन यादव पहलवान हैं। वह तीन बहन और एक भाई है। मां गृहिणी हैं।
बताया कि 15 साल की उम्र में जब उसने वाराणसी के विकास इंटर कॉलेज में हैंडबॉल की प्रैक्टिस शुरू की पड़ोसी तरह-तरह की बातें करते थे, मगर वह लक्ष्य से विचलित नहीं हुई और प्रैक्टिस जारी रखा। उसने अपने पहले राष्ट्रीय स्तर के मैच की शुरुआत 2019 में सब जूनियर चैंपियनशिप से की, फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की स्नातक की छात्रा के साथ ही रेशमा राष्ट्रीय स्तर पर हैंडबॉल में अपना जलवा भी बिखेर रही हैं। उसने बताया कि वह अब तक आठ बार नेशनल चैंपियनशिप, तीन बार फेडरेशन, दो बार ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट खेल चुकी हैं। सब जूनियर और जूनियर चैंपियनशिप में कई बार अपनी खेल का लोहा मनवा चुकी हैं।
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बस्ती। वाराणसी की रहने वाली नेशनल खिलाड़ी रेशमा यादव (20) देश में होने वाली हैंडबॉल की कोई ऐसी प्रतियोगिता नहीं बची है, जिसमें हिस्सा न लिया हो। अब तक वह नौ स्वर्ण, 14 कांस्य और 18 रजत पदक अपने नाम कर चुकी हैं। वह भी देश के लिए खेलने का सपना पाले हुए हैं। इसी ललक में कोच तरुण कुमार के नेतृत्व में रोजाना पांच से छह घंटे तक प्रैक्टिस करती हैं।
उसका कहना है कि जब उसने हैंडबॉल की प्रैक्टिस शुरू की तो पड़ोसी ताने मारते थे, जब नेशनल लेबल पर चमक गईं तो वही प्रशंसा करते चूक नहीं रहे हैं।
बस्ती में चल रही राज्य स्तरीय महिला हैंडबॉल प्रतियोगिता में वाराणसी मंडल की टीम की तरफ से खेलने आई रेशमा ने शुक्रवार को बातचीत में बताया कि उसके पापा शिव पूजन यादव पहलवान हैं। वह तीन बहन और एक भाई है। मां गृहिणी हैं।
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बताया कि 15 साल की उम्र में जब उसने वाराणसी के विकास इंटर कॉलेज में हैंडबॉल की प्रैक्टिस शुरू की पड़ोसी तरह-तरह की बातें करते थे, मगर वह लक्ष्य से विचलित नहीं हुई और प्रैक्टिस जारी रखा। उसने अपने पहले राष्ट्रीय स्तर के मैच की शुरुआत 2019 में सब जूनियर चैंपियनशिप से की, फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की स्नातक की छात्रा के साथ ही रेशमा राष्ट्रीय स्तर पर हैंडबॉल में अपना जलवा भी बिखेर रही हैं। उसने बताया कि वह अब तक आठ बार नेशनल चैंपियनशिप, तीन बार फेडरेशन, दो बार ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट खेल चुकी हैं। सब जूनियर और जूनियर चैंपियनशिप में कई बार अपनी खेल का लोहा मनवा चुकी हैं।