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Basti News: विभाग से बैंक तक जंजाल...सरकार के करम में दलालों की सेंधमारी
Sun, 13 Apr 2025 12:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 13 Apr 2025 12:22 AM IST
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बस्ती। केंद्र और राज्य सरकार की कृषि व रोजगार से संबंधित ऋण योजनाओं का लाभ लेने में आवेदकों के पसीने छूट जा रहे हैं। कागजी कोरम के नाम पर परेशान किए जाने से कई आवेदकों ने इसके लिए प्रयास भी बंद कर दिया है। वहीं बिचौलियों के जरिए बैंक में आवेदन करने वालों को झटपट लोन मिल जा रहा है। कृषि यंत्र हो या रोजगार संबंधी ऋण, सभी के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है।
बिचौलियों का संजाल बैंकों से लेकर सब्सिडी देने वाले विभाग तक फैला हुआ है। बिना इनके न तो कागजी कोरम पूरा हो पा रहा है और न ही बैंकों से ऋण ही स्वीकृत किया जा रहा है। यह बातें सामने आईं हैं पांच दिन पहले डीएम रवीश गुप्ता की ओर से की गई जांच में, जिसके बाद उन्होंने जिम्मेदारों के पेच कसते हुए बिना परेशान किए लोन के कोरम को पूरा कराने के निर्देश दिए हैं।
रोजगार संबंधी ऋण योजनाओं का हाल जानने डीएम यूपी बड़ौदा बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय में पहुंचे थे। पता चला इस बैंक के विभिन्न शाखाओं में ऋण योजनाओं में कुल 406 आवेदन पत्र प्राप्त हुए थे। इसके सापेक्ष 103 लाभार्थियों का ही ऋण स्वीकृत हो पाया। वहीं, महज 65 लाभार्थियों में ऋण की धनराशि वितरित हो सकी। जबकि कुल 268 आवेदन पत्र निरस्त कर दिए गए।
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निरस्त किए गए आवेदनों की डीएम ने क्रॉस चेकिंग की। संबंधित शाखा प्रबंधक आवेदकों से फोन पर लेकर संवाद किया, तब मामले की हकीकत सामने आई। इस दौरान कुछ आवेदकों ने बताया कि उन्हें कागजी कोरम पूरा करने के नाम पर परेशान किया जा रहा था। इस वजह से ऋण लेने के लिए प्रयास करना बंद कर दिया गया। वहीं आवेदकों की मानें तो अनुदान वाली ऋण योजनाओं में अधिकांश बैंकों में बड़ा खेल चल रहा है। बिना बिचौलिए के इन योजनाओं में सीधे लाभार्थी बन पाना बेहद कठिन है।
कटरा के कृष्ण कुमार बताते हैं कि अधिकांश बैंकों में बिचौलिए हावी है। बिना उनकी मदद के आम आवेदकों की ऋण संबंधी फाइल नहीं स्वीकृति हो पाती है। जिन आवेदकों का संपर्क बिचौलियों से नहीं होता है, उनमें से अधिकांश की फाइल बैंक पहुंचने के बाद निरस्त कर दी जा रही हैं। फाइल स्वीकृति कराने एवं सब्सिडी दिलाने में बिचौलिए आवेदक से अच्छा खासा कमीशन भी लेते हैं। बैंकों से इनकी मिलीभगत रहती है।
ऋण योजनाओं में कमीशन के खेल का उजागर होने के बाद बैंक के जिम्मेदार अधिकारी साफ-साफ बच भी जाते हैं। पकड़ में बिचौलिए ही आते हैं।
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बिचौलियों का संजाल बैंकों से लेकर सब्सिडी देने वाले विभाग तक फैला हुआ है। बिना इनके न तो कागजी कोरम पूरा हो पा रहा है और न ही बैंकों से ऋण ही स्वीकृत किया जा रहा है। यह बातें सामने आईं हैं पांच दिन पहले डीएम रवीश गुप्ता की ओर से की गई जांच में, जिसके बाद उन्होंने जिम्मेदारों के पेच कसते हुए बिना परेशान किए लोन के कोरम को पूरा कराने के निर्देश दिए हैं।
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रोजगार संबंधी ऋण योजनाओं का हाल जानने डीएम यूपी बड़ौदा बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय में पहुंचे थे। पता चला इस बैंक के विभिन्न शाखाओं में ऋण योजनाओं में कुल 406 आवेदन पत्र प्राप्त हुए थे। इसके सापेक्ष 103 लाभार्थियों का ही ऋण स्वीकृत हो पाया। वहीं, महज 65 लाभार्थियों में ऋण की धनराशि वितरित हो सकी। जबकि कुल 268 आवेदन पत्र निरस्त कर दिए गए।
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निरस्त किए गए आवेदनों की डीएम ने क्रॉस चेकिंग की। संबंधित शाखा प्रबंधक आवेदकों से फोन पर लेकर संवाद किया, तब मामले की हकीकत सामने आई। इस दौरान कुछ आवेदकों ने बताया कि उन्हें कागजी कोरम पूरा करने के नाम पर परेशान किया जा रहा था। इस वजह से ऋण लेने के लिए प्रयास करना बंद कर दिया गया। वहीं आवेदकों की मानें तो अनुदान वाली ऋण योजनाओं में अधिकांश बैंकों में बड़ा खेल चल रहा है। बिना बिचौलिए के इन योजनाओं में सीधे लाभार्थी बन पाना बेहद कठिन है।
कटरा के कृष्ण कुमार बताते हैं कि अधिकांश बैंकों में बिचौलिए हावी है। बिना उनकी मदद के आम आवेदकों की ऋण संबंधी फाइल नहीं स्वीकृति हो पाती है। जिन आवेदकों का संपर्क बिचौलियों से नहीं होता है, उनमें से अधिकांश की फाइल बैंक पहुंचने के बाद निरस्त कर दी जा रही हैं। फाइल स्वीकृति कराने एवं सब्सिडी दिलाने में बिचौलिए आवेदक से अच्छा खासा कमीशन भी लेते हैं। बैंकों से इनकी मिलीभगत रहती है।
ऋण योजनाओं में कमीशन के खेल का उजागर होने के बाद बैंक के जिम्मेदार अधिकारी साफ-साफ बच भी जाते हैं। पकड़ में बिचौलिए ही आते हैं।