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Basti News: सामने आ रही रिश्वतखोरी... फिर भी नहीं बदल रहा सरकारी कामकाज का ढर्रा
Tue, 18 Feb 2025 12:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 18 Feb 2025 12:51 AM IST
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तहसील में मुंशीगिरी का चलन, सरकारी फाइल संभाल रहे बाहरी लोग
समय से नहीं निपटाए जा रहे खारिज-दाखिल और वरासत के प्रकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। राजस्व विभाग में रिश्वतखोरी के मामले ताबड़तोड़ सामने आ रहा है। साल भीतर तीन राजस्व लेखपाल और एक चकबंदी कर्मचारी घूस लेते रंगे हाथ पकड़े जा चुके हैं। बावजूद इसके राजस्व विभाग के कामकाज का ढर्रा नहीं बदल रहा है। खारिज-दाखिल, वरासत, भूमि पैमाइश जैसे मामले समयावधि बीतने के बाद भी लंबित रखे जा रहे हैं। फरियादी कितना भी भटके समाधान के बजाय हर बार नए जांच का पेच फंस जा रहा है।
राजस्व विभाग में रिश्वतखोरी की बात किसी से छिपी नहीं है। भ्रष्टाचार निवारण दस्ता (एंटी करप्शन टीम) हर बार यहां पहुंचकर सरकारी नुमाइंदे को घूस लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर रही है। एक-दो दिन बाद ही सबकुछ पहले जैसा हो जा रहा है। विभागीय उच्चाधिकारी भी रिश्वतखोरी की परंपरा बंद करने पर गंभीर नहीं दिख रहे है।
यही वजह है कि विभिन्न राजस्व कार्यालयों में भूमि पैमाइश, खतौनी संशोधन, वरासत, खारिज-दाखिल, आय, जाति, निवास जैसे सामान्य प्रकरणों को लंबित रखने के मामले में जिम्मेदारों से स्पष्टीकरण तक नहीं लिया जा रहा है। सोमवार को सदर तहसील में नरहरिया से आए राघव शरण ने बताया कि उनकी वरासत संबंधी फाइल 14 साल से लटकी है। जबकि पांच साल से पुराने मामले निपटा दिए जाने की रिपोर्ट सभी तहसीलों से तैयार कर ली गई है।
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उन्होंने बताया कि पिता की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति पर बेटे के नाम दर्ज नहीं हो सका है। जबकि यह सामान्य प्रक्रिया है अपने आप हो जाना चाहिए। वहीं बनकटी से आए आज्ञाराम ने कहा कि यहां आने के बाद जिम्मेदारों को खोजना बेहद कठिन है। प्रत्येक कार्यालय में सिर्फ मुंशी ही मिलते हैं। वह भी बाहरी लोग हैं। उन्हीं से फाइल की नवैयत जानकर वापस होना पड़ता है।
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मालखाना से कार्यालय तक मुंशियों की भरमार
तहसील के मालखाना से कानूनगो और नायब तहसीलदार के कार्यालय तक मुंशियों की भरमार है। यह जिम्मा बाहरी लोग संभाल रहे हैं। कार्यालय के अंदर फाइलों के रखरखाव से लेकर अधिकारियों के कक्ष तक आने-जाने के कारण आम फरियादी इन्हें तहसील का ही कर्मचारी समझते हैं। इन मुंशियों को लोग अपना काम भी सौंपकर चले जा रहे हैं। फरियादी मुन्ना लाल ने बताया कि इन्हीं मुंशियों के जरिये ही आम लोगों से काम के बदले लेनदेन भी हो रहा है। यहां लिपिकों से लेकर कानूनगो और लेखपाल सभी के पास अलग-अलग मुंशी है। आय, जाति, निवास आदि की रिपोर्ट लगवाने के लिए इन्हीं मुंशियों को भेजा जाता है। यदि कोई फरियादी अधिकारियों से मुंशियों की शिकायत लेकर पहुंचता है तो उसे जानकारी में न होने की बात कहकर सीधे टाल दिया जाता है। कौशल कुमार ने कहा कि यदि तहसील में प्राइवेट मुंशी न रहें तो बहुत सारे खेल अपने आप बंद हो जाएंगे।
