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Basti News: सहकारी समितियों पर ताला, खाद-बीज का संकट गहराया
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बस्ती। सचिवों और कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार से जिले की 121 साधन सहकारी समितियों पर ताले लटक गए हैं। रबी की फसलों की बोआई के लिए खाद-बीज का इंतजाम करने में किसानों को परेशानी होगी। किसानों का कहना है कि जल्द हड़ताल वापस नहीं हुई तो खाद-बीज का संकट गहरा सकता है।
कर्मचारियों ने कमीशन व्यवस्था समाप्त कर राज्यकोष से वेतन की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया है। मांगें पूरी होने तक कार्य बहिष्कार जारी रखने की चेतावनी दी है। जिले में सहकारी समितियों पर 300 से अधिक सचिव और कर्मचारी तैनात हैं। संगठन के अध्यक्ष दिनेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि कार्य बहिष्कार के चलते समितियों का कामकाज बंद है। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें पूर्व की तरह राज्यकोष से वेतन दिया जाए और कमीशन व्यवस्था समाप्त की जाए। मांगें पूरी होने तक खाद-बीज का उठान और वितरण नहीं किया जाएगा। किसान परमात्मा प्रसाद, कक्कू और राधेश्याम ने बताया कि रबी सीजन की बोआई के लिए खाद और बीज अभी से जरूरत है, मगर समितियों पर हड़ताल के चलते परेशानी हुई।
बोआई के सीजन में बढ़ीं किसानों की मुश्किलें
दुबौलिया संवाद के अनुसार, ब्लॉक की सात समितियों बी-पैक्स समौड़ा, महुआडाड़, भरुकहवा, सूदीपुर, बैरागल, पारा और दुबौलिया पर कामकाज ठप है। वहीं, परशुरामपुर ब्लॉक की 12 बहुउद्देशीय सहकारी समितियों में भी हड़ताल का असर पड़ने की आशंका है। एडीओ कोऑपरेटिव विजय कुमार वर्मा ने बताया कि हड़ताल अनिश्चितकालीन है। एक नवंबर से धान खरीद शुरू होनी है। हड़ताल जारी रहने पर खरीद प्रभावित हो सकती है। बनकटी संवाद के अनुसार, क्षेत्र की खोरिया, बसौढ़ी, महथा, सजहरा, सजनाखोर और चिताखोर समेत कई समितियों पर ताले लटके रहे। किसान यूरिया और डीएपी के लिए समितियों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन खाद नहीं मिली। कलवारी संवाद के अनुसार, बहादुरपुर ब्लॉक की बी-पैक्स लिमिटेड कलवारी भी बंद रही। समिति के सचिव विचित्र मणि वर्मा ने बताया कि वेतन संबंधी समस्याओं को लेकर वह लखनऊ के ईको गार्डन में चल रहे धरने में शामिल हैं। मांगें पूरी नहीं होने पर उर्वरक वितरण ठप रखने की चेतावनी दी। गौर संवाद के अनुसार, ब्लॉक की सभी 13 सहकारी समितियों पर भी कार्य बहिष्कार के कारण ताले लटके रहे। इस समय किसान सरसों, मटर, चना, धनिया, लहसुन और आलू की बोआई की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में खाद-बीज की उपलब्धता प्रभावित होने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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कोट:::
कर्मचारियों की मांगों की जानकारी शासन को भेज दी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही कर्मचारी काम पर लौटेंगे। किसानों को खाद-बीज के लिए परेशानी न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जा रहा है। -रविशंकर, एआर कोऑपरेटिव
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कर्मचारियों ने कमीशन व्यवस्था समाप्त कर राज्यकोष से वेतन की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया है। मांगें पूरी होने तक कार्य बहिष्कार जारी रखने की चेतावनी दी है। जिले में सहकारी समितियों पर 300 से अधिक सचिव और कर्मचारी तैनात हैं। संगठन के अध्यक्ष दिनेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि कार्य बहिष्कार के चलते समितियों का कामकाज बंद है। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें पूर्व की तरह राज्यकोष से वेतन दिया जाए और कमीशन व्यवस्था समाप्त की जाए। मांगें पूरी होने तक खाद-बीज का उठान और वितरण नहीं किया जाएगा। किसान परमात्मा प्रसाद, कक्कू और राधेश्याम ने बताया कि रबी सीजन की बोआई के लिए खाद और बीज अभी से जरूरत है, मगर समितियों पर हड़ताल के चलते परेशानी हुई।
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बोआई के सीजन में बढ़ीं किसानों की मुश्किलें
दुबौलिया संवाद के अनुसार, ब्लॉक की सात समितियों बी-पैक्स समौड़ा, महुआडाड़, भरुकहवा, सूदीपुर, बैरागल, पारा और दुबौलिया पर कामकाज ठप है। वहीं, परशुरामपुर ब्लॉक की 12 बहुउद्देशीय सहकारी समितियों में भी हड़ताल का असर पड़ने की आशंका है। एडीओ कोऑपरेटिव विजय कुमार वर्मा ने बताया कि हड़ताल अनिश्चितकालीन है। एक नवंबर से धान खरीद शुरू होनी है। हड़ताल जारी रहने पर खरीद प्रभावित हो सकती है। बनकटी संवाद के अनुसार, क्षेत्र की खोरिया, बसौढ़ी, महथा, सजहरा, सजनाखोर और चिताखोर समेत कई समितियों पर ताले लटके रहे। किसान यूरिया और डीएपी के लिए समितियों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन खाद नहीं मिली। कलवारी संवाद के अनुसार, बहादुरपुर ब्लॉक की बी-पैक्स लिमिटेड कलवारी भी बंद रही। समिति के सचिव विचित्र मणि वर्मा ने बताया कि वेतन संबंधी समस्याओं को लेकर वह लखनऊ के ईको गार्डन में चल रहे धरने में शामिल हैं। मांगें पूरी नहीं होने पर उर्वरक वितरण ठप रखने की चेतावनी दी। गौर संवाद के अनुसार, ब्लॉक की सभी 13 सहकारी समितियों पर भी कार्य बहिष्कार के कारण ताले लटके रहे। इस समय किसान सरसों, मटर, चना, धनिया, लहसुन और आलू की बोआई की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में खाद-बीज की उपलब्धता प्रभावित होने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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कर्मचारियों की मांगों की जानकारी शासन को भेज दी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही कर्मचारी काम पर लौटेंगे। किसानों को खाद-बीज के लिए परेशानी न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जा रहा है। -रविशंकर, एआर कोऑपरेटिव