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जिला अस्पताल की ओपीडी ठंड से बुरी तरह प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 23 Jan 2016 01:03 AM IST
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बस्ती। ठंड के चलते जिला अस्पताल की ओपीडी गैलरी शुक्रवार को सूनी रही।
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इक्का दुक्का मरीज दिखे वो भी ठंड से बचने के लिए अपने को शाल और कंबल के
बीच लपेटे रहे। कई डॉक्टरों के कक्ष सूने दिखे। सिर्फ फिजिशियन के कक्ष में
ही कुछ मरीज दिख रहे थे। बाकी चिकित्सक इधर उधर टहलते नजर आए।
दिन में साढ़े बारह बजे तक जिला अस्पताल की ओपीडी में चिकित्सकों से परामर्श लेेने के लिए पंजीकरण काउंटर पर महज साढ़े चार सौ मरीजों ने पर्ची कटाई थी। जो कि सामान्य दिनों में करीब एक हजार तक पहुंच जाता था। सर्जन का कक्ष खाली पड़ा था।
ओपीडी गैलरी में चंद मरीज फिजिशियन कक्ष के बाहर अपने नंबर के आने का इंतजार कर रहे थे। फिजिशियन डॉ रामजी सोनी ने इस समय तक महज 47 मरीजों को परामर्श दिया था। इसमें सुनीता, सावित्री, प्रेमशंकर, शांति, अमरनाथ, अब्दुल रईस, सुरेश आदि मरीज शामिल रहे। डॉ ने बताया अधिकतर मरीज सर्दी जुकाम, खांसी, बुखार व सांस की तकलीफ से परेशान हैं।
बताया कि सामान्य दिनों में डेढ़ से दौ सौ मरीजों को परामर्श देते थे। ठंड से मरीजों की संख्या काफी प्रभावित हुई है। पंजीकरण काउंटर सूना था। पर्ची काटने वाला लिपिक मरीजों के आने की प्रतीक्षा कर रहा था। आयुष विंग में चहल पहल ठीक दिखी। होम्यो चिकित्साधिकारी डॉ वीके वर्मा अपने कक्ष में मरीजों को परामर्श दे रहे थे।
बताया कि इस समय तक उन्होने 75 मरीजों को परामर्श दिया है। बताया ठंड के चलते इन दिनों अधिकांश मरीजों को सर्दी, जुकाम, खांसी और गले व सीने में संक्रमण की शिकायतें हैं। बताया कि होम्योपैैथी की दवाओं का कोई साइड इफेक्ट न होने से लोगों का झुकाव होम्योपैैथी की दवाओं की ओर है। वहीं यूनानी चिकित्सक डॉ जुनैद अहमद खां भी अपने कक्ष में मरीज देखते मिले। बताया कि इन दिनों मरीज काफी कम आ रहे हैं।
फिजिशियन डॉ रामजी सोनी ने बताया कि इन दिनों काफी सावधानी बरतने की जरूरत है। ठंड से बचाव के लिए ऊनी कपड़ों से अपने को ढके रखें। रात को सोने के समय सिर, कान व पैर ठीक से ढकें। पानी उबाल कर गुनगुना पीएं। बासी भोजन कदापि न करें।
बताया कि अगर रात में कमरे से बाहर जाना हो तो बिस्तर के निकलने के दो मिनट बाद ही जाएं, जिससे शरीर का तापमान कमरे के अनुकूल हो जाए। अन्यथा रजाई और कंबल से निकलने के बाद सीधे बाहर या बरामदे में जाने पर ठंड तेजी से अटैक कर सकती है। जो ह्दयरोगियों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है।
दिन में साढ़े बारह बजे तक जिला अस्पताल की ओपीडी में चिकित्सकों से परामर्श लेेने के लिए पंजीकरण काउंटर पर महज साढ़े चार सौ मरीजों ने पर्ची कटाई थी। जो कि सामान्य दिनों में करीब एक हजार तक पहुंच जाता था। सर्जन का कक्ष खाली पड़ा था।
ओपीडी गैलरी में चंद मरीज फिजिशियन कक्ष के बाहर अपने नंबर के आने का इंतजार कर रहे थे। फिजिशियन डॉ रामजी सोनी ने इस समय तक महज 47 मरीजों को परामर्श दिया था। इसमें सुनीता, सावित्री, प्रेमशंकर, शांति, अमरनाथ, अब्दुल रईस, सुरेश आदि मरीज शामिल रहे। डॉ ने बताया अधिकतर मरीज सर्दी जुकाम, खांसी, बुखार व सांस की तकलीफ से परेशान हैं।
बताया कि सामान्य दिनों में डेढ़ से दौ सौ मरीजों को परामर्श देते थे। ठंड से मरीजों की संख्या काफी प्रभावित हुई है। पंजीकरण काउंटर सूना था। पर्ची काटने वाला लिपिक मरीजों के आने की प्रतीक्षा कर रहा था। आयुष विंग में चहल पहल ठीक दिखी। होम्यो चिकित्साधिकारी डॉ वीके वर्मा अपने कक्ष में मरीजों को परामर्श दे रहे थे।
बताया कि इस समय तक उन्होने 75 मरीजों को परामर्श दिया है। बताया ठंड के चलते इन दिनों अधिकांश मरीजों को सर्दी, जुकाम, खांसी और गले व सीने में संक्रमण की शिकायतें हैं। बताया कि होम्योपैैथी की दवाओं का कोई साइड इफेक्ट न होने से लोगों का झुकाव होम्योपैैथी की दवाओं की ओर है। वहीं यूनानी चिकित्सक डॉ जुनैद अहमद खां भी अपने कक्ष में मरीज देखते मिले। बताया कि इन दिनों मरीज काफी कम आ रहे हैं।
फिजिशियन डॉ रामजी सोनी ने बताया कि इन दिनों काफी सावधानी बरतने की जरूरत है। ठंड से बचाव के लिए ऊनी कपड़ों से अपने को ढके रखें। रात को सोने के समय सिर, कान व पैर ठीक से ढकें। पानी उबाल कर गुनगुना पीएं। बासी भोजन कदापि न करें।
बताया कि अगर रात में कमरे से बाहर जाना हो तो बिस्तर के निकलने के दो मिनट बाद ही जाएं, जिससे शरीर का तापमान कमरे के अनुकूल हो जाए। अन्यथा रजाई और कंबल से निकलने के बाद सीधे बाहर या बरामदे में जाने पर ठंड तेजी से अटैक कर सकती है। जो ह्दयरोगियों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है।