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सेटिंग के बाद होती हैं पैमाइश
जानकार बताते हैं कि भूमि की पैमाइश बिना सेटिंग के नहीं हो सकती। इसके लिए सबसे निचले स्तर की कड़ी लेखपाल से सांठगांठ करना पड़ता है। इसके बाद ही विभागीय टीम तैयार होती है। यदि मौके पर पैमाइश हो भी गई तो यह भी पक्का नहीं रहता है। क्योंकि तब तक दूसरा पक्ष भी संपर्क में आकर अपनी सेटिंग कर लेता है। इसके बाद पैमाइश करने वाली टीम कोई न कोई कारण दिखाकर कार्रवाई को लंबित छोड़ देती है।
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केस- एक
पिछले सप्ताह सदर तहसील में तैनात लेखपाल वेद प्रकाश दुबे को एंटी करप्शन टीम ने 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। पता चला कि एक वसीयत के मामले को निपटवाने के लिए लेखपाल ने फरियादी से 50 हजार रुपये की डील की थी। विभाग की तरफ से इस मामले की कोई जांच शुरू नहीं की गई, ताकि यह पता चल सके इसमें और कितने जिम्मेदार शामिल हैं।
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केस- दो
अप्रैल 2023 में सदर तहसील से ही एक महिला लेखपाल को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ एंटी करप्शन टीम ने पकड़ा। इस मामले में भी विभाग ने सिर्फ लेखपाल को निलंबित कर कार्रवाई पूरी कर ली। इसके आगे इस खेल मेंं अन्य कौन लोग सम्मिलित रहे, इसकी जांच नहीं हुई।
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कोट
एंटी करप्शन टीम की ओर से पकड़े गए लेखपाल पर विभागीय कार्रवाई की जा रही है। इस प्रकरण की विभागीय जांच भी कराई जाएगी। जहां तक तहसील के भीतर कार्यालयों में मुंशियों की मौजूदगी की बात है तो इसकी जांच कराई जाएगी। सख्ती से लोगों को बाहर किया जाएगा।
-कीर्ति प्रकाश भारती, मुख्य राजस्व अधिकारी
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समय से नहीं निपटाए जा रहे खारिज-दाखिल और वरासत के प्रकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। राजस्व विभाग में रिश्वतखोरी के मामले ताबड़तोड़ सामने आ रहा है। साल भीतर तीन राजस्व लेखपाल और एक चकबंदी कर्मचारी घूस लेते रंगे हाथ पकड़े जा चुके हैं। बावजूद इसके राजस्व विभाग के कामकाज का ढर्रा नहीं बदल रहा है। खारिज-दाखिल, वरासत, भूमि पैमाइश जैसे मामले समयावधि बीतने के बाद भी लंबित रखे जा रहे हैं। फरियादी कितना भी भटके समाधान के बजाय हर बार नए जांच का पेच फंस जा रहा है।
राजस्व विभाग में रिश्वतखोरी की बात किसी से छिपी नहीं है। भ्रष्टाचार निवारण दस्ता (एंटी करप्शन टीम) हर बार यहां पहुंचकर सरकारी नुमाइंदे को घूस लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर रही है। एक-दो दिन बाद ही सबकुछ पहले जैसा हो जा रहा है। विभागीय उच्चाधिकारी भी रिश्वतखोरी की परंपरा बंद करने पर गंभीर नहीं दिख रहे है।
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यही वजह है कि विभिन्न राजस्व कार्यालयों में भूमि पैमाइश, खतौनी संशोधन, वरासत, खारिज-दाखिल, आय, जाति, निवास जैसे सामान्य प्रकरणों को लंबित रखने के मामले में जिम्मेदारों से स्पष्टीकरण तक नहीं लिया जा रहा है। सोमवार को सदर तहसील में नरहरिया से आए राघव शरण ने बताया कि उनकी वरासत संबंधी फाइल 14 साल से लटकी है। जबकि पांच साल से पुराने मामले निपटा दिए जाने की रिपोर्ट सभी तहसीलों से तैयार कर ली गई है।
