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Basti News: फोरलेन पर 12 ओवरब्रिज और अंडरपास का निर्माण अटका
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ट्रेनों के लेट होने से दूसरी ट्रेन में बैठने को लेकर यात्रियों की जबरदस्त भीड़।संवाद
बस्ती। गोरखपुर-लखनऊ नेशनल हाईवे-27 पर ओवरब्रिज और वीयूपी अंडरपास के निर्माण से पहले ही जमीनी पेच फंस गया है। इससे ओवरब्रिज-अंडरपास के जाल से यातायात में हो रही किचकिच जल्द दूर होने की उम्मीद को भी झटका लगा है। चालू सत्र में ओवरब्रिज-अंडरपास के निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। चूंकि, अब जमीन की अड़चन से परियोजना अटक गई है।
बता दें कि गोरखपुर-बस्ती, अयोध्या सीमा तक नेशनल हाईवे के आवागमन में सुधार के लिए कार्ययोजना बनी थी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने बस्ती सीमा के भीतर 12 दुर्घटना बाहुल्य जगहों पर ओवरब्रिज-अंडरपास के लिए प्रस्ताव बनाकर भारत सरकार को भेजा था। वहां से मंजूरी मिल गई थी। अब जब चिह्नित स्थलों पर ओवरब्रिज और अंडरपास के निर्माण की बारी आई तो पता चला कि वन विभाग की जमीन और पेड़ प्रभावित हो रहे हैं। इसके बाद वन विभाग ने आपत्ति दर्ज कराते हुए जमीन की मांग कर डाली है।
अब जमीन उपलब्ध न होने के चलते आगे की कार्रवाई ठप हो गई है। फिलहाल वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्र के बदले में एनएचएआई से 19.34 हेक्टेयर भूमि मांगा है। बताया गया कि इससे अब ओवरब्रिज-अड़रपास का काम शुरू होने में वक्त लग सकता है। लोगों का कहना है कि ओवरब्रिज का निर्माण होने और चिह्नित स्थलों पर अंडरपास बन जाने से यातायात व्यवस्था बेहतर हो जाएगी। हाईवे के जाम से भी निजात और दुर्घटना से बचा जा सकता है। यही नहीं वाहन तेजी से फर्राटा भी भरेंगे।
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चूंकि, अभी चयनित स्थलों पर स्पीड ब्रेकर के जरिये ही वाहनों की गति कम की जा रही है। आए दिन यहां हादसे भी हो रहे हैं। इससे निजात दिलाने को यह योजना बनी थी, जो वन विभाग की जमीन के चलते मामला फंस गया है।
यह है मामला : गोरखपुर-लखनऊ नेशनल हाईवे के बस्ती जनपद में प्रस्तावित ओवरब्रिज और वीयूपी के निर्माण से पहले सर्वे शुरू हुआ तो वन विभाग की 9.67 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होती दिखी। इसके बाद वन विभाग ने डीएलएफ के तहत 19.34 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने के लिए एनएचएआई को पत्राचार किया। बताया गया कि यह भूमि नेशनल हाईवे 27 के किमी. 182.8 से 252.86 तक है। अभी एनएचएआई की ओर से उतनी भूमि नहीं दी गई है। इससे प्रस्तावित स्थल पर निर्माण कार्य के लिए वन विभाग अनुमति नहीं दे रहा है।
इन स्थानों पर प्रस्तावित है ओवरब्रिज-वीयूपी :
एनएच-27 पर किमी. 182.8 से 252.86 तक 12 स्थलों पर ओवरब्रिज व वीयूपी प्रस्तावित है। इसमें कौलपुर, शंकरपुर, भदावल कला, खैरी ओझा, पिकौरा सनी, नकटीदेई बुजुर्ग कप्तानगंज, गौरा, दुधौरा, अंदोपुर, तिलकपुर, जागेसर और मरहा शामिल है।
दो टोल से होती है 60 लाख रुपये की वसूली : एनएचए-27 पर दो टोल प्लाजा संचालित हैं। दोनों टोल से करीब 45 से 50 लाख रुपये की वसूली रोजाना होती है। शहर स्थित मड़वानगर टोल से 17 से 18 लाख रुपये जबकि हर्रैया के पास संचालित चौकड़ी टोल प्लाजा 30 से 31 लाख रुपये की वसूली रोजाना हो रही है।
