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जिले के पहले एमआरएफ सेंटर का निर्माण हुआ शुरू
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कोइलपुरा में बन रहा एमआरएफ सेंटर ।
- फोटो : BASTI
जिले के पहले एमआरएफ सेंटर का निर्माण हुआ शुरू
बस्ती। कोइलपुरा में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत 38 लाख रुपये की लागत से जिले के पहले एमआरएफ सेंटर का निर्माण शुरू हो गया है। जल्द ही यह सेंटर बनकर तैयार हो जाएगा। यहां लगने वाली मशीन से मैटीरियल रिकवरी भी की जाएगी।
नगर पालिका परिषद की ओर से बनवाए जा रहे इस सेंटर पर गीला व सूखा कचरा को मशीन के माध्यम से अलग किया जाएगा। इन कूड़ा में मिलने वाले प्लास्टिक, लोहे के सामान, खाली बोतलों सहित अन्य वस्तुओं को अलग किया जाएगा। इसके बाद इन वस्तुओं की नीलामी की जाएगी, जिससे नगर पालिका को अच्छी आय होने की उम्मीद है। शहर के कॉलोनियों व वार्डों से प्रतिदिन निकलने वाले कचरे को एमआरएफ सेंटर तक पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा घरों से निकला मलबा आदि 13 तरह का कचरा अलग-अलग किया जा सकेगा। जबकि, गीले कचरे से खाद बनाई जाएगी। यहां एक दिन में दस से बारह मीट्रिक टन कचरा अलग करने का लक्ष्य रखा है। नगर पालिका परिषद के ईओ अखिलेश त्रिपाठी ने बताया कि एमआरएफ सेंटर का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। इस पर लगभग 38 लाख रुपये खर्च होंगे। शहर से निकले वाले कचरे को इस सेंटर पर पहुंचाया जाएगा। इसके बाद सूखे व गीले कचरे को अलग किया जाएगा। कचरे से निकले वाले प्लास्टिक, कांच की बोतलों आदि को एकत्र कर उनकी नीलामी कराई जाएगी।
मलबा निकालने के लिए लगेगी मशीन
मकान से निकलने वाले मलबे को अलग करने के लिए मशीन लगाई जाएगी, जिसमें से रेत, पत्थर, ईंट, अलग की जाएगी। शहर से निकलने वाला मलबा इन सेंटरों में भेजा जाएगा। इसके अलावा प्लास्टिक को अलग करने के लिए भी मशीन होगी। इसके बाद प्लास्टिक को काटने के लिए प्लास्टिक शेडर भी रहेगा। इसमें रिसाइकिल होने वाले प्लास्टिक को अलग करके रिसाइकिल के लिए भेजा जाएगा। जबकि, नॉन रिसाइकिल वाले प्लास्टिक का प्रयोग सड़क निर्माण में किया जाएगा। प्लास्टिक को कंप्रेश कर बंडल बनाए जाएंगे।
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बस्ती। कोइलपुरा में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत 38 लाख रुपये की लागत से जिले के पहले एमआरएफ सेंटर का निर्माण शुरू हो गया है। जल्द ही यह सेंटर बनकर तैयार हो जाएगा। यहां लगने वाली मशीन से मैटीरियल रिकवरी भी की जाएगी।
नगर पालिका परिषद की ओर से बनवाए जा रहे इस सेंटर पर गीला व सूखा कचरा को मशीन के माध्यम से अलग किया जाएगा। इन कूड़ा में मिलने वाले प्लास्टिक, लोहे के सामान, खाली बोतलों सहित अन्य वस्तुओं को अलग किया जाएगा। इसके बाद इन वस्तुओं की नीलामी की जाएगी, जिससे नगर पालिका को अच्छी आय होने की उम्मीद है। शहर के कॉलोनियों व वार्डों से प्रतिदिन निकलने वाले कचरे को एमआरएफ सेंटर तक पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा घरों से निकला मलबा आदि 13 तरह का कचरा अलग-अलग किया जा सकेगा। जबकि, गीले कचरे से खाद बनाई जाएगी। यहां एक दिन में दस से बारह मीट्रिक टन कचरा अलग करने का लक्ष्य रखा है। नगर पालिका परिषद के ईओ अखिलेश त्रिपाठी ने बताया कि एमआरएफ सेंटर का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। इस पर लगभग 38 लाख रुपये खर्च होंगे। शहर से निकले वाले कचरे को इस सेंटर पर पहुंचाया जाएगा। इसके बाद सूखे व गीले कचरे को अलग किया जाएगा। कचरे से निकले वाले प्लास्टिक, कांच की बोतलों आदि को एकत्र कर उनकी नीलामी कराई जाएगी।
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मलबा निकालने के लिए लगेगी मशीन
मकान से निकलने वाले मलबे को अलग करने के लिए मशीन लगाई जाएगी, जिसमें से रेत, पत्थर, ईंट, अलग की जाएगी। शहर से निकलने वाला मलबा इन सेंटरों में भेजा जाएगा। इसके अलावा प्लास्टिक को अलग करने के लिए भी मशीन होगी। इसके बाद प्लास्टिक को काटने के लिए प्लास्टिक शेडर भी रहेगा। इसमें रिसाइकिल होने वाले प्लास्टिक को अलग करके रिसाइकिल के लिए भेजा जाएगा। जबकि, नॉन रिसाइकिल वाले प्लास्टिक का प्रयोग सड़क निर्माण में किया जाएगा। प्लास्टिक को कंप्रेश कर बंडल बनाए जाएंगे।
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