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उन्होंने बताया कि पिता की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति पर बेटे के नाम दर्ज नहीं हो सका है। जबकि यह सामान्य प्रक्रिया है अपने आप हो जाना चाहिए। वहीं बनकटी से आए आज्ञाराम ने कहा कि यहां आने के बाद जिम्मेदारों को खोजना बेहद कठिन है। प्रत्येक कार्यालय में सिर्फ मुंशी ही मिलते हैं। वह भी बाहरी लोग हैं। उन्हीं से फाइल की नवैयत जानकर वापस होना पड़ता है।
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मालखाना से कार्यालय तक मुंशियों की भरमार
तहसील के मालखाना से कानूनगो और नायब तहसीलदार के कार्यालय तक मुंशियों की भरमार है। यह जिम्मा बाहरी लोग संभाल रहे हैं। कार्यालय के अंदर फाइलों के रखरखाव से लेकर अधिकारियों के कक्ष तक आने-जाने के कारण आम फरियादी इन्हें तहसील का ही कर्मचारी समझते हैं। इन मुंशियों को लोग अपना काम भी सौंपकर चले जा रहे हैं। फरियादी मुन्ना लाल ने बताया कि इन्हीं मुंशियों के जरिये ही आम लोगों से काम के बदले लेनदेन भी हो रहा है। यहां लिपिकों से लेकर कानूनगो और लेखपाल सभी के पास अलग-अलग मुंशी है। आय, जाति, निवास आदि की रिपोर्ट लगवाने के लिए इन्हीं मुंशियों को भेजा जाता है। यदि कोई फरियादी अधिकारियों से मुंशियों की शिकायत लेकर पहुंचता है तो उसे जानकारी में न होने की बात कहकर सीधे टाल दिया जाता है। कौशल कुमार ने कहा कि यदि तहसील में प्राइवेट मुंशी न रहें तो बहुत सारे खेल अपने आप बंद हो जाएंगे।
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सेटिंग के बाद होती हैं पैमाइश
जानकार बताते हैं कि भूमि की पैमाइश बिना सेटिंग के नहीं हो सकती। इसके लिए सबसे निचले स्तर की कड़ी लेखपाल से सांठगांठ करना पड़ता है। इसके बाद ही विभागीय टीम तैयार होती है। यदि मौके पर पैमाइश हो भी गई तो यह भी पक्का नहीं रहता है। क्योंकि तब तक दूसरा पक्ष भी संपर्क में आकर अपनी सेटिंग कर लेता है। इसके बाद पैमाइश करने वाली टीम कोई न कोई कारण दिखाकर कार्रवाई को लंबित छोड़ देती है।
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केस- एक
पिछले सप्ताह सदर तहसील में तैनात लेखपाल वेद प्रकाश दुबे को एंटी करप्शन टीम ने 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। पता चला कि एक वसीयत के मामले को निपटवाने के लिए लेखपाल ने फरियादी से 50 हजार रुपये की डील की थी। विभाग की तरफ से इस मामले की कोई जांच शुरू नहीं की गई, ताकि यह पता चल सके इसमें और कितने जिम्मेदार शामिल हैं।
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केस- दो
अप्रैल 2023 में सदर तहसील से ही एक महिला लेखपाल को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ एंटी करप्शन टीम ने पकड़ा। इस मामले में भी विभाग ने सिर्फ लेखपाल को निलंबित कर कार्रवाई पूरी कर ली। इसके आगे इस खेल मेंं अन्य कौन लोग सम्मिलित रहे, इसकी जांच नहीं हुई।
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कोट
एंटी करप्शन टीम की ओर से पकड़े गए लेखपाल पर विभागीय कार्रवाई की जा रही है। इस प्रकरण की विभागीय जांच भी कराई जाएगी। जहां तक तहसील के भीतर कार्यालयों में मुंशियों की मौजूदगी की बात है तो इसकी जांच कराई जाएगी। सख्ती से लोगों को बाहर किया जाएगा।
-कीर्ति प्रकाश भारती, मुख्य राजस्व अधिकारी