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Basti News: अस्पताल परिसर में खुलेंगे कंट्रोल रूम... आईसीएसएच कमेटी होगी गठित
Fri, 04 Oct 2024 03:48 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 04 Oct 2024 03:48 AM IST
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सरकारी अस्पतालों में महिला स्टॉफ की सुरक्षा के लिए मुख्य सचिव का आया फरमान
रात के समय सुरक्षा अधिकारी करेंगे औचक निरीक्षण, 24 घंटे सक्रिय रहेगा कंट्रोल रूम
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सरकारी अस्पताल छोटे हों या बड़े हर जगह महिला चिकित्सक एवं स्टाॅफ के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाएंगे। मुख्य सचिव के फरमान के बाद इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। पीएचसी, सीएचसी से लेकर जिला एवं मेडिकल कॉलेज स्तर के प्रत्येक अस्पताल में कंट्राेल रूम खोले जाएंगे। यह 24 घंटे सक्रिय रहेंगे। इसके अलावा आंतरिक यौन उत्पीड़न समिति (आईसीएसएच) का गठन किया जाएगा।
कोलकाता की आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला रेजिडेंट के साथ हुई हैवानियत की घटना के बाद से अस्पतालों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा गार्ड एवं तीमारदारों के पहचान पत्र बनाने की व्यवस्था अधिकतर जगहों पर की जा चुकी है। अस्पताल के अंदर प्रकाश की भी व्यवस्था भी दुरुस्त कराई जा रही है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शासन ने सुरक्षा की दृष्टि से नई व्यवस्था भी बनाने का फरमान सुनाया है।
अभी सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मियों के सुरक्षा के लिए कंट्रोल रूम की व्यवस्था नहीं थी। अब सभी अस्पतालों में कंट्रोल रूम खुलेंगे। यह 24 घंटे सक्रिय रखे जाएंगे। ताकि कोई भी कर्मचारी असुरक्षित होने पर तत्काल सूचना देकर मदद ले सकें। रात के समय पुलिस अधिकारियों को संबंधित क्षेत्र के सरकारी अस्पताल का निरीक्षण करना होगा। अस्पताल में आंतरिक यौन उत्पीड़न समिति भी गठित की जाएगी। महिला चिकित्सक और स्टॉफ के साथ समिति बैठक कर फीड बैक प्राप्त करेगी।
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ठेका और आउटसोर्स कर्मियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य
सरकारी अस्पतालों में एनएचएम एवं स्वास्थ्य विभाग के अधीन नियुक्त ठेका या आउटसोर्स कर्मियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। विवरण में इनके चरित्र का भी उल्लेख होगा। यदि पुलिस सत्यापन में आपराधिक प्रवृत्ति के होने की पुष्टि हुई तो ऐसे लोगों को सेवा नहीं रखा जाएगा।
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अस्पताल प्रभारी दर्ज कराएंगे केस
नई व्यवस्था के तहत यदि अस्पताल के भीतर किसी डॉक्टर या कर्मचारी के साथ हिंसा की कोई घटना होगी तो इससे संबंधित केस अस्पताल प्रभारी ही दर्ज कराएंगे। पीड़ित को केस दर्ज कराने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। इसे संस्थागत एफआईआर का नाम दिया गया है। इस व्यवस्था से पीड़ित स्टॉफ तनाव से मुक्त रहेगा।
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कोट
अस्पतालों की सुरक्षा को लेकर मुख्य सचिव की नई गाइडलाइन प्राप्त हुई है। इसके अनुपालन के लिए सभी अस्पताल के प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं। सभी बिंदुओं पर जल्द ही कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी।
-डॉ. आरएस दुबे, सीएमओ
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रात के समय सुरक्षा अधिकारी करेंगे औचक निरीक्षण, 24 घंटे सक्रिय रहेगा कंट्रोल रूम
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सरकारी अस्पताल छोटे हों या बड़े हर जगह महिला चिकित्सक एवं स्टाॅफ के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाएंगे। मुख्य सचिव के फरमान के बाद इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। पीएचसी, सीएचसी से लेकर जिला एवं मेडिकल कॉलेज स्तर के प्रत्येक अस्पताल में कंट्राेल रूम खोले जाएंगे। यह 24 घंटे सक्रिय रहेंगे। इसके अलावा आंतरिक यौन उत्पीड़न समिति (आईसीएसएच) का गठन किया जाएगा।
कोलकाता की आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला रेजिडेंट के साथ हुई हैवानियत की घटना के बाद से अस्पतालों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा गार्ड एवं तीमारदारों के पहचान पत्र बनाने की व्यवस्था अधिकतर जगहों पर की जा चुकी है। अस्पताल के अंदर प्रकाश की भी व्यवस्था भी दुरुस्त कराई जा रही है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शासन ने सुरक्षा की दृष्टि से नई व्यवस्था भी बनाने का फरमान सुनाया है।
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अभी सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मियों के सुरक्षा के लिए कंट्रोल रूम की व्यवस्था नहीं थी। अब सभी अस्पतालों में कंट्रोल रूम खुलेंगे। यह 24 घंटे सक्रिय रखे जाएंगे। ताकि कोई भी कर्मचारी असुरक्षित होने पर तत्काल सूचना देकर मदद ले सकें। रात के समय पुलिस अधिकारियों को संबंधित क्षेत्र के सरकारी अस्पताल का निरीक्षण करना होगा। अस्पताल में आंतरिक यौन उत्पीड़न समिति भी गठित की जाएगी। महिला चिकित्सक और स्टॉफ के साथ समिति बैठक कर फीड बैक प्राप्त करेगी।
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ठेका और आउटसोर्स कर्मियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य
सरकारी अस्पतालों में एनएचएम एवं स्वास्थ्य विभाग के अधीन नियुक्त ठेका या आउटसोर्स कर्मियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। विवरण में इनके चरित्र का भी उल्लेख होगा। यदि पुलिस सत्यापन में आपराधिक प्रवृत्ति के होने की पुष्टि हुई तो ऐसे लोगों को सेवा नहीं रखा जाएगा।
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अस्पताल प्रभारी दर्ज कराएंगे केस
नई व्यवस्था के तहत यदि अस्पताल के भीतर किसी डॉक्टर या कर्मचारी के साथ हिंसा की कोई घटना होगी तो इससे संबंधित केस अस्पताल प्रभारी ही दर्ज कराएंगे। पीड़ित को केस दर्ज कराने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। इसे संस्थागत एफआईआर का नाम दिया गया है। इस व्यवस्था से पीड़ित स्टॉफ तनाव से मुक्त रहेगा।
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कोट
अस्पतालों की सुरक्षा को लेकर मुख्य सचिव की नई गाइडलाइन प्राप्त हुई है। इसके अनुपालन के लिए सभी अस्पताल के प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं। सभी बिंदुओं पर जल्द ही कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी।
-डॉ. आरएस दुबे, सीएमओ