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बच्चों को मुर्गा बनाने पर नोटिस
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Thu, 14 Jul 2016 11:16 PM IST
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बच्चों को मुर्गा बनाने पर नोटिस
- फोटो : Getty
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परिषदीय स्कूलों में बच्चों को शिक्षकों के शारीरिक दंड दिए जाने का मामला सामने आने पर बीएसए मनिराम सिंह ने खंड शिक्षा अधिकारी रामनगर को नोटिस दिया है। जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। यह नोटिस अमर उजाला में प्रकाशित खबर को संज्ञान में लेकर दी गई। बीएसए ने बताया कि शासनादेश के तहत किसी भी बच्चे को न तो मुर्गा बनाया जा सकता है और न अन्य कोई शारीरिक दंड ही दिया जा सकता है। बताया कि बीईओ के रिपोर्ट आने के बाद संबंधित स्कूल के शिक्षिका के विरुद्घ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
14 जुलाई को अमर उजाला टीम ने बच्चों को बुधवार को मिलने वाले दूध और तहरी का सच जानने के लिए रामनगर ब्लॉक के 10 प्राथमिक स्कूलों का पड़ताल की। टीम जब प्राथमिक विद्यालय छपिया खास पहुंची तो वहां पर कुछ बच्चों को दंड के तौर पर मुर्गा बनाया गया था। जब शिक्षिका से टीम ने इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि जो बच्चों को पढ़ाया गया वह पढ़ नहीं पा रहे हैं, इसलिए सजा दी गई है।
गुरूवार को परिषदीय स्कूलों में व्यवस्था की खुली पोल नामक शीर्षक से जब खबर प्रकाशित हुई तो इसे बीएसए ने संज्ञान में लेकर नोटिस जारी किया। नोटिस में मीनू का पालन न करने, नामांकन के सापेक्ष बच्चो की संख्या कम पाए जाने एवं दूध का वितरण न कराए जाने के लिए खंड शिक्षा अधिकारी को जिम्मेदार माना गया है, और कहा गया है कि ऐसा लगता है कि बीईओ आदेशों का पालन नहीं करा पा रहे हैं।
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14 जुलाई को अमर उजाला टीम ने बच्चों को बुधवार को मिलने वाले दूध और तहरी का सच जानने के लिए रामनगर ब्लॉक के 10 प्राथमिक स्कूलों का पड़ताल की। टीम जब प्राथमिक विद्यालय छपिया खास पहुंची तो वहां पर कुछ बच्चों को दंड के तौर पर मुर्गा बनाया गया था। जब शिक्षिका से टीम ने इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि जो बच्चों को पढ़ाया गया वह पढ़ नहीं पा रहे हैं, इसलिए सजा दी गई है।
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गुरूवार को परिषदीय स्कूलों में व्यवस्था की खुली पोल नामक शीर्षक से जब खबर प्रकाशित हुई तो इसे बीएसए ने संज्ञान में लेकर नोटिस जारी किया। नोटिस में मीनू का पालन न करने, नामांकन के सापेक्ष बच्चो की संख्या कम पाए जाने एवं दूध का वितरण न कराए जाने के लिए खंड शिक्षा अधिकारी को जिम्मेदार माना गया है, और कहा गया है कि ऐसा लगता है कि बीईओ आदेशों का पालन नहीं करा पा रहे हैं।
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