{"_id":"6536c951b554708661061324","slug":"brothers-accused-of-fraud-basti-news-c-207-1-sgkp1002-6140-2023-10-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: जालसाजी के आरोपी भाइयों को साइबर टीम ने गाजियाबाद से दबोचा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: जालसाजी के आरोपी भाइयों को साइबर टीम ने गाजियाबाद से दबोचा
Tue, 24 Oct 2023 12:58 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 24 Oct 2023 12:58 AM IST
विज्ञापन
पुलिस के हत्थे चढ़े राजस्थान के भरतपुर के साइबर अपराधी सगे भाई रोहित सिंह व अरविन्द
- सोनहा क्षेत्र के एक शख्स से साढ़े छह लाख की ठगी की तफ्तीश में पकड़ा गया गिरोह
- बंद बीमा पॉलिसी का भुगतान कराने के नाम पर देते थे झांसा राजस्थान के रहने वाले भाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले की साइबर थाने की टीम ने सोमवार को राजस्थान के भरतपुर के एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो बीमा पॉलिसी की परिपक्वता की धनराशि दिलाने और बंद पॉलिसी को चालू कराने के नाम पर कई प्रदेशों में जालसाजी करता था। गाजियाबाद में एटीएम से फ्राड के रुपये निकालते समय गिरोह के दो गुर्गों रोहित सिंह व अरविंद सिंह निवासी बहताना थाना डीह जिला भरतपुर राजस्थान को साइबर टीम ने दबोच लिया। दोनों सगे भाई हैं।
दोनों ने पिछले दिन सोनहा थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति से साढ़े छह लाख का फ्राड करने की बात कबूल की है। साइबर थाने के प्रभारी निरीक्षक विकास यादव ने बताया कि पूछताछ में दोनों ने देश के विभिन्न प्रदेशों से करोड़ों रुपये का फ्राड करने के बारे में बताया है। इनके छह बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन, सिम कार्ड, फर्जी आधार कार्ड, एटीएम व अन्य कागजात बरामद किए गए हैं।
असल में सोनहा थानाक्षेत्र के चिरैया डाड़ निवासी हरिहर प्रसाद ने 12 दिसंबर 22 को तहरीर दी थी कि उनकी छह बीमा पॉलिसियां थीं। इसमें से पांच की केवल एक ही किस्त जमा कर पाए थे। एक व्यक्ति ने उन्हें मोबाइल फोन पर कॉल करके कहा कि उनकी बंद सभी पाॅलिसी में जमा धनराशि ब्याज समेत दिला दी जाएगी। इस झांसे में फंसकर उन्होंने प्रोसेसिंग फीस, जीएसटी आदि के नाम पर धीरे-धीरे करके कई बार में विभिन्न खातों में 6 लाख 52 हजार 600 रुपये जमा कर दिए। ठगी का एहसास होने के बाद साइबर क्राइम थाना बस्ती परिक्षेत्र पर मुकदमा दर्ज कराया।
विज्ञापन
आईजी आरके भारद्वाज की निर्देश में प्रभारी निरीक्षक विकास यादव ने इलेक्ट्रानिक सर्विलांस, सीडीआर एनालिसिस व अन्य साइबर तकनीक का प्रयोग करते हुए साक्ष्य जुटाना शुरू किया। इस बीच उन एटीएम की फुटेज टीम के हाथ लगी, जहां से जालसाजों ने पैसा निकाला था। इसमें उनकी पहचान होने के बाद से टीम तलाश में जुटी थी। इंस्पेक्टर विकास ने बताया कि आरोपी सगे भाई रोहित सिंह परमार और अरविंद परमार निवासी बहताना थाना डींग जिला भरतपुर राजस्थान को मुखबिर की सूचना पर गाजियाबाद से दबोच लिया गया। इस गैंग के तीसरे सदस्य गौरव कश्यप की तलाश की जा रही है।
-- -
गाजियाबाद में किराए के मकान में बनाए थे ठिकाना
- भरतपुर के रहने वाले सगे भाइयों रोहित सिंह व अरविंद ने बताया कि वह लोग गौरव कश्यप के साथ मिलकर गाजियाबाद में प्रताप विहार सेक्टर 12 में किराए का कमरा ले रखे थे। जहां से यह फ्राड का खेल करते थे। पूछताछ में दोनों ने बताया कि पहले वे कॉल सेन्टर व टूर एंड ट्रेवल्स एजेंसी में काम कर चुके हैं। बाद में एक प्राइवेट बीमा कंपनी में काम करने लगे। मगर कमाई कम होने की वजह से आर्थिक रूप से परेशान रहते थे। चूंकि उन्हें बीमा क्षेत्र का कुछ अनुभव हो गया था इसलिए तीनों ने मिलकर ऐसे पॉलिसी धारकों को झांसा देने का प्लान बनाया, जिनकी पॉलिसी किन्हीं कारणों से नियमित नहीं थी। इसका डाटा उन लोगों ने कंपनी की वेबसाइट से निकाल लिया। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि गौरव कश्यप फर्जी नाम पते से सिम निकलवाकर मोबाइल की व्यवस्था करता था। इसके बाद रोहित व अरविंद फर्जी सिम से बीमा आदि के भुगतान का लालच देकर लोगों से आधार कार्ड आदि डिटेल ले लेते थे। इसकी मदद से दूसरे के नाम व पते पर जालसाज खाता खोलवा लेते थे और एटीएम भी मंगवा लेते थे। इससे अपना फर्जी लिंक कर लेते थे। जालसाजी से मिलने वाली रकम को एटीम से निकाल लेते थे।
-- -
इस टीम ने किया खुलासा
- साइबर फ्राड का खुलासा करने वाली टीम में साइबर क्राइम थाने के प्रभारी निरीक्षक विकास यादव, एसआई अवधेश कुमार वर्मा, हरेन्द्र चौहान, महेन्द्र यादव, हेड कांस्टेबल राजेश यादव, मनोज राय, मनिन्द्र प्रताप चन्द, सुधेन्दु दीक्षित, गौरव श्रीवास्तव, कांस्टेबल जितेन्द्र यादव, रामप्रवेश यादव, सुजीत यादव, मिताली द्विवेदी, रानी व बबिता यादव शामिल रहीं।
विज्ञापन
- बंद बीमा पॉलिसी का भुगतान कराने के नाम पर देते थे झांसा राजस्थान के रहने वाले भाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले की साइबर थाने की टीम ने सोमवार को राजस्थान के भरतपुर के एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो बीमा पॉलिसी की परिपक्वता की धनराशि दिलाने और बंद पॉलिसी को चालू कराने के नाम पर कई प्रदेशों में जालसाजी करता था। गाजियाबाद में एटीएम से फ्राड के रुपये निकालते समय गिरोह के दो गुर्गों रोहित सिंह व अरविंद सिंह निवासी बहताना थाना डीह जिला भरतपुर राजस्थान को साइबर टीम ने दबोच लिया। दोनों सगे भाई हैं।
दोनों ने पिछले दिन सोनहा थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति से साढ़े छह लाख का फ्राड करने की बात कबूल की है। साइबर थाने के प्रभारी निरीक्षक विकास यादव ने बताया कि पूछताछ में दोनों ने देश के विभिन्न प्रदेशों से करोड़ों रुपये का फ्राड करने के बारे में बताया है। इनके छह बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन, सिम कार्ड, फर्जी आधार कार्ड, एटीएम व अन्य कागजात बरामद किए गए हैं।
विज्ञापन
असल में सोनहा थानाक्षेत्र के चिरैया डाड़ निवासी हरिहर प्रसाद ने 12 दिसंबर 22 को तहरीर दी थी कि उनकी छह बीमा पॉलिसियां थीं। इसमें से पांच की केवल एक ही किस्त जमा कर पाए थे। एक व्यक्ति ने उन्हें मोबाइल फोन पर कॉल करके कहा कि उनकी बंद सभी पाॅलिसी में जमा धनराशि ब्याज समेत दिला दी जाएगी। इस झांसे में फंसकर उन्होंने प्रोसेसिंग फीस, जीएसटी आदि के नाम पर धीरे-धीरे करके कई बार में विभिन्न खातों में 6 लाख 52 हजार 600 रुपये जमा कर दिए। ठगी का एहसास होने के बाद साइबर क्राइम थाना बस्ती परिक्षेत्र पर मुकदमा दर्ज कराया।
विज्ञापन
आईजी आरके भारद्वाज की निर्देश में प्रभारी निरीक्षक विकास यादव ने इलेक्ट्रानिक सर्विलांस, सीडीआर एनालिसिस व अन्य साइबर तकनीक का प्रयोग करते हुए साक्ष्य जुटाना शुरू किया। इस बीच उन एटीएम की फुटेज टीम के हाथ लगी, जहां से जालसाजों ने पैसा निकाला था। इसमें उनकी पहचान होने के बाद से टीम तलाश में जुटी थी। इंस्पेक्टर विकास ने बताया कि आरोपी सगे भाई रोहित सिंह परमार और अरविंद परमार निवासी बहताना थाना डींग जिला भरतपुर राजस्थान को मुखबिर की सूचना पर गाजियाबाद से दबोच लिया गया। इस गैंग के तीसरे सदस्य गौरव कश्यप की तलाश की जा रही है।
गाजियाबाद में किराए के मकान में बनाए थे ठिकाना
- भरतपुर के रहने वाले सगे भाइयों रोहित सिंह व अरविंद ने बताया कि वह लोग गौरव कश्यप के साथ मिलकर गाजियाबाद में प्रताप विहार सेक्टर 12 में किराए का कमरा ले रखे थे। जहां से यह फ्राड का खेल करते थे। पूछताछ में दोनों ने बताया कि पहले वे कॉल सेन्टर व टूर एंड ट्रेवल्स एजेंसी में काम कर चुके हैं। बाद में एक प्राइवेट बीमा कंपनी में काम करने लगे। मगर कमाई कम होने की वजह से आर्थिक रूप से परेशान रहते थे। चूंकि उन्हें बीमा क्षेत्र का कुछ अनुभव हो गया था इसलिए तीनों ने मिलकर ऐसे पॉलिसी धारकों को झांसा देने का प्लान बनाया, जिनकी पॉलिसी किन्हीं कारणों से नियमित नहीं थी। इसका डाटा उन लोगों ने कंपनी की वेबसाइट से निकाल लिया। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि गौरव कश्यप फर्जी नाम पते से सिम निकलवाकर मोबाइल की व्यवस्था करता था। इसके बाद रोहित व अरविंद फर्जी सिम से बीमा आदि के भुगतान का लालच देकर लोगों से आधार कार्ड आदि डिटेल ले लेते थे। इसकी मदद से दूसरे के नाम व पते पर जालसाज खाता खोलवा लेते थे और एटीएम भी मंगवा लेते थे। इससे अपना फर्जी लिंक कर लेते थे। जालसाजी से मिलने वाली रकम को एटीम से निकाल लेते थे।
इस टीम ने किया खुलासा
- साइबर फ्राड का खुलासा करने वाली टीम में साइबर क्राइम थाने के प्रभारी निरीक्षक विकास यादव, एसआई अवधेश कुमार वर्मा, हरेन्द्र चौहान, महेन्द्र यादव, हेड कांस्टेबल राजेश यादव, मनोज राय, मनिन्द्र प्रताप चन्द, सुधेन्दु दीक्षित, गौरव श्रीवास्तव, कांस्टेबल जितेन्द्र यादव, रामप्रवेश यादव, सुजीत यादव, मिताली द्विवेदी, रानी व बबिता यादव शामिल रहीं।