दोनों टोल प्लाजा से करीब 24 घंटे में 13 से 14 हजार वाहन गुजरते हैं। पिछले कुछ साल से वाहनों का दबाव हाईवे पर लगातार बढ़ रहा है। इसको देखते हुए दुर्घटना बाहुल्य इलाकों में ओवरब्रिज और वीयूपी का निर्माण प्रस्तावित किया गया है।
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बता दें कि गोरखपुर-बस्ती, अयोध्या सीमा तक नेशनल हाईवे के आवागमन में सुधार के लिए कार्ययोजना बनी थी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने बस्ती सीमा के भीतर 12 दुर्घटना बाहुल्य जगहों पर ओवरब्रिज-अंडरपास के लिए प्रस्ताव बनाकर भारत सरकार को भेजा था। वहां से मंजूरी मिल गई थी। अब जब चिह्नित स्थलों पर ओवरब्रिज और अंडरपास के निर्माण की बारी आई तो पता चला कि वन विभाग की जमीन और पेड़ प्रभावित हो रहे हैं। इसके बाद वन विभाग ने आपत्ति दर्ज कराते हुए जमीन की मांग कर डाली है।
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अब जमीन उपलब्ध न होने के चलते आगे की कार्रवाई ठप हो गई है। फिलहाल वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्र के बदले में एनएचएआई से 19.34 हेक्टेयर भूमि मांगा है। बताया गया कि इससे अब ओवरब्रिज-अड़रपास का काम शुरू होने में वक्त लग सकता है। लोगों का कहना है कि ओवरब्रिज का निर्माण होने और चिह्नित स्थलों पर अंडरपास बन जाने से यातायात व्यवस्था बेहतर हो जाएगी। हाईवे के जाम से भी निजात और दुर्घटना से बचा जा सकता है। यही नहीं वाहन तेजी से फर्राटा भी भरेंगे।
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चूंकि, अभी चयनित स्थलों पर स्पीड ब्रेकर के जरिये ही वाहनों की गति कम की जा रही है। आए दिन यहां हादसे भी हो रहे हैं। इससे निजात दिलाने को यह योजना बनी थी, जो वन विभाग की जमीन के चलते मामला फंस गया है।
यह है मामला : गोरखपुर-लखनऊ नेशनल हाईवे के बस्ती जनपद में प्रस्तावित ओवरब्रिज और वीयूपी के निर्माण से पहले सर्वे शुरू हुआ तो वन विभाग की 9.67 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होती दिखी। इसके बाद वन विभाग ने डीएलएफ के तहत 19.34 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने के लिए एनएचएआई को पत्राचार किया। बताया गया कि यह भूमि नेशनल हाईवे 27 के किमी. 182.8 से 252.86 तक है। अभी एनएचएआई की ओर से उतनी भूमि नहीं दी गई है। इससे प्रस्तावित स्थल पर निर्माण कार्य के लिए वन विभाग अनुमति नहीं दे रहा है।
इन स्थानों पर प्रस्तावित है ओवरब्रिज-वीयूपी :
एनएच-27 पर किमी. 182.8 से 252.86 तक 12 स्थलों पर ओवरब्रिज व वीयूपी प्रस्तावित है। इसमें कौलपुर, शंकरपुर, भदावल कला, खैरी ओझा, पिकौरा सनी, नकटीदेई बुजुर्ग कप्तानगंज, गौरा, दुधौरा, अंदोपुर, तिलकपुर, जागेसर और मरहा शामिल है।
दो टोल से होती है 60 लाख रुपये की वसूली : एनएचए-27 पर दो टोल प्लाजा संचालित हैं। दोनों टोल से करीब 45 से 50 लाख रुपये की वसूली रोजाना होती है। शहर स्थित मड़वानगर टोल से 17 से 18 लाख रुपये जबकि हर्रैया के पास संचालित चौकड़ी टोल प्लाजा 30 से 31 लाख रुपये की वसूली रोजाना हो रही है।
दोनों टोल प्लाजा से करीब 24 घंटे में 13 से 14 हजार वाहन गुजरते हैं। पिछले कुछ साल से वाहनों का दबाव हाईवे पर लगातार बढ़ रहा है। इसको देखते हुए दुर्घटना बाहुल्य इलाकों में ओवरब्रिज और वीयूपी का निर्माण प्रस्तावित किया गया है।