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Basti News: सोलर कार बनाने में दक्ष हो रहे बच्चे, तराशा जा रहा कौशल
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बस्ती। जिले के 40 परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को सोलर पंप व कार बनाने में दक्ष किया जा रहा है। इसके साथ ही उनका कौशल भी तराशा जा रहा है। कुल चार ट्रेडों में बच्चे हुनरमंद बनाए जा रहे हैं। ताकि आगे चलकर उन्हें अपने कला कौशल को जानने में समय न लगे। लर्निंग बाय डूइंग के जरिये बचपन से ही बच्चों के अंदर छिपी प्रतिभा को बाहर लाने का प्रयास किया जा रहा है।
जिले में वर्ष 2024-25 में पहले चरण में 40 विद्यालय को लर्निंग बाय डूइंग के तहत चयनित किया गया था। इसके बाद वर्ष 2025-26 में कुल 48 विद्यालय दूसरे चरण में चयनित हुए। हालांकि अभी दूसरे चरण वाले विद्यालयों में धनराशि नहीं जा रही है। केवल पहले चरण वाले चयनित कंपोजिट, उच्च प्राथमिक व पीएम श्री विद्यालय में ही धन आवंटित हो रही है।
कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को कला कौशल सिखाया जा रहा है। एग्रीकल्चर, होम एवं हेल्थ, इंजीनियरिंग एंड वर्कशाप व इंजीनियरिंग एंड एनवायरमेंट ट्रेड में बच्चों को दक्षता दी जा रही है। इसका उद्देश्य बच्चों की प्रतिभा निखारने और उन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर शिक्षा देना है।
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यह कार्यक्रम बच्चों को किताबों की सीमित दुनिया से बाहर निकालकर उन्हें प्रयोग करके सीखने की प्रेरणा दे रहा है। बच्चे अब खुद प्रोजेक्ट बना रहे हैं, माॅडल तैयार कर रहे हैं और सामाजिक समस्याओं के समाधान ढूंढ रहे हैं। ये विषय न केवल पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं, बल्कि बच्चों की कल्पनाशीलता और रचनात्मकता को भी बढ़ावा दे रहे हैं। बच्चे समूहों में मिलकर कार्य करते हैं, विचार-विमर्श करते हैं, समस्याएं पहचानते हैं और उनके समाधान खोजते हैं। इस प्रक्रिया में वे वैज्ञानिक सोच, तकनीकी कौशल, समूह कार्य, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे जीवनोपयोगी कौशल सीखते हैं। बच्चों को पढ़ाई के साथ लकड़ी और धातु पर प्रयोग, ऊर्जा व पर्यावरण, कृषि, बागवानी, पाक कला, स्वास्थ्य व पोषण जैसे क्षेत्रों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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जिले में वर्ष 2024-25 में पहले चरण में 40 विद्यालय को लर्निंग बाय डूइंग के तहत चयनित किया गया था। इसके बाद वर्ष 2025-26 में कुल 48 विद्यालय दूसरे चरण में चयनित हुए। हालांकि अभी दूसरे चरण वाले विद्यालयों में धनराशि नहीं जा रही है। केवल पहले चरण वाले चयनित कंपोजिट, उच्च प्राथमिक व पीएम श्री विद्यालय में ही धन आवंटित हो रही है।
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कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को कला कौशल सिखाया जा रहा है। एग्रीकल्चर, होम एवं हेल्थ, इंजीनियरिंग एंड वर्कशाप व इंजीनियरिंग एंड एनवायरमेंट ट्रेड में बच्चों को दक्षता दी जा रही है। इसका उद्देश्य बच्चों की प्रतिभा निखारने और उन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर शिक्षा देना है।
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यह कार्यक्रम बच्चों को किताबों की सीमित दुनिया से बाहर निकालकर उन्हें प्रयोग करके सीखने की प्रेरणा दे रहा है। बच्चे अब खुद प्रोजेक्ट बना रहे हैं, माॅडल तैयार कर रहे हैं और सामाजिक समस्याओं के समाधान ढूंढ रहे हैं। ये विषय न केवल पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं, बल्कि बच्चों की कल्पनाशीलता और रचनात्मकता को भी बढ़ावा दे रहे हैं। बच्चे समूहों में मिलकर कार्य करते हैं, विचार-विमर्श करते हैं, समस्याएं पहचानते हैं और उनके समाधान खोजते हैं। इस प्रक्रिया में वे वैज्ञानिक सोच, तकनीकी कौशल, समूह कार्य, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे जीवनोपयोगी कौशल सीखते हैं। बच्चों को पढ़ाई के साथ लकड़ी और धातु पर प्रयोग, ऊर्जा व पर्यावरण, कृषि, बागवानी, पाक कला, स्वास्थ्य व पोषण जैसे क्षेत्रों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।