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टेक्नीशियन न होने से बंद है कैली का डायलिसिस यूनिट
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कैली अस्पताल का डायलिसिस यूनिट।
- फोटो : BASTI
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टेक्नीशियन न होने से बंद है कैली का डायलिसिस यूनिट
आउट सोर्सिंग टेक्नीशियन की नौकरी समाप्त होने के बाद धूल फांक रही मशीन
बस्ती। कोविड यूनिट की ओर से ओपेक चिकित्सालय कैली में स्थापित तीन डायलिसिस मशीन बंद पड़ीं हैं। जबकि इसके संचालन के लिए एनएचएम से टेक्नीशियनों की भर्ती भी की गई थी। तब रोज आठ से दस मरीजों का डायलिसिस होता था। कोरोना के मरीज न के बराबर मिलने के बाद से यहां यूनिट पर ताला लटक गया। तब से लेकर अब तक करीब तीन माह बीत चुके हैं।
कोविड काल में महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली को कोविड अस्पताल लेवल-2 व थ्री घोषित किया गया था। इसके चलते यहां करीब 200 बेड कोरोना मरीजों के लिए सुरक्षित रखे गए थे। बाद में इनकी संख्या भी बढ़ा दी गई थी। कोरोना मरीजों के लिए कॉलेज प्रशासन ने डायलिसिस की तीन यूनिट स्थापित की थी। करोड़ों की ये मशीनें तीन माह से बेमतलब बन गई हैं। इनका उपयोग टेक्नीशियन न होने के कारण नहीं हो पा रहा है।
करीब तीन महीने से बंद मशीनों के रखखाव का भी संकट खड़ा हो गया है। क्योंकि यहां टेक्नीशियन नहीं हैं। यहां के चिकित्सक बताते हैं कि विशेषज्ञ हाथों के न होने से स्थिति खराब है। इसके चलते यह यूनिट पूरी तरह ठप है। यही हाल रहा तो करोड़ों की मशीन कबाड़ हो जाएंगी। मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि कोविड काल के टेक्नीशियन को आउट सोर्सिंग कंपनी को वापस कर दिया गया है। मगर देखरेख के लिए कुछ प्रशिक्षण प्राप्त लोग हैं। उन्होंने कहा कि टेक्नीशियन की कमी के चलते डायलिसिस यूनिट चलाना संभव नहीं है, जो संसाधन हैं उसमें बेहतर परिणाम देने का प्रयास किया जा रहा है।
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आउट सोर्सिंग टेक्नीशियन की नौकरी समाप्त होने के बाद धूल फांक रही मशीन
बस्ती। कोविड यूनिट की ओर से ओपेक चिकित्सालय कैली में स्थापित तीन डायलिसिस मशीन बंद पड़ीं हैं। जबकि इसके संचालन के लिए एनएचएम से टेक्नीशियनों की भर्ती भी की गई थी। तब रोज आठ से दस मरीजों का डायलिसिस होता था। कोरोना के मरीज न के बराबर मिलने के बाद से यहां यूनिट पर ताला लटक गया। तब से लेकर अब तक करीब तीन माह बीत चुके हैं।
कोविड काल में महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली को कोविड अस्पताल लेवल-2 व थ्री घोषित किया गया था। इसके चलते यहां करीब 200 बेड कोरोना मरीजों के लिए सुरक्षित रखे गए थे। बाद में इनकी संख्या भी बढ़ा दी गई थी। कोरोना मरीजों के लिए कॉलेज प्रशासन ने डायलिसिस की तीन यूनिट स्थापित की थी। करोड़ों की ये मशीनें तीन माह से बेमतलब बन गई हैं। इनका उपयोग टेक्नीशियन न होने के कारण नहीं हो पा रहा है।
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करीब तीन महीने से बंद मशीनों के रखखाव का भी संकट खड़ा हो गया है। क्योंकि यहां टेक्नीशियन नहीं हैं। यहां के चिकित्सक बताते हैं कि विशेषज्ञ हाथों के न होने से स्थिति खराब है। इसके चलते यह यूनिट पूरी तरह ठप है। यही हाल रहा तो करोड़ों की मशीन कबाड़ हो जाएंगी। मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि कोविड काल के टेक्नीशियन को आउट सोर्सिंग कंपनी को वापस कर दिया गया है। मगर देखरेख के लिए कुछ प्रशिक्षण प्राप्त लोग हैं। उन्होंने कहा कि टेक्नीशियन की कमी के चलते डायलिसिस यूनिट चलाना संभव नहीं है, जो संसाधन हैं उसमें बेहतर परिणाम देने का प्रयास किया जा रहा है